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अंतरराष्ट्रीय एनजीओ का हस्तक्षेप नेपाल के लिए खतरे की घंटी?

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 February 2016, 8:11 IST
QUICK PILL
  • कई अंतरराष्ट्रीय एनजीओ ने नेपाल के विकास की दिशा में योगदान दिया है, लेकिन उनमें से कुछ के खिलाफ गंभीर आरोप हैं.
  • नेपाल के तमाम अंतरराष्ट्रीय एनजीओ के खिलाफ किस तरह के आरोप हैं? इस मामले में नेपाल सरकार क्या कर सकती है?

लोकतंत्र को बढ़ावा देने की बात हो, मानवाधिकारों की रक्षा या फिर लोगों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार की बात, अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) के कई देशों में अहम योगदान को दरकिनार नहीं किया जा सकता है. हालांकि कई जगहों पर यह संगठन विवादों में भी घिरे नजर आए. 

यहां मामला नेपाल का है. जैसे ही इस हिमालयी देश ने राजतंत्र से लोकतंत्र को अपनाया, अंतरराष्ट्रीय समेत तमाम एनजीओ ने देश में काम शुरू कर दिया. इसके बाद सेवा-वितरण प्रणाली और पारदर्शिता की कमी के चलते कुछ एनजीओ संदेह के घेरे में खड़े कर दिए गए.

दुनिया भर की स्थिति

दुनिया में नेपाल ही एक ऐसा देश नहीं है जहां अंतरराष्ट्रीय एनजीओ जांच के दायरे में आ गए हैं:

  • रूस ने भी विदेशों से धन लेने वाले कई ऐसे संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया था. कई पर विदेशी एजेंटों का लेबल था और उन पर प्रतिबंध लगाने के लिए सरकारी अधिकारियों के हाथों में कठोर शक्तियां दे दी गईं. इसके अलावा वहां ऐसे संगठनों के बैंक खातों को फ्रीज करने, उनके कर्मचारियों को निष्कासित करने और यहां तक कि छह साल के कारावास के भी प्रावधान हैं.
  • एक ब्रिटिश संसदीय समिति ने विशेष रूप से भ्रष्ट समाज में अनुचित व्यवहार के लिए कुछ अंतरराष्ट्रीय एनजीओ की आलोचना भी की.
  • पाकिस्तान ने पिछले साल समाज विरोधी गतिविधियों के आरोपों पर 'सेव द चिल्ड्रेन' को बंद कर दिया.
  • वर्ष 2014 में भारतीय खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक ग्रीनपीस इंडिया और कई अन्य संगठन आर्थिक सुरक्षा के लिए खतरा थे. भारत सरकार ने पिछले साल 10,117 गैर सरकारी संगठनों का पंजीकरण रद्द कर दिया. फोर्ड फाउंडेशन समेत कुछ को कानूनी मानदंडों का उल्लंघन करने के लिए निगरानी सूची में डाल दिया गया था.

नेपाल पर ध्यान देने की जरूरत

अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संगठनों ने इन तमाम वजहों से विकासशील देशों के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है. 

  • नौकरियां पैदा करके
  • महिला सशक्तीकरण
  • पर्यावरण की रक्षा
  • एड्स और नशीली दवाओं के दुरुपयोग पर नियंत्रण 
  • बच्चों, युवाओं और जो विशेष रूप से विकलांगों की मदद 
  • शिक्षा और स्वास्थ्य की प्रगति कर

लेकिन इतने सारे अंतरराष्ट्रीय एनजीओ की मौजूदगी के बावजूद नेपाल करीब 46,900 रुपये प्रतिव्यक्ति आय के साथ दुनिया के सबसे गरीब देशों में से एक बना हुआ है.

एनजीओ प्रसार, समन्वय, निगरानी और मूल्यांकन के लिए नेपाल की सर्वोच्च संस्था सामाजिक कल्याण परिषद (एसडब्ल्यूसी) में पंजीकृत एनजीओ की संख्या 1990 में 253 की तुलना में जबर्दस्त रूप से बढ़कर 4,000 तक पहुंच गई. इनमें से तकरीबन 190 अंतरराष्ट्रीय एनजीओ हैं. 25 अप्रैल 2015 को आए भूकंप के बाद कई एनजीओ नेपाल में पहुंचे.

हालिया मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कमजोर निगरानी तंत्र के साथ पर्याप्त नियमों, निर्देशों की कमी के कारण अंतरराष्ट्रीय एनजीओ जनादेश का दुरुपयोग करते हैं. विश्व बैंक के निवेश की अपेक्षा वाली अरुण III समेत कई विकास परियोजनाओं, 6,000 मेगावाट की नेपाल-भारत संयुक्त उद्यम, पंचेश्वर बहुउद्देशीय परियोजना भी अंतरराष्ट्रीय एनजीओ के विरोध के कारण ठप की जा सकती थीं.

इनमें से कई एनजीओ को इन आरोपों का सामना करना पड़ा कि उन्हें दी जाने वाली फंडिंग और उसके वितरण में पारदर्शिता नहीं है. साथ ही एक विशेष क्षेत्र के लिए निर्धारित धन का उपयोग अन्य गतिविधियों में किया जा रहा है. कुछ पर समुदायों के बीच सद्भाव बिगाड़ने और अन्य देशों के साथ नेपाल के संबंधों को खराब करने का भी आरोप लगाया गया है.

इनमें से कई एनजीओ को इन आरोपों का सामना करना पड़ा कि उन्हें दी जाने वाली फंडिंग और उसके वितरण में पारदर्शिता नहीं है

समय-समय पर सरकार संदिग्ध गतिविधियों को रोकने के लिए गंभीर भी हुई. लेकिन ऐसी खबरें भी हैं कि जब अधिकारियों द्वारा इन पर कार्रवाई करने की कोशिश की जा रही थी तब राजनीतिक हस्तक्षेप किया गया. शायद इसी ने अंतरराष्ट्रीय एनजीओ को नेताओं, वरिष्ठ नौकरशाहों और अन्य प्रभावी लोगों के बीच गहरी जड़ें जमाने में मदद की. 

नेपाल में जिम्मेदार वर्ग को अवैध गतिविधियों में शामिल संगठनों पर नजर रखने की जरूरत है. यदि इनकी नेताओं के साथ गठजोड़ है तो यह उजागर करने की भी जरूरत है.

सभी अंतरराष्ट्रीय एनजीओ गैर जिम्मेदार नहीं हैं. नेपाल की नीति ऐसी होनी चाहिए ताकि जमीनी स्तर पर परिणाम देने वालों को पुरस्कृत किया जाए और जो गलत काम करते हैं उन्हें फटकार लगई जाए. अगर अब भी समस्या को सुलझाया नहीं गया तो भविष्य में सुरक्षा के गंभीर परिणाम देखने पड़ सकते हैं.

First published: 20 February 2016, 8:11 IST
 
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