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मिशन एनएसजी: पीएम मोदी की मुहिम को झटका, स्विट्जरलैंड भी खिलाफ!

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 June 2016, 11:18 IST

परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में सदस्यता को लेकर चीन के बाद अब स्विटजरलैंड से भी भारत को झटका लगा है. सूत्रों के मुताबिक स्विटजरलैंड ने एनएसजी में भारत की दावेदारी का विरोध किया है.

खबर है कि 48 सदस्यों के इस ग्रुप में चीन के बाद अब पांच और सदस्य देश स्विटजरलैंड, ऑस्ट्रिया, ब्राजील, तुर्की और न्यूजीलैंड भी भारत के विरोध में हैं. स्विटजरलैंड का विरोध इस वजह से अहम है क्योंकि हाल ही में पीएम नरेंद्र मोदी ने वहां का दौरा किया था.

इस दौरान स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति जेएस अम्मान ने एनएसजी में भारत की सदस्यता के दावे का समर्थन करने का भरोसा दिया था.

वहीं सूत्रों के हवाले से खबर है कि ब्राजील ने एनएसजी में सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी का आज समर्थन किया है. लेकिन उसने परमाणु अप्रसार संधि के दायरे से बाहर देशों के लिए समान शर्तों की मांग की है.

सूत्रों के मुताबिक ब्राजील का यह भी कहना है कि परमाणु अप्रसार के मामले में पाकिस्तान के मुकाबले भारत का रिकॉर्ड अच्छा है.

सियोल में बैठक बेनतीजा

इसके अलावा चीन पुराने रुख पर कायम है और उसने फिर से अड़ंगा लगा दिया है. अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक, चीन ने रात्रिभोज के बाद तीन घंटे की बैठक में इसकी सदस्यता हासिल करने की भारत की कोशिशों के विरोध का नेतृत्व किया, जिसके चलते बैठक बेनतीजा खत्म हुई.

इस मसले पर अब शुक्रवार को अंतिम फैसला लिया जाना है.चीन का कहना है कि भारत ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किया है, इसलिए उसे एनएसजी की सदस्यता नहीं मिलनी चाहिए. 

चीन विरोध पर कायम

चीन भारत के एनएसजी में प्रवेश का विरोध कर रहा है. चीन ने एनएसजी सदस्यता के लिए पाकिस्तान का समर्थन कर परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर किए बिना भारत के सदस्य बनने की राह में बड़ा रोड़ा लगा दिया है.

चीन ने जोर दिया है कि अगर भारत को कोई छूट दी जाती है, तो वही छूट पाकिस्तान को भी दी जानी चाहिए. जबकि, पाकिस्तान का परमाणु अप्रसार को लेकर कथित रूप से बुरा रिकॉर्ड रहा है. कहा जाता है कि उसने लीबिया, ईरान और उत्तर कोरिया को परमाणु हथियार प्रौद्योगिकी बेची थी.

दरअसल, चीन ने बार-बार कहा है कि भारत की सदस्यता एजेंडा में नहीं है. उसने भारत की कोशिशों पर किसी भी चर्चा को रोकने के लिए हर कोशिश की.

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के लिए यहां एकत्र हुए सभी नेताओं के लिए आयोजित महाभोज में हिस्सा लिया. मोदी के अलावा, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, पाकिस्तान के राष्ट्रपति ममनून हुसैन समेत कई नेता इस रात्रिभोज में शामिल हुए.

First published: 24 June 2016, 11:18 IST
 
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