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पाक सेना प्रमुख बाजवा ने किया अहम बदलाव, आईएसआई चीफ़ भी बदला

तिलक देवाशर | Updated on: 14 December 2016, 7:40 IST
(एसएस मिर्ज़ा/एएफ़पी फ़ोटो)

जैसी कि संभावना थी, 29 नवंबर को पाकिस्तान का सेना प्रमुख बनते के बाद जनरल कमर जावेद बाजवा सेना में महत्वपूर्ण पदों पर अपने खास लोगों को तैनात करेंगे. बेशक उनके काम में मदद देरी से इस्तीफा देने वाले लेफ्टिनेंट जनरलों से मिली, जिन्हें अपनी ही तरक्की से चीफ का पद मिला.  

इनमें दो टॉप स्लॉट के लिए प्रतिस्पर्धी थे, लेफ्टिनेंट जनरल इशफाक नदीम, कार्प्स कमांडर सेकंड कॉर्प्स, मुल्तान और लेफ्टिनेंट जनरल इकबाल रामदे, कॉर्प्स कमांडर 31 कॉर्प्स, बहावलपुर. अन्य दो, टॉप स्लॉट के लिए प्रतिस्पर्धी नहीं थे, हालांकि जनरल बाजवा से वरिष्ठ थे. 

नियुक्तियों का विश्लेषण

हालांकि इन नियुक्तियों के बारे में कुछ कहना बहुत जल्दी होगा, पर इनसे कुछ प्रवृतियां जरूर उभरती हैं.

पहली, डीजी आईएसआई लेफ्टिनेंट जनरल रिजवान अख्तर की जगह लेफ्टिनेंट जनरल नवीद मुख्तार, और लेफ्टिनेंट जनरल बिलाल अकबर को सीजीएस के तौर पर नियुक्त करने से एजेंसी का संचालन प्रभावित होगा. दोनों अधिकारी सिंध अपेक्स कमेटी के हिस्सा थे और उन्होंने कराची में एमक्यूएम की सत्ता के आधार को मिलकर ढहाया था. 

ये दोनों नियुक्तियां जनरल बाजवा की आंतरिक सुरक्षा को प्राथमिकता देने की नीति का संकेत हो सकती हैं. अगर ऐसा है, तो पंजाब में एक ऑपरेशन, जिसका सरकार विरोध करती रही है, शायद संभव हो जाए. आईएसआई प्रमुख के तौर पर नवीद मुख्तार की नियुक्ति जनरल बाजवा की आंतरिक सुरक्षा को प्राथमिकता देने की नीति का संकेत हो सकती है.

दूसरी, डीजी आईएसपीआर के हाई प्रोफाइल पद से लेफ्टिनेंट जनरल असीम सलीम बाजवा को हटाना और उस पद को रिक्त रहने देना, यहां तक कि अस्थाई रखना, इसका अच्छा-भला संकेत हो सकता है कि वे सेना प्रमुख को मीडिया से दूर रखना बेहतर मानते हैं. यह बाजवा के नेतृत्व का आईएसपीआर ही था, जिसने जनरल रहील शरीफ की अतिश्योक्तिपूर्ण छवि बनाई और उन्हें नवाज शरीफ से ज्यादा लोकप्रिय बना दिया. 

वैसे जनरल बाजवा की सही परीक्षा असैन्य सरकार के साथ उनके संबंधों से होगी. जैसा कि नवाज शरीफ के साथ उनकी शुरुआती मुलाकात से सामने आया कि वे प्रधानमंत्री से प्रेरित होकर सेना के लिए नए कानून बना रहे हैं. इस माहौल को पुख्ता करने में जनरल बाजवा की मीडिया में लीक हुई तस्वीरें सहायक रहीं. 

एक तस्वीर में वे मेज पर नवाज शरीफ के सामने बैठे हैं, जबकि अन्य में जनरल रहील शरीफ नवाज खरीफ के बराबर कुर्सी पर बैठे हैं. एक तस्वीर नवाज शरीफ को सलामी देते हुए है. हाल में जनरल बाजवा को पीएम निवास में जाने से पहले मेटल डिटेक्टर से गुजरना पड़ा. ऐसा पहले कभी नहीं सुना.

अब देखना है कि किस तरह जनरल बाजवा, और इससे ज्यादा अहम कि पाक सेना, एक व्यवस्था के तौर पर असैन्य नियंत्रण के अचानक परिवर्तन पर क्या प्रतिक्रिया करेगी.

खाली पदों की भर्ती

जनरल बजवा ने रिक्त पदों को चार चरणों में भरा है. 7 दिसंबर को उन्होंने लेफ्टिनेंट शाहिद बेग़ मिर्ज़ा को लेफ्टिनेंट जनरल नवीद मुख्तार की जगह चुना. मिर्जा को कराची में नए कॉर्प्स कमांडर फिफ्थ कॉर्प्स के तौर पर जीएचक्यू में सैन्य सचिव बनाया गया. लेफ्टिनेंट जनरल मिर्जा को सैन्य सचिव के तौर पर जीएचक्यू में सीएलएस के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल गयूर महमूद की जगह बदला गया. फिर सात मेजर जनरलों को 9 दिसंबर को लेफ्टिनेंट जनरल के दर्जे पर तरक्की दी गई. 24 मेजर जनरलों को पीछे छोड़ते हुए. 

