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नेपाल ने जारी किया नया नक्शा, लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को बताया अपना हिस्सा

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 May 2020, 15:30 IST

भारत के साथ सीमा विवाद के बीच नेपाल के मंत्रिमंडल ने लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को अपना हिस्सा बताते हुए नए राजनीतिक मानचित्र को मंजूरी दे दी है. इससे पहले नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ग्यावली ने कहा था कि राजनयिक पहल के माध्यम से भारत के साथ सीमा विवाद मुद्दे को हल करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं. नेपाल के सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के सांसदों ने भी संसद में एक विशेष प्रस्ताव भी पेश किया है जिसमें कालापानी, लिंपियाधुरा और लिपुलेख में नेपाल के क्षेत्र की वापसी की मांग की गई है.

नेपाल और भारत के बीच विवादित सीमावर्ती क्षेत्र कालापानी के पास स्थित लिपुलेख दर्रा है. भारत और नेपाल दोनों कालापानी को अपना अभिन्न हिस्सा मानते हैं. भारत इसे उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के हिस्से के रूप में देखता है और नेपाल इसे धारचूला जिले के हिस्से के रूप में देखता है. ग्यावली ने कहा कि नेपाल का आधिकारिक नक्शा जल्द ही मिनिस्ट्री ऑफ लैंड मैनेजमेंट द्वारा सार्वजनिक किया जाएगा. 

नेपाल का कहना है कि वह इस नक्शे को सभी सरकारी दस्तावेजों पर इस्तेमाल करेगा. देश के प्रतीक चिन्हों पर भी अब से यही नक्शा रहेगा. किताबों में यही नक्शा पढ़ाया जाएगा और आम लोग भी इसी का इस्तेमाल करेंगे. ग्यावली ने पिछले हफ्ते भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा को तलब किया और उत्तराखंड के धारचूला से लिपुलेख पास को जोड़ने वाली भारत की सड़क के निर्माण के विरोध में एक राजनयिक नोट उन्हें सौंपा था.


भारत ने उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में हाल ही में लिपुलेख-धाराचूला मार्ग का उद्घाटन किया था और इसे पूरी तरह से अपने क्षेत्र में बताया था. नेपाल ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि महाकाली नदी के पूर्व का पूरा इलाका नेपाल की सीमा में आता है. भारत ने नवम्बर 2019 में अपना नक्शा जारी किया था, जिसमें कालापानी, लिंपियधुरा और लिपुलेख भारतीय हिस्सा बताया.

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First published: 19 May 2020, 15:11 IST
 
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