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कभी अमेरिका जाने के नहीं थे पैसे, आज कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी को सबसे बड़ा दान

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 June 2016, 14:44 IST
(एजेंसी)

भारतीय मूल के अमेरिकी भौतिकविद मणि भौमिक ने कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी को 1.1 करोड़ डॉलर की राशि दान में दी है.

भौमिक द्वारा दी गई यह राशि कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के इतिहास में दान दी गई अब तक की सबसे बड़ी रकम है.

यूनिवर्सिटी के चांसलर जीन ब्लॉक ने इस मामले में कहा, "मैं मणि भौमिक के कल्याणकारी नेतृत्व के लिए और यूनिवर्सिटी में यकीन दिखाने के लिए उनका बेहद शुक्रिया अदा करता हूं."

वहीं यूनिवर्सिटी ने अपने बयान में कहा है, "मणि लाल भौमिक इंस्टीट्यूट फॉर थियोरेटिकल फिजिक्स को सैद्धांतिक भौतिकी के अनुसंधान और बौद्धिक जांच के लिए हम विश्व का प्रमुख केंद्र बनएंगे.

भौमिक ने लेजर तकनीक विकास में काफी महत्वपूर्ण योगदान दिया है. जिसकी वजह से आज चिकित्सा विज्ञान ‘लेजिक आई सर्जरी’ कर पा रहा है.

यूनिवर्सिटी को इतनी बड़ी दान राशि जेने वाले भौमिक ने पश्चिम बंगाल में बेहद गरीबी में जीवन गुजारा था. उन्होंने अपने जीवन में कई कठिनाइयों का सामना किया और आज भौतिकी के प्रसिद्ध वैज्ञानिक हैं.

पश्चिम बंगाल के एक पिछड़े गांव में पैदा हुए भौमिक का बचपन बेहद कठिन हालात में गुजरा. वह फूस की छप्पर और मिट्टी से बनी झोंपड़ी में चटाई पर सोते थे. वहां वह अपने माता-पिता और छह भाई-बहनों के साथ रहा करते थे."

गांव वालों ने जुटाया था फ्लाइट का खर्च

यूसीएलए के बयान में उन्होंने कहा, "16 साल की उम्र तक मेरे पास एक जोड़ी भी जूते नहीं थे. मैं रोजाना चार मील पैदल चलकर स्कूल जाता था और नंगे पैर ही वापस आता था."

भौमिक प्रख्यात भौतिकविद सत्येंद्र बोस के शिष्य रहे, उन्होंने बोस के दिशा-निर्देशन में कलकत्ता यूनिवर्सिटी से मास्टर डिग्री ली. 1958 में भौमिक आईआईटी खड़गपुर से फिजिक्स में डॉक्टरेट करने वाले पहले छात्र थे."

भौमिक 1959 में अमेरिका चले गए. वहां वह कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से जुड़ गए. उनके हवाले से बयान में कहा गया कि उस समय उनकी जेब में सिर्फ तीन डॉलर थे.

वह स्लोन फाउंडेशन की पोस्ट डॉक्टरल फैलोशिप मिलने के कारण जुड़े थे. बकौल भौमिक उनके लिए हवाई जहाज का किराया तक उनके गांव के लोगों ने मिलकर जुटाया था. 

2011 में मिला पद्मश्री पुरस्कार

1961 में जेरॉक्स इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम्स से बतौर लेजर साइंटिस्ट जुड़ने वाले भौमिक ने 1973 में, दुनिया के पहले एक्सिमर लेजर के प्रदर्शन की घोषणा की.

यह सिस्टम पराबैंगनी लेजर का एक स्वरूप है, जिसका उपयोग अब उच्च सटीकता के लिए मशीनों में और जैविक ऊतकों को सफाई से काटने में किया जाता है. भारत सरकार ने भौतिकी में उनके योगदान को देखते हुए 2011 में उन्हें पदमश्री से नवाजा था.

First published: 30 June 2016, 14:44 IST
 
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