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नेपाल: भूकंप के एक साल, खतरों से जूझते 16 लाख बच्चे

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 April 2016, 17:01 IST

नेपाल में पिछले साल 25 अप्रैल को भूकंप से आई तबाही के एक साल बीत चुके हैं. हालात अब भी बहुत बदले नहीं हैं. प्रभावित इलाकों के तकरीबन 16 लाख बच्चे जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं.

25 अप्रैल 2015 को नेपाल में 7.9 तीव्रता का भीषण भूकंप आया था. इसमें हजारों लोगों की जान चली गई थी.

स्कूल के बजाए अस्थाई भवनों में अब भी बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं. बच्चों के लिए काम करने वाले संयुक्त राष्ट्र के संगठन यूनिसेफ के मुताबिक शैक्षणिक माहौल को सामान्य बनाए जाने की दिशा में अभी बहुत सारा काम किया जाना बाकी है.

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35 हजार स्कूलों को नुकसान


भूकंप की पहली बरसी पर यूनिसेफ ने कहा, "जितनी जल्दी हो सके बच्चों के लिए सुरक्षित और स्थाई क्लासरूम की व्यवस्था सुनिश्चित करने की जरूरत है, जिसके लिए प्रयासों में तेजी लानी होगी."

पिछले साल आए भूकंप में 35 हजार से ज्यादा स्कूल ध्वस्त हो गए थे. बच्चों की शिक्षा में कम से कम व्यवधान पड़े इसके लिए नेपाल में काफी कोशिशें की गईं.

नेपाल में यूनिसेफ के प्रतिनिधि तोमू होजुमी का कहना है' " उपेक्षा, शोषण और हिंसा के खतरों से बचाने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जा रहा है." 

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पिछले साल 25 अप्रैल को नेपाल में आए भूकंप से देश की अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान हुआ था. अनुमान के मुताबिक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 36 फीसदी के बराबर संपत्ति बर्बाद हो गई.
earthquake

फाइल


वहीं अगर ये अनिश्चितता जारी रही, तो बच्चों की शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षा और समुचित विकास पर भी प्रभाव पड़ने की संभावना है.

राहत कैंपों में 26 हजार लोग


भूकंप के बाद एक लाख 88 हजार 900 लोग अस्थाई रूप से विस्थापित हो गए थे. इनमें से 26 हजार 272 लोग अब भी राहत कैंपों में जिंदगी गुजार रहे हैं.

वहीं कैंप में रहने वाले बच्चे भी मानव व्यापार जैसे कई गंभीर खतरों को लेकर पूरी तरह असुरक्षित हैं. प्रभावित जिलों में राहत और पुनर्निर्माण का काफी काम पूरा हो चुका है.

जिसकी वजह से पढ़ाई में रुकावट, बीमारियों और कुपोषण को टालने में मदद मिली है. यूनिसेफ प्रतिनिधि का कहना है कि पूरी तरह से हालात ठीक होने में अभी नेपाल को लंबी और कठिन राह तय करनी है.

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यूनिसेफ ने नेपाल सरकार ओर स्वयंसेवी संगठनों के साथ 39,337 अनाथ और असुरक्षित बच्चों की पहचान की है.

इनमें से 13,317 बच्चों को जरूरत के मुताबिक आपातकालीन सहायता मुहैया कराई गई.


First published: 25 April 2016, 17:01 IST
 
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