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44 फीसदी ब्रिटिश अब भी औपनिवेशिक साम्राज्य पर गर्व करते हैं

अमित कुमार बाजपेयी | Updated on: 23 January 2016, 17:57 IST
QUICK PILL
  • एक ओर जब दुनिया में मानवाधिकारों के समर्थन में बड़े-बड़े मुल्क और नेताओं ने आवाज उठाई है ऐसे समय में ब्रिटेन में हुए एक सर्वेक्षण में ब्रिटेन के अधिकांश नागरिकों ने साम्राज्यवाद की तरफदारी की है.
  • सर्वेक्षण करने वाली ब्रिटिश संस्था वाईओयूजीओवी ने पाया कि 44 फीसदी लोग ब्रिटेन के उपनिवेशवाद के इतिहास पर गर्व करते हैं. जबकि केवल 19 फीसदी लोगों को इसका दुख है.

एक ओर जब दुनिया में मानवाधिकारों के समर्थन में बड़े-बड़े मुल्क और नेताओं ने आगे आकर इसकी वकालत की है. तो दूसरी ओर ब्रिटेन के अधिकांश नागरिक उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद की तरफदारी करते दिख रहे हैं. 

एक नए सर्वे के मुताबिक अधिकांश ब्रिटिशों को उपनिवेशवाद और ब्रिटिश साम्राज्य के लिए दुनिया को विवश करने में अपने देश की भूमिका पर अभी भी गर्व है.

मालूम हो कि 1922 में जब ब्रिटिश साम्राज्य अपने चरम पर था तब इसका शासन दुनिया की आबादी के पांचवें हिस्से पर और कुल जमीनी क्षेत्रफल के एक चौथाई हिस्से पर था. लेकिन इसकी यह विरासत मौजूदा राय को विभाजित करती है.

1922 में अपने चरम पर ब्रिटिश साम्राज्य का दुनिया की 20 फीसदी आबादी और कुल जमीनी क्षेत्रफल के एक चौथाई हिस्से पर कब्जा था

इस साम्राज्य की आम आलोचनाओं में इसकी नीतियां भी शामिल हैं. 1942 में बंगाल में फैले अकाल में लाखों लोगों की मौत भूखमरी से हुई जबकि ब्रिटिश शासन लाखो टन अनाज ब्रिटेन भेजता रहा. इसी तरह अलग-अलग हिस्सोंं में क्रूरतापूर्ण नजरबंदी शिविरों की स्थापना और शाही सैनिकों द्वारा आम नागरिकों के नरसंहार भी इस दौरान खूब हुए.

ब्रिटिश साम्राज्य का गुलामों के व्यापार में भी तब तक दबदबा रहा, जब तक 1807 में इसे गैरकानूनी घोषित कर दिया गया. इसके बाद ब्रिटिश साम्राज्य ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस प्रथा को समाप्त करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

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समर्थकों की मानें तो यह इस साम्राज्य दुनिया के कुछ हिस्सों के लिए आर्थिक विकास लाया और इसने अपने नियंत्रण वाले देशों को लाभान्वित किया. 

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने पहले कहा भी था कि इस साम्राज्य का जश्न मनाया जाना चाहिए. 

सर्वेक्षण करने वाली ब्रिटिश संस्था वाईओयूजीओवी ने पाया कि 44 फीसदी लोग ब्रिटेन के उपनिवेशवाद के इतिहास पर गर्व करते हैं. जबकि केवल लोगों ने इस पर अपना दुख जताया. वहीं, 23 फीसदी लोगों ने इसे न तो अच्छा बताया और न ही बुरा.

बुरी घटनाओं से हमें सीखना चाहिए और अच्छी घटनाओं का जश्न मनाना चाहिए

इसी सर्वेक्षण में शामिल लोगों से यह भी पूछा गया कि ब्रिटिश साम्राज्य एक अच्छी बात थी या बुरी. इसके जवाब में 43 फीसदी लोगों ने इसे अच्छा बताया जबकि केवल 19 फीसदी ने इसे बुरा बताया. वहीं, 25 फीसदी न तो इसके पक्ष में थे और न ही विपक्ष में. 

2006 में टोनी ब्लेयर ने गुलामों के व्यापार में साम्राज्य की शुरुआती भूमिका को "मानवता के खिलाफ अपराध" बताते हुए इसके लिए माफी मांगी थी.

हालांकि कैमरन ने इस पर अलग सुर अपनाया और 1919 में अमृतसर नरसंहार में शाही सेना द्वारा मारे गए लगभग 400 निर्दोष भारतीयों के लिए माफी मांगने से इनकार कर दिया. 

इतना ही नहीं उन्होंने ब्रिटिश मुकुट में लगे कोहिनूर हीरे को भारत को वापस करने से भी मना कर दिया था.

2013 में भारत के दौरे पर आए कैमरून ने कहा था, "मुझे लगता है कि ब्रिटिश साम्राज्य ने जो भी किया और जिसके लिए जिम्मेदार था, उनपर गर्व करने के लिए बहुत कुछ है." 

"लेकिन निश्चित रूप से इनमें तमाम बुरी घटनाओं के साथ ही अच्छी घटनाए भी शामिल रही हैं. बुरी घटनाओं से हमें सीखना चाहिए और अच्छी घटनाओं का जश्न मनाना चाहिए.'

First published: 23 January 2016, 17:57 IST
 
अमित कुमार बाजपेयी @amit_bajpai2000

पत्रकारिता में एक दशक से ज्यादा का अनुभव. ऑनलाइन और ऑफलाइन कारोबार, गैज़ेट वर्ल्ड, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एजुकेशन पर पैनी नज़र रखते हैं. ग्रेटर नोएडा में हुई फार्मूला वन रेसिंग को लगातार दो साल कवर किया. एक्सपो मार्ट की शुरुआत से लेकर वहां होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों-संगोष्ठियों की रिपोर्टिंग.

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