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बिकिनी बनाम बुर्किनी: फ्रांस ही नहीं, पूरा यूरोप इस्लामोफोबिया की चपेट में है

रंजन क्रास्टा | Updated on: 29 August 2016, 15:39 IST
(कैच न्यूज)

फ्रांस में हाल ही में बुर्किनी पर लगाए गए प्रतिबंध पर उठा शोर थमने का नाम नहीं ले रहा है. कभी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संस्कृतिक सहजता का गढ़ रहे फ्रांस का आज दुनिया भर में मखौल उड़ाया जा रहा है. हालांकि इस मामले में फ्रांस को पूर्वाग्रह ग्रसित कहकर उसे गलत ठहराना आसान (और पूरी तरह से जायज) है लेकिन इन सबके बीच हम बड़ी चीज को अनदेखा कर रहे हैं.

बुर्किनी पर प्रतिबंध लगा कर फ्रांस ने अपने समाज में पसरे इस्लामोफोबिया को ही उजागर किया है और जिस समस्या से पूरा यूरोप जूझ रहा है, उसे आसानी से अपनी समस्या बना लिया है.

ऐसा नहीं है कि फ्रांस इस महाद्वीप पर एक अकेला इस्लाम विरोधी हो और बाकी सब इस्लाम समर्थक या प्रेमी हैं. यह तो इस्लाम फोबिया से जूझ रह पूरे यूरोप का महज एक नमूना है, जो बुर्किनी के बहाने खुल कर सामने आ गया है.

आइए देखें जर्मनी से लेकर नीदरलैंड तक यूरोप कैसे इस्लाम विरोधी भावनाएं सुलग रही हैं:

जर्मनी

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जहां तक शरणार्थियों की मदद का सवाल है तो यूरोप में जर्मनी सबसे आगे रहा है. पिछले साल जब यूरोप में अत्यधिक शरणाथिर्यों की आवक हुई तब, जर्मनी ने उनके लिए अपने द्वार खोल दिए, इसके लिए उसे सराहा गया. जाहिर है, उसे इसकी कुछ तो कीमत चुकानी ही थी.

गर्मियों में जर्मनी में हुए छोटे-मोटे आतंकवादी हमले की घटनाओं से शरणार्थी विरोधी दक्षिणपंथी पार्टियों को एक तरह से स्वयं को सही ठहराने का मौका मिल गया. ऑल्टर्नेटिव फॉर जर्मनी (एएफडी) पार्टी, जर्मनी के 16 संसदीय क्षेत्रों में से आधे में अपनी पैठ बनाने में कामयाब रही है. वर्तमान में एएफडी को राष्ट्रीय स्तर पर करीब 12 फीसदी मत हासिल है और जर्मनी में मुख्यधारा का प्रतिनिधित्व पाने के लिए इसे राष्ट्रीय स्तर पर पांच फीसदी और वोटों की जरूरत है.

हाल ही में किए गए एक सर्वे में भी यह सामने आया कि मुस्लिम अप्रवासियों की बढती आवक पर जर्मन समाज को कुछ आपत्तियां हैं. इंफ्राटेस्ट द्वारा करवाए गए इस सर्वे के अनुसार जर्मनी के 81 फीसदी लोग सार्वजनिक स्थलों पर मुस्लिम पर्दाप्रथा यानी नकाब पर प्रतिबंध लगाने के पक्ष में हैं. जबकि सर्वे में शामिल 51 फीसदी लोग पूरे बुर्के पर ही पूर्ण प्रतिबंध के पक्ष में खड़े दिखाई दिए.

इसके बावजूद कई विशेषज्ञ फ्रांस में बुर्किनी पर प्रतिबंध को ‘बेकार’ बता रहे हैं. जाहिर है इस भावना के पीछे सुरक्षा संबंधी चिंताएं है. हालांकि, किंग्स कॉलेज में सुरक्षा अध्ययन के प्रोफेसर पीटर न्यूमन ने कहा, 'मैं एक भी मामला ऐसा नहीं बता सकता, जिसमें बुर्के पर प्रतिबंध से कोई आतंकवादी हमला रोका गया हो या किसी को आतंकी बनने से रोका जा सका हो.'

जाहिर है, बुर्के को लेकर यह डर इसलिए है क्योंकि इसका संबंध इस्लाम से है, और इसके आतंकवाद से जुड़े होने का कोई ठोस सबूत नहीं है. इसका मतलब हुआ असल डर इस्लाम से है, जो कि चिंताजनक है.

नीदरलैंड

हालांकि जर्मनी में इस्लाम विरोधी भावना फिलहाल व्यापक रूप से राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में प्रतिबिंबित नहीं हो रही है लेकिन नीदरलैंड में, यह मामला पूरी तरह से राजनीतिक रूप लेने के करीब है.

चरमपंथी फ्रीडम पार्टी, जिसे अगले साल होने वाले चुनाव में डच संसद में सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व मिलने की उम्मीद है, ने अपनी एक पंचवर्षीय इस्लाम विरोधी योजना का खुलासा किया. उनके घोषणापत्र का एक प्रमुख तथ्य देश को इस्लामीकरण से बचाना है. इसके लिए वे वर्तमान स्थिति को पूर्णतः पलटने की बात करते हैं.

उनकी योजना कोई छोटी-मोटी नहीं है, वे मुस्लिम स्कूलों, मस्जिदों को बंद करने, कुरान व इस्लामी पोशाक पर