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पाकिस्तान: सामाजिक कार्यकर्ताओं की ज़मीन तेज़ी के खिसक रही है

लमट र हसन | Updated on: 15 January 2017, 8:22 IST
(फ़ाइल फोटो )

28 मार्च 2014

मशहूर कॉलमनिस्ट और एक्टिविस्ट रज़ा अहमद रूमी लाहौर में अपनी कार से ड्राइवर और बॉडीगार्ड के साथ सफर कर रहे थे. अचानक कुछ लोगों ने राजा मार्केट के पास उनकी कार पर गोलियों चला दीं. ग्यारह बार. रूमी के बॉडीगार्ड ने उन्हें बचाने के लिए छलांग लगाई, पर ड्राइवर मारा गया.

13 जनवरी 2017

रज़ा अहमद रूमी दो साल से ज्यादा समय से अमेरिका रह रहे हैं. वे पाकिस्तान अपने घरवालों और दोस्तों के पास जाना चाहते हैं. पर जोखिम नहीं लेना चाहते. उन्हें खुद की उतनी फ़िक़्र नहीं है जितनी कि अपने चाहनेवालों की. वे उनके ज़िंदगी को खतरे में नहीं डालना चाहते. रूमी कहते हैं, ‘हालात बेहद चिंताजनक हैं.’

2 नवंबर 2012

प्रमुख मानवाधिकार एक्टिविस्ट मारवी सिरमद जब इस्लामाबाद में काम से अपने घर लौट रही थीं, उनकी गाड़ी पर गोलियां चलाई गईं. उन्हें चरमपंथी गुटों से पहले कई बार धमकियां मिल चुकी हैं. खुशकिस्मती से वे बच गईं. उनका कोई नुकसान नहीं हुआ.

13 जनवरी 2017

सिरमद और अन्य एक्टविस्टों के लिए मुद्दों के खिलाफ आवाज उठाना ज्यादा मुश्किल हो गया है. सिरमद कहती हैं, ‘यह हमेशा से मुश्किल रहा है. पर हमारे पैरों के नीचे से जमीन तेजी से खिसक रही है. विरोधियों को सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर चलाए जा रहे अभियानों का सामना करना पड़ता है. ये अभियान उनके रवैये को गैरकानूनी बताने के लिए है. ये उन पर देशद्रोही या धर्म-विरोधी होने का आरोप लगा रहे हैं.’

नए साल की शरुआत में ही पाकिस्तान में समस्याएं और बढ़ गई लगती हैं. कहा जा रहा है कि जिन नौ ब्लॉगर्स ने बलोचिस्तान में अधिकारों के हनन और आतंकियों से लड़ने की आवश्यकता जैसे संवेदनशील मुद्दों पर लिखा, वे 2017 में एक हफ्ते से कम समय में लापता हो गए.

ब्लॉगर्स उन मुद्दों को उठाना चाहते थे, जिनसे वे परेशान थे, जिनसे मूल पाकिस्तान आहत हु्आ है. रिपोर्ट है कि अहमद वकास गोराया और आसिम सईद को लाहौर में गायब किया गया, जब वे पाकिस्तान लौट रहे थे. गोराया नीदरलैंड्स में रह रहे थे और सईद सिंगापुर में काम करते थे.

कैच ने रज़ा रूमी और मारवी सिरमद से बात की, यह जानने के लिए ब्लॉगर्स क्यों और कैसे लापता हो रहे हैं. सिरमद कुछ साल पहले ही हमलावरों से बाल-बाल बची थीं.

दो साल से देश से बाहर

फोन पर इंटरव्यू में रूमी ने कैच को बताया कि पाकिस्तान में हालात बेहद चिंताजनक हैं. ‘मैं चिंतित हूं कि इन अपहृत ब्लॉगर्स के परिवारों पर क्या बीत रही होगी. इसके लिए असैन्य सरकार को उत्तरदायी ठहराया जाना चाहिए. पाकिस्तान में लोकतंत्र है, वहां कोर्ट हैं, संसद है. असैन्य सरकार ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की अहमियत पर बल देने के लिए कुछ खास नहीं किया है.’

रूमी महसूस करते हैं कि कुछ महीनों पहले साइबर क्राइम पर कड़ी कार्रवाई करने के लिए साइबर क्राइम लॉ बिल संसद में पारित किया गया था. अब इसका इस्तेमाल राजनीतिक मकसद से हो रहा है. ‘यही हो रहा है कि जो भी विरोध कर रहा है, उसे बर्ख़ास्तगी और जुल्म का जोखिम उठाना पड़ रहा है.’