9 दिसंबर को लेफ्टिनेंट जनरल सरफराज सत्तार (जीओसी 8वीं डिविजन स्यालकोट) को मुल्तान का कमांडर सेकंड कॉर्प्स (लेफ्टिनेंट जनरल अशफाक की जगह, जिन्होंने अपने कागज रख दिए थे) और लेफ्टिनेंट जनरल ज़फ़र इकबाल को (कॉर्प्स कमांड टेंथ कॉर्प्स रावलपिंडी) बतौर डीजी जॉइट स्टाफ नियुक्त किया (लेफ्टिनेंट जनरल की सेवानिवृति के कारण उनकी जगह लेने के लिए.) लेफ्टिनेंट सत्तार भारत में डीजीएमआई और रक्षा सहयोगी के रूप में सेवाएं दे चुके हैं.

चौथा चरण था 10 लेफ्टिनेंट जनरलों का 11 दिसंबर को नियुक्त करना और स्थानांतरण करना. इनमें प्रमुख नियुक्तियां थीं-

1. लेफ्टिनेंट नवीद मुख्तार, कॉर्प्स कमांडर फिफ्थ कॉर्प्स की डीजी आईएसआई के तौर पर लेफ्टिनेंट जनरल रिजवान अख्तर की जगह नियुक्ति, जिन्हें एनडीयू के अध्यक्ष के तौर पर शिफ्ट कर दिया गया. 

सैद्धांतिक रूप से डीजी आईएसआई को पीएम को रिपोर्ट करना होता है और वे नामों की सूची में से उसे चुनते हैं. इस संदर्भ में जनरल बाजवा को पीएम के साथ पहली मुलाकात में ही स्वीकृति मिल गई होगी. कहा जाता है कि बख्तरबंद कोर अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल मुख्तार को इंटेलिजेंस के क्षेत्र में काफी अनुभव है और पहले आईएसआई के आतंकवाद विरोधी खंड के प्रमुख रहे हैं.

2. लेफ्टिनेंट जनरल बिलाल अकबर (9 दिसंबर को तरक्की दी गई) डीजी रेंजर्स को जनरल स्टाफ का प्रमुख नियुक्त किया गया. तोपखाना अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल अकबर ने लाहौर में एक डिविजन और स्वात में एक ब्रिगेड को कमांड किया था. बतौर सिंध के डीजी रेंजर उन्होंने कराची में ऑपरेशन का नेतृत्व किया.

3. लेफिटनेंट जनरल असीम सलीम बाजवा, हाई प्रोफाइल डीजी आईएसपीआर को जीएचक्यू में महानिरीक्षक के तौर पर नियुक्त किया गया. वे तत्कालीन सीओएएस जनरल अशफाक कयानी के अधीन 2012 से डीजी आईएसपीआर रहे हैं और जनरल रहील शरीफ के अधीन भी इस पद पर बने रहे. फिलहाल पद को रिक्त छोड़ा गया है. 

4. लेफ्टिनेंट जनरल हिदायतुर रहमान (कॉर्प्स कमांडर इलेवंथ कॉर्प्स, पेशावर) को जीएचक्यू में प्रशिक्षण और मूल्यांकन का इंसपेक्टर जनरल नियुक्त किया गया. सेना प्रमुख बनने से पहले जनरल रहील शरीफ और जनरल बाजवा दोनों इस पद पर थे. पदस्थ एनडीयू अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल नजीर बट को कमांडर इलेवंथ कॉर्प्स, पेशावर नियुक्त किया गया.

5. लेफ्टिनेंट जनरल नदीम रजा (कमांडेंट, पाकिस्तान मिलिटरी एकेडमी काकुल) को कमांडर टेंथ कॉर्प्स नियुक्त किया गया. सिंध रेजिमेंट के अधिकारी रजा ने दक्षिण वजीरीस्तान के एक डिविजन और एलओसी पर एक ब्रिगेड का कमांड किया है. 

6. लेफ्टिनेंट जनरल शेर अफगुन (इंस्पेक्टर जनरल, फ्रंटियर कॉप्र्स, बलोचिस्तान) को कॉर्प्स कमांडर इक्तीसवां कॉर्प्स, भावलपुर नियुक्त किया गया. इन्हें लेफ्टिनेंट जनरल जावेद इकबाल रामदे की जगह नियुक्त किया गया, जिन्होंने अपने कागजात रख दिए थे. आजाद कश्मीर रेजिमेंट से लेफ्टिनेंट जनरल अफगुन ने एलओसी पर एक डिविजन कमांड किया है, जब जनरल बाजवा टेंथ कॉर्प्स के कमांडर थे. 

इन परिवर्तनों को पूरा करने के लिए एक और नियुक्ति डीजी आईएसपीआर और डीजी रेंजर्स, सिंध की करनी है. इस तरह जनरल बाजवा ने सीजीएस, सैन्य सचिव और डीजी आईएसआई के प्रमुख पदों पर अपने सिपहसालारों को लाने में बिलकुल देरी नहीं की. कॉर्प कमांडरों में सेकंड, फिफ्थ. टेंथ. इलेवंथ, इक्तीसवां कमांडर उनके नियुक्त हैं. इस तरह उन्होंने बड़े फायदे के साथ शुरुआत की है. 

First published: 14 December 2016, 7:40 IST
 
तिलक देवाशर @catchhindi

Tilak Devasher retired as Special Secretary, Cabinet Secretariat, to the Government of India. His book Pakistan: Courting the Abyss is releasing shortly.

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