Home » इंटरनेशनल » No Any Major Change In US policy towards Pakistan even under a new President
 

नए राष्ट्रपति के बाद भी अमेरिका की पाक नीति में नहीं होगा बदलाव

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 May 2016, 18:49 IST
QUICK PILL
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंध नई ऊंचाई पर पहुंचे हैं. इसकी वजह मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के बीच के बेहतर संबंध है जिसकी वजह से सुरक्षा, रक्षा और विज्ञान-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग में तेेजी आई है. हालांकि इस बीच कई चुनौतियां भी उभरी हैं. अब ओबामा का दूसरा कार्यकाल खत्म होने को है और अमेरिका नए राष्ट्रपति को चुनने की राह पर है. पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल भारत के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की अहमियत को बता रहे हैं:

आप मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को कैसे देखते हैं? आप ब्रिटेन में जेरेमी कॉर्बिन और अमेरिका में बर्नी सैंडर्स की बढ़ती लोकप्रियता को कैसे देखते हैं? आपको लगता है कि इससे गिरती अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा?

मुझे लगता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव एक तरह से तमाशा है. प्राइमरी के चुनाव में राष्ट्रपति के उम्मीदवारों की राजनीतिक पहुंच की परीक्षा होती है. अगर इस प्रक्रिया से वाकई में अच्छे उम्मीदवार निकल कर आते हैं तो इसका मतलब है. लेकिन अगर इससे बेकार नेता निकल रहे हैं तो कोई भी इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा सकता है.

बर्नी सैंडर्स अमेरिकी समाज में उस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था की असंतुलित नीति का शिकार हुआ है. जो धनी लोगों का प्रतिनिधित्व करती हैं और गरीब लोगों का नुकसान. अमेरिका में बढ़ती आर्थिक असमानता बहुत बड़ा मुद्दा है. वॉल स्ट्रीट के सिस्टम पर पकड़ उस असंतोष को बढ़ा रही है जिसे जर्मी कॉर्बिन और बर्नी सैंडर्स आवाज दे रहे हैं.

नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में तेजी आई है. ओबामा के बाद भी क्या यह जारी रहेगी?

यह सही है कि मोदी के पहले भारत कभी भी अमेरिका के उतना करीब नहीं रहा. उन्होंने निश्चित तौर पर ओबामा के साथ बेहतर संबंध बनाए हैं. ओबामा की तरफ से जून में नरेंद्र मोदी को अमेरिका आने का न्यौता दोनों देशों के बीच मजबूत होते संबंधों की तस्दीक करता है. मोदी जून में अमेरिकी कांग्रेस को भी संबोधित करेंगे.

मोदी के पहले भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंधों में कभी उतनी मजबूती देखने को नहीं मिली

अमेरिका में  भारत और अमेरिका संबंधों की मजबूती को लेकर कोई विवाद नहीं है. पूर्व रिपब्लिकन प्रेसिडेंट जॉर्ज बुश ने भी भारत के साथ परमाणु करार पर हस्ताक्षर किया था. ओबामा के कार्यकाल में दोनों देशों ने संयुक्त रणनीतिक विजन दस्तावेज जारी किया. यह एशिया प्रशांत और हिंद महासागर पर केंद्रित था. लेकिन यह कहना होगा कि ओबामा की नीतियां भारत की तरफ पूरी तरह से सकारात्मक नहीं रही.

ओबामा की अफगान और पाकिस्तान नीति हमारे लिए समस्या पैदा करती हैं. इसके साथ चीन-पाकिस्तान संबंधों पर रणनीतिक स्थिति नहीं लेना भी हमारे लिए ठीक नहीं है. आर्थिक मसलों पर हमारे अमेरिका के साथ गहरे मतभेद हैं. हां बहुत अधिक उत्साह तो नहीं लेकिन ओबामा के बाद भी भारत और अमेरिका के संबंध बेहतर रहेंगे. लेकिन समस्याएं भी बनी रहेंगी क्योंकि वह दोनों देशों के बीच के राष्ट्रीय हित का मामला है.

ओबामा के कार्यकाल के दौरान भारत और अमेरिका के संबंधों में सबसे बड़ी उपलब्धि क्या रही?

मोदी ने यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल के दौरान स्थिर भारत-अमेरिका संबंधों को तेजी दी. उन्होंने कई दौरा कर दोनों देशों के बीच संबंधों को नई ऊर्जा दी. उन्होंने आईटी समेत अमेरिकी कॉरपोरेट को आकर्षित किया. जलवायु परिवर्तन के मामले में वह अमेरिका के साथ काम करने में सफल रहे जबकि ओबामा की तरफ से इस मामले में जबरदस्त दबाव था. 

