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तीन बार पीएम बनकर भी अधूरी रह गई नवाज़ की हसरत

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 July 2017, 16:03 IST
फाइल फोटो

पनामा गेट में नवाज़ शरीफ़ को करारा झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट से भ्रष्टाचार के मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद एक बार फिर प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ का कार्यकाल समय से पहले ही खत्म हो गया.

यह तीसरी बार है, जब पीएम बनने के बावजूद नवाज़ अपना टर्म पूरा नहीं कर पाए हैं. फिलहाल यह साफ़ नहीं है कि 2018 में होने वाले अगले आम चुनाव तक इस पद पर किसे नियुक्त किया जाएगा. इससे पहले नवाज शरीफ़ को दो बार अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही गद्दी छोड़नी पड़ी थी. 

पहली बार सेना के दबाव में इस्तीफ़ा

नवाज़ शरीफ़ छह नवंबर 1990 से 18 जुलाई 1993 तक पहली बार प्रधानमंत्री रहे थे. राष्ट्रपति इशाक खान और नवाज़ दोनों को ही सेना के दबाव में इस्तीफा देना पड़ा. आम चुनाव हुए तो बेनजीर भुट्टो एक बार फिर सत्ता में लौटीं. अब फारूक अहमद खान लेघारी राष्ट्रपति की कुर्सी पर पहुंचे, जिन्होंने 1996 में बेनजीर की सरकार को बर्खास्त कर दिया.

इसके बाद 17 फरवरी 1997 से 12 अक्टूबर 1999 तक दूसरी बार नवाज प्रधानमंत्री बने, जब उनकी पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग ने चुनाव जीता. लेकिन कार्यकाल पूरा करने की नवाज़ की हसरत इस बार भी अधूरी रह गई. 

दूसरी बार मुशर्रफ का तख्तापलट

जनरल परवेज मुशर्रफ ने तख्तापलट करते हुए कार्यकाल खत्म होने से पहले ही शरीफ को बर्खास्त कर दिया. साल 2000 में शरीफ को सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ ने निर्वासित कर दिया था.

तख्तापलट के बाद पाकिस्तान की एंटी टेररिज़्म कोर्ट ने नवाज़ शरीफ़ को भ्रष्टाचार के अपराध में दोषी करार दिया था. सऊदी अरब की मध्यस्तता से शरीफ़ को जेल से बचाकर सऊदी अरब के जेद्दा नगर में निर्वासित किया गया.

23 अगस्त 2007 को सुप्रीम कोर्ट ने शरीफ़ को पाकिस्तान वापस आने की इजाज़त दी. 10 सितंबर 2007 को शरीफ सात वर्षों के निर्वासन के बाद इस्लामाबाद लौटे, लेकिन उन्हें एयारपोर्ट से ही तुरन्त जेद्दा वापस भेज दिया गया.

2013 में हुए आम चुनाव में शरीफ़ ने जीत हासिल करते हुए तीसरी बार पीएम पद की कुर्सी संभाली. पांच जून 2013 को उनका कार्यकाल शुरू हुआ, लेकिन इस बार भी पनामा पेपर्स ने एक साल पहले ही उनकी कुर्सी की बलि ले ली.

अब पनामा गेट ने छीनी गद्दी

सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि शरीफ संसद और अदालत के प्रति ईमानदार नहीं रहे और वह प्रधानमंत्री पद पर बने रहने के योग्य नहीं हैं. अटॉर्नी जनरल ने कहा कि पीठ ने शरीफ को जीवन भर के लिए अयोग्य करार दिया है.

कार्यान्वयन पीठ के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एजाज अफजल खान ने कहा कि संयुक्त जांच दल (जेआईटी) द्वारा इकट्ठा किए गए सभी सबूतों को छह हफ्ते के भीतर एक जवाबदेही अदालत के पास भेजा जाएगा.

उन्होंने कहा कि मरियम नवाज (नवाज़ शरीफ़ की बेटी), कप्तान मुहम्मद सफदर (मरियम के पति), हसन और हुसैन नवाज़ के साथ-साथ प्रधानमंत्री शरीफ के खिलाफ मामलों पर कार्रवाई होनी चाहिए और 30 दिनों के भीतर कोई फैसला सुनाया जाएगा.

न्यायमूर्ति आसिफ सईद खोसा, न्यायमूर्ति गुलजार अहमद, न्यायमूर्ति शेख अजमत सईद, न्यायमूर्ति इजाजुल अहसान और न्यायमूर्ति एजाज अफजल खान की पांच जजों की बेंच ने इस्लामाबाद स्थित सुप्रीम कोर्ट की अदालत संख्या-1 में फैसला सुनाया. अदालत ने राष्ट्रपति ममनून हुसैन से अपील की है कि वह देश के मामलों का प्रभार अपने हाथों में ले लें.

बेंच ने वित्तमंत्री इशाक डार और नेशनल एसेम्बली के सदस्य कप्तान सफदर को भी पद के अयोग्य घोषित कर दिया.

First published: 28 July 2017, 16:03 IST
 
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