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नेपाल में प्रचंड फिर बनेंगे प्रधानमंत्री !

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 May 2016, 13:36 IST

नेपाल में खड़ग प्रसाद शर्मा ओली की अगुवाई वाली सरकार मुश्किल में घिर गई है. बदले सियासी माहौल में केपी ओली की सरकार का जाना तय लग रहा है.

नेपाल में एक नया गठबंधन पूर्ण बहुमत के दावे के साथ आया है. वहीं ओली, जिस गठबंधन की बदौलत प्रधानमंत्री बने हुए थे, उसमें अचानक उलटफेर के संकेत मिल रहे हैं. 

यूसीपीएन (एम) की अगुवाई में गठजोड़

जो नया गठबंधन पूर्ण बहुमत का दावा कर रहा है, उसमें पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड की यूनिफाइड कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओवादी) दूसरा सबसे बड़ा घटक दल है.

प्रचंड संक्षिप्त अवधि के लिए 18 अगस्त 2008 से 25 मई 2009 के बीच नेपाल के प्रधानमंत्री थे. मुख्य विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस भी ओली सरकार के कामकाज के तरीके से खुश नहीं है. 

नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा का कहना है कि सरकार मुख्य विपक्षी दल को नजरअंदाज करते हुए अहम पदों पर राजनीतिक नियुक्तियां कर रही है. वहीं मधेसी पार्टियां भी ओली सरकार से नाराज चल रही हैं.

प्रचंड के साथ नेपाली कांग्रेस


बुधवार को प्रचंड ने प्रधानमंत्री ओली से मुलाकात की. बताया जा रहा है कि इस दौरान प्रचंड ने ओली को अपने नेतृत्व वाली सरकार में शामिल होने को कहा. प्रचंड ने कहा है कि नेपाली कांग्रेस उन्हें समर्थन करेगी.

नेपाली कांग्रेस मुख्य विपक्षी पार्टी है और नेपाल की संसद में सबसे बड़ा दल है. वहीं प्रचंड की यूसीपीएन (एम) और ओली की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल-यूनिफाइड मार्कसिस्ट लेननिस्ट (सीपीएन-यूएमएल) के बीच मतभेद गहरा गए हैं. 

प्रचंड-ओली के मतभेद गहराए


गतिरोध का असर संसद में भी दिख रहा है. संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण का इंतजार किया जा रहा है. जिससे सरकार के कार्यक्रम और बजट को अगले तीन दिन में पेश किया जा सके.

नए राजनैतिक गतिरोध के बीच ओली ने संवैधानिक विशेषज्ञों से भी संपर्क साधा है. उन्होंने इस मसले पर राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी से भी मुलाकात की. हालांकि संविधान में संसद को भंग करके नए चुनाव का प्रावधान नहीं है. 

अगले साल मई तक ही ऐसा मुमकिन है. ओली ने प्रचंड से मुलाकात करके मतभेद सुलझाने की कोशिश की, लेकिन वो कामयाब नहीं हो सके थे. 

मधेसी फ्रंट का भी समर्थन


प्रचंड को यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट मधेसी फ्रंट (यूडीएमएफ) का भी समर्थन मिल रहा है. मधेसी फ्रंट ने नए संविधान को लेकर ओली सरकार के खिलाफ पांच महीने तक आंदोलन चलाया था.

20 सितंबर 2015 को नेपाल में नए संविधान को स्वीकार करने के विरोध में मधेसियों ने ओली सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू किया था.

वहीं अंदरखाने में नेपाली कांग्रेस के प्रमुख शेर बहादुर देउबा और प्रचंड के बीच कई बैठकें हो चुकी हैं. जिसमें दोनों नेताओं के बीच सहमति बनी कि देश को सही रास्ते पर ले जाने के लिए ओली सरकार का हटना जरूरी है.

प्रचंड का कहना है कि अगर सीपीएन-यूएमएल दलगत हितों से ऊपर उठकर देशहित के बारे में सोचती है, तो उसे एक नई राष्ट्रीय सरकार का समर्थन करना चाहिए.

वहीं बताया जा रहा है कि ओली ने सत्ता छोड़ने से इनकार कर दिया है. हालांकि उनकी पार्टी के भीतर भी एक गुट है जो दबाव बना रहा है कि हाउस को भंग करके चुनाव कराया जाए. 

First published: 5 May 2016, 13:36 IST
 
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