‘चिंता की बात यह है कि उन पर ईश-निंदा का आरोप लगाकर निशाना साधा जा रहा है. जो भी धर्म विरुद्ध है, उस पर दोहरा आरोप है-राष्ट्रीय सुरक्षा का और ईश-निंदा का भी.’ रूमी दो साल से ज्यादा समय से पाकिस्तान से बाहर रहे. ‘मैं पाकिस्तान को मिस करता हूं. घर जाना चाहता हूं, परिवार के पास रहना चाहता हूं.’ 

उन्हें वह दिन याद है, जब उनका नाम पाकिस्तान तालिबानियों की हिट लिस्ट में था. ‘मैं सोच रहा था कि वे मेरा पीछा नहीं करेंगे. मैंने सोचा, वे मेरे लिए क्यों आएंगे? मैं कुछ नया नहीं कह रहा हूं, कुछ ऐसा जो पहले नहीं कहा गया हो.’ ‘उस वाकए के बाद मैं चौकस हो गया. मैं अपने लिए इतना नहीं डर रहा, पर किसी और के जीवन को जोखिम में नहीं डाल सकता. उम्मीद करता हूं कि यह मामला इस साल निपट जाए और मैं पाकिस्तान जा सकूं.’

रूमी ने बताया कि वे अब भी लिखते हैं, द फ्राइडे टाइम्स के सलाहकार संपादक हैं, पर ‘मेरी प्रोफाइल तक कम लोगों की पहुंच रह गई है. मैंने ऐसा जानबूझकर किया है. मैं अपने लिए चिंतित नहीं हूं, पर अपने परिवार के लिए, अपने पैरेंट्स के लिए चिंतित हूं, जो अब भी वहां हैं.’ 

‘दूसरे देश में रहना आसान नहीं है, लगता है जैसे आप अजनबियों के बीच आ गए हैं.’ दुनिया को जल्द उनकी जीवनी में उनके बारे में पढऩे को मिलेगा, जिसकी उन्हें इस साल आने की उम्मीद है.

बिंदी वाली हिंदू

मारवी सिरमद को कलप वाली सूती साड़ी और बड़ी बिंदी के कारण पाकिस्तान में अक्सर भारतीय समझा जाता है. वे यह सब गौरव के साथ करती हैं क्योंकि मानती हैं कि पाकिस्तान में हिंदुओं और ईसाईयों को मुसलमानों के बराबर अधिकार हैं. वे बिंदी वाली हिंदू के नाम से मशहूर हैं. इस नाम से उन्हें राइट विंग के कमेंटेटर जाएद हमीद पुकारते हैं. 

ईमेल इंटरव्यू में उन्होंने कैच को बताया कि पाकिस्तान और वहां के उदारवादियों के साथ क्यों नहीं कुछ ठीक चल रहा. 

इन ब्लॉगर्स को निशाना क्यों बनाया गया? उनके काम में ऐसा क्या था, जिससे लोग नाराज हो गए?

निश्चित तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता. मैं उनके अकांउट्स नहीं देख रही थी. सलमान हैदर के अलावा किसी का नाम तक नहीं जानती थी. सलमान सांप्रदायिक हिंसा, लापता बलोचिस्तानी, लोकतांत्रिक व्यवस्था में असैन्य सर्वोच्चता, धार्मिक उग्रवाद और आतंकवाद के खिलाफ सक्रिय रहे हैं.

समर अब्बास से मैं कभी नहीं मिली और ना ही मेरी बातचीत हुई. वे सांप्रद्रायिक हिंसा के खिलाफ सक्रिय रहे हैं, इसलिए उनके बारे में जानती थी. वकास, अहमद और असीम के बारे में मैंने केवल सोशल मीडिया (ट्विटर और फेसबुक) से जाना. वे धार्मिक आतंकवाद और उग्रवाद, साथ ही सैन्य-असैन्य संबंधों की आलोचना करते रहे हैं. पर मैं निश्चित तौर पर नहीं कह सकती कि वे कोई गुमनाम पेज भी चलाते थे.

