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पाकिस्तानः गवर्नर के हत्यारे को 'शहीद' दर्जा देने की मांग

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 March 2016, 14:29 IST

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गवर्नर सलमान तासीर के हत्यारे मुमताज कादरी को 'शहीद' का दर्जा दिए जाने के समर्थन में हजारों लोग देश की संसद के सामने धरना दे रहे हैं.

कादरी ने 2011 में तासीर की गोली मार कर हत्या कर दी थी. पूर्व पुलिस कमांडो कादरी गवर्नर की सुरक्षा में तैनात थे. कादरी को 29 फ़रवरी 2016 को इसके लिए फांसी दी गयी.

राजधानी इस्लामाबाद में हजारों प्रदर्शनकारी संसद भवन के बाहर इकट्ठा हैं. शनिवार को कादरी के समर्थन में रैली के बाद कई जगह झड़प हुई थी. इस दौरान भड़की भीड़ ने पथराव के बाद आगजनी भी की. प्रदर्शनकारियों पर काबू पाने के लिए पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा.

कादरी को फांसी दिए जाने के बाद इस्लामी कट्टरपंथियों ने पूरे पाकिस्तान में प्रदर्शन करते हुए इसे काला दिवस करार दिया था. कादरी को रावलपिंडी की अड़ियाला जेल में फांसी दी गई थी.

क्या है पाकिस्तान का ईशनिंदा कानून?


पाकिस्तान में ईशनिंदा एक संवेदनशील मामला है. ये विवादास्पद कानून पाकिस्तान के सैन्य शासक जिया उल हक ने 1980 के दशक में पेश किया था.

अब तक सैकड़ों लोगों पर इसके तहत आरोप लगे हैं. कई बार इस कानून के तहत मौत की सजा भी सुनाई जाती है. 

कई बार अल्पसंख्यकों की आवाज दबाने के आरोप भी इस विवादास्पद कानून पर लगे हैं.

तासीर ने ईशनिंदा को कहा था काला कानून


दरअसल सलमान तासीर एक ईसाई महिला के समर्थन में आगे आए थे, जिस पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया था. तासीर ने ईशनिंदा को काला कानून बताया था. इसी वजह से उन्हें कट्टरपंथियों की आलोचना का सामना करना पड़ा था.

कादरी ने जनवरी 2011 में इस्लामाबाद के बाजार में 66 साल के तासीर को दिन-दिहाड़े 28 गोलियां मारी थीं. उसने बाद में अपराध स्वीकार करते हुए कहा था कि उसे ईशनिंदा कानूनों में बदलाव करने की तासीर की अपील पर एतराज था.

पाकिस्तान की आतंकवाद-निरोधक अदालत ने मुमताज कादरी को दोषी ठहराया था. इस्लामाबाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी सजा-ए-मौत के फैसले को बरकरार रखा था.

First published: 28 March 2016, 14:29 IST
 
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