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नो मैन्स लैंड पर फंसे 10 हज़ार रोहिंग्या

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 October 2017, 10:29 IST

म्यांमार और बांग्लादेश के बीच करीब 10 हजार रोहिंग्या नो मैन्स लैंड में फंसे हुए हैं. हालांकि इनकी मदद के लिए यहां रेड क्रॉस की अंतर्राष्ट्रीय समिति मौजूद है. दोनों देशों के बीच अंतर्राष्ट्रीय सीमा से जुड़ा एक 45 मीटर चौड़ा हिस्सा है. इस हिस्से पर न तो बांग्लादेश का कंट्रोल है और न ही म्यांमार का. यह क्षेत्र 'नो मैन्स लैंड' माना जाता है और यहीं पर रोहिंग्या फंसे हुए हैं.

बांग्लादेश के एक अफ़सर एकेएम जहांगीर अजीज ने कहा, 'वे नो मैन्स लैंड पर इंतजार कर रहे हैं क्योंकि उनके लिए कहीं और कोई स्थान शायद बचा ही नहीं है.' अजीज ने कहा, 'इस वक्त नो मैन्स लैंड पर 1,360 परिवार रह रहे हैं, जिनकी संख्या लगभग दस हजार के करीब है.' हालांकि अजीज ने यह भी बताया कि बांग्लादेश रोहिग्याओं को देश में घुसने से नहीं रोक रहा है, लेकिन नो मैन्स लैंड में रहने शरणार्थियों को मदद मिल रही है और वे वहीं रहना चाहते हैं.

दूसरी तरफ करीब 16 हज़ार रोहिंग्या शरणार्थियों को शिफ्ट किया जा रहा है जो फिलहाल बंदरबन के कुतुपलोंग में अस्थायी शिविरों में रह रहे हैं. इन्हें शिफ्ट करने के बाद नो-मैन्स लैंड में फंसे लोगों को स्थानांतरित किया जाएगा. संगठन आईसीआरसी के प्रवक्ता रेहान सुल्ताना ने कहा कि संगठन, बांग्लादेश रेड क्रीसेंट सोसायटी के साथ मिलकर बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के निवेदन पर फंसे हुए रोहिंग्या लोगों की मदद कर रहा है.

इस बीच, म्यांमार के रखाइन में हिंसा भड़कने के बाद रोहिंग्या शरणार्थियों के पड़ोसी देश बांग्लादेश भागने का क्रम लगातार छठे हफ्ते भी जारी रहा. बांग्लादेश में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय ने रविवार को कहा था कि अगस्त के अंत में हिंसा भड़कने के बाद से लगभग 509,000 रोहिंग्या बांग्लादेश भाग गए हैं.

 

First published: 5 October 2017, 10:29 IST
 
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