ऊपरी तौर पर ऐसा कुछ नहीं है, जिससे लगे कि वे कोई ईश-निंदा का पेज चलाते थे. कुछ ट्विटर अकाउंट्स और टीवी एंकर्स इन ब्लॉगर्स का ईश-निंदा के पेज के साथ संबंध होने का दावा कर रहे हैं, जिससे बिना किसी प्रमाण और संदर्भ के इन ब्लागर्स का जीवन खतरे में पड़ रहा है. बदनाम करने वाले इन अकाउंटों और खतरनाक आरोप लगाने वाले लोगों के खिलाफ पाकिस्तान के अधिकारियों को कार्रवाई करनी चहिए.

अधिकारी कह रहे हैं कि उन्हें उनके ठिकानों की जानकारी नहीं थी. मानवाधिकार एक्टिविस्ट क्यों सोच रहे हैं कि उन्हें उन्होंने गायब किया?

हमें सही तौर पर नहीं मालूम. केवल इतना कह सकती हूं कि जो इन अपहरणों का पक्ष ले रहे हैं, इन लापता लोगों को महत्वहीन बना रहे हैं, और दावा कर रहे हैं कि इसे सैन्य प्रतिष्ठान ने किया है. ये लोग राज्य की कुछ संस्थाओं से संबद्ध माने जाते हैं, जैसा कि उन्होंने खुद ने माना. इसलिए उम्मीद करती हूं कि जिन संस्थाओं पर ये लोग ‘कदम’ उठाने का आरोप लगा रहे हैं, वे तुरंत प्रतिक्रिया करें और अपनी स्थिति स्पष्ट करें.

उनका पता लगाने के लिए क्या किया गया है? 

हमने मीडिया और आंतरिक मंत्री का बयान सुना है कि पुलिस मामले की तहकीकात कर रही है और इस दिशा में प्रगति हुई है (अंतिम खबर यह मिली थी कि सीसीटीवी कैमरे में कोई वाहन नजर आया है, जिसने शायद सलमान हैदर को उठाया है.)

हमने अब तक और कुछ नहीं सुना है, सिवाय इसके कि राष्ट्रीय मानवाधिकार कमीशन ने इस दिशा में कदम उठाने को कहा है (हालांकि एनसीएचआर ने ऐसा अब तक नहीं किया है). तीन दिन पहले आंतरिक मंत्री ने यह भी कहा कि इस मामले को ‘गुप्त एजेंसियां’ भी देख रही हैं. 

पर पांच लापता ब्लॉगर्स में से दो के लिए अब तक एफआईआर भी दर्ज नहीं हुई है. सुना है कि आज होगी. फिंगर्स क्रॉस रखती हूं. 

मीडिया की खबरों के हिसाब से चार या पांच ब्लॉगर्स लापता हैं, पर आप और कुछ अन्य लोग ज्यादा बता रहे हैं. सही संख्या कितनी है?

संख्या रोज बदल रही है. हम अब तक पांच के परिवारों से मिले हैं. किसी और मुद्दे पर मुल्तान से चार और गायब हुए हैं. वे पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के समर्थक बताए जा रहे हैं. उन पर आरोप है कि वे मुख्य न्यायाधीश के गलत कैप्शन के साथ किसी राजनेता की तस्वीर सर्कुलेट कर रहे हैं. 

हम उनके परिवार से अब तक संपर्क नहीं कर सके हैं. विभिन्न चैनलों ने कुछ और भी गायब होने का दावा किया है, पर हम उनके नाम और विवरण की पुष्टि करने की कोशिश कर रहे हैं.

कई बार आपको निशाना बनाया गया. क्या पाकिस्तान में संवेदनशील मुद्दों को उठाना और मुश्किल हो गया है? 

यह हमेशा से मुश्किल रहा है. पर हमारे पैरों के नीचे से जमीन तेजी से खिसक रही है. विरोधियों को सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर चलाए जा रहे अभियानों का सामना करना पड़ता है. ये अभियान उनके रवैये को गैरकानूनी बताने के लिए है. वे उन पर देशद्रोही या धर्म-विरोधी होने का आरोप लगा रहे हैं. अब मुख्यधारा का इलैक्ट्रॉनिक मीडिया भी विरोधी स्वरों को बदनाम करने वाली ब्रिगेड में शामिल हो गया है. 

First published: 15 January 2017, 8:22 IST
 
लमट र हसन @LamatAyub

Bats for the four-legged, can't stand most on two. Forced to venture into the world of homo sapiens to manage uninterrupted companionship of 16 cats, 2 dogs and counting... Can read books and paint pots and pay bills by being journalist.

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