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म्यांमार के दो सैनिकों ने बताई रोहिंग्याओं के नरसंहार की कहानी, सुनकर कांप जाएगी आपकी रूंह

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 September 2020, 16:00 IST

म्यांमार के दो सैनिकों ने साल 2017 में म्यांमार के रखाइन प्रांत में रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ हुए नरसंहार की खौफनाक कहानी सुनाई है. बताया जा रहा है कि इन सैनिकों के कबूलनामे का एक वीडियो बनाया गया है और इसका उपयोग अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अदालत मानवता के खिलाफ अपराधों के सबूत के रूप में किया जा सकता है.

न्यूयॉर्क टाइम्स और मानवाधिकार संगठन फोर्टिफाई राइट्स द्वारा देखे गए इस वीडियो में सैनिक म्यो विन और ज़ॉ निंग ने बताया है कि उन्हें आदेश मिला था कि 'तुम्हें जो भी दिखाई दे, जहां से भी आवाज़ सुनाई दे, उसे गोली मार दो', इतना ही नहीं उन्होंने दर्जनों गांवो को नष्ट किया.

दा गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, वीडियो में म्यो विन ने कहा,"हमने हर किसी पर अंधाधुंध गोलियां चलाईं. हमने मुस्लिम लोगों के माथे में गोली मार दी और शवों को गड्डे में डाल दिया." म्यो विन ने कबूल किया कि उसने एक महिला का बलात्कार किया और एक सामूहिक कब्र में आठ महिलाओं, सात बच्चों और 15 पुरुषों को दफनाया.


वहीं दूसरे सैनिक ज़ॉ निंग ने बताया कि किस तरह उन्हें अपने कमांडिंग ऑफिसर ने रोहिंग्या लोगों को "भगाने" का आदेश दिया था. उन्होंने बताया कि जब सीनियर अधिकारी महिलाओं का बलात्कार कर रहे थे, उस दौरान वो उन्होंने आप पास निगरानी रखी.

बता दें, यह पहली बार है जब म्यांमार के सैन्य कर्मियों ने अगस्त 2017 में अल्पसंख्यक जातीय समूह के खिलाफ हिंसा का अभियान चलाने की बात कबूल की है. संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों ने कई बार आरोप लगाते हुए कहा कि म्यांमार के सैनिकों ने यह नरसंहार किया है. इससे पहले बांग्लादेश की सीमा पर म्यांमार से भागकर आए रोहिंग्या मुसलमानों ने बताया था कि उनके परिवारों पर हमला किया गया था और घरों में हमले हुए थे.

बताया जा रहा है कि जिन दो लोगों का यह वीडियो है, वो कथित तौर पर म्यांमार सेना को छोड़कर बांग्लादेश चले गए थे, जहां उन्हें अराकान सेना (जो रखाइन प्रांत में म्यांमार सरकार और सैनिकों के खिलाफ लड़ने वाला एक विद्रोही समूह था) ने उन्हें पकड़ लिया. कहा जा रहा है कि इस हफ्ते सैनिकों को नीदरलैंड में हेग ले जाया गया.

कहा जा रहा है कि इन दोनों सैनिकों से वहां आईसीसी के अधिकारियों द्वारा पूछताछ की जाएगी, जो इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या म्यांमार ने सामूहिक उत्पीड़न और रोहिंग्या मुसलमानों के जबरन निर्वासन द्वारा मानवता के खिलाफ अपराध किए हैं. उनकी गवाही को सबूत के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है या उन्हें गवाह के रूप में बुलाया जा सकता है.

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First published: 9 September 2020, 15:57 IST
 
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