मोदी ने राजनीतिक रूप से संवेदनशील सिविल न्यूक्लियर लायबिलिटी मसले को सुलझाया और फिर 2015 में ओबामा को गणतंत्र दिवस के मौके पर मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया. आतंक विरोधी कार्रवाई के मामले में भी स्थिति में सुधार हुआ है. रक्षा सहयोग में हुई बढ़ोतरी से भी रणनीतिक संबंध मजबूत हुए हैं.

नजदीक होने के बावजूद अफगान संकट को सुलझाने के मामले में भारत को रणनीतिक और सैन्य कोशिशों से बाहर रखा गया है. क्या आपको निकट भविष्य में भारत की भूमिका में विस्तार होता हुआ दिखता है? अमेरिका में नए राष्ट्रपति के आने के बाद अमेरिका की पाकिस्तान की नीति में कोई बदलाव होगा?

अमेरिका भारत को अफ गान मामले में मुख्य खिलाड़ी के तौर पर नहीं देखता हैै. इसके पीछे का विचार यह है कि भारत को बड़ी भूमिका देने से पाकिस्तान पीछे चला जाएगा और फिर उसे हैंडल करने में परेशानी होगी. अमेरिका तालिबान को बातचीत की मेज पर लाने के लिए चीन के साथ काम कर रहा है. मुझे नहीं लगता कि भविष्य में भी हमारी भूमिका में विस्तार होगा. हां अगर ईरान के जरिये चाबहार रूट खुल जाए तो हमारे पास ज्यादा विकल्प होंगे. 

पाकिस्तान की भूराजनैतिक स्थिति को देखते हुए नए अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यकाल में भी अमेरिका की नीति में बदलाव नहीं होगा

अमेरिका में नए राष्ट्रपति के आने के बावजूद उसकी पाकिस्तान नीति में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा. पाकिस्तान के साथ अमेरिका की जो भी निराशा रही हो वह अमेरिका के लिए भूराजनैतिक रूप से अहम है. इसलिए अमेरिका की पाकिस्तान नीति हमारे लिए समस्या बनी रहेगी. हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि पाकिस्तान अमेरिका के लिए हमारे खिलाफ दबाव बनाने का कारक भी है.

अगर डॉनल्ड ट्रंप एच1बी वीजा नीति को बदलते हैं तो इसका भारत पर क्या असर होगा?

ट्रंप के जीतने की संभावना नहीं है लेकिन अगर वह जीतते हैं तो उन्हें अपनी सोच में बदलाव लाना होगा. उन्हें अन्य देशों के साथ अमेरिका के विविधतापूर्ण संबंधों का ख्याल रखना होगा जिसमें भारत भी शामिल है. 

फिलहाल ट्रंप की कोई जवाबदेही नहीं है और वह समर्थन के लिए ऐसा कर रहे हैं. अगर वह जीतते हैं तो उनकी सबसे बड़ी चुनौती चीन होगी. वह जो भी करेंगे उसका बड़ा परिणाम होगा. भारत यहां पर प्रमुख मुद्दा नहीं है.

ट्र्रंप का कहना है कि नाटो बेकार हो चुका है और अमेरिका के सहयोगियों को भुगतान करना चाहिए. उनके जीतने की स्थिति में इस गठबंधन पर क्या असर होगा?

यह महज बकवास है. नाटो बना रहेगा. अमेरिका यूरोप को नाटो की मदद से नियंत्रित करता है. ऐसा नहीं होगा. यह महज कल्पना है.

ट्रंप चाहते हैं कि अमेरिका दुनिया के अन्य देशों से बाहर निकलकर अपने पर ध्यान केंद्रित करे.पश्चिम एशिया और एशिया प्रशांत सेे अमेरिका के निकलने के क्या परिणाम होंगे?

अमेरिका ऐसा कुछ नहीं करेगा. ट्रंप का विचार पूरी तरह से बेकार है. वह चाहते हैं कि अमेरिका खुद को क्षेत्रीय ताकत बनाकर मजबूत करे. यह महज कल्पना है. ट्रंप अमेरिका की विदेश और सैन्य नीति में इतना बड़ा बदलाव नहीं कर पाएंगे. हां वह भ्रम जरूर पैदा कर सकते हैं.

अगर हिलेरी क्लिंटन चुनाव जीतती है तो इससे भारत और अमेरिका के संबंधों पर क्या असर होगा?

हिलेरी क्लिंटन के राष्ट्रपति बनने के बाद सब कुछ सामान्य रहेगा. नीतियों में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा. सकारात्मक चीजें भी चलती रहेंगी और उसके साथ नकारात्मक भी. आपसी हित समान होने की वजह से हमारे संबंधों में स्थिरता बनी रहेगी. सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि हम अमेरिका की तरफ कितना हाथ बढ़ाते हैं और अमेरिका हमारे हितों को देखते हुए कितना आगेे बढ़ता है. 

First published: 21 May 2016, 18:49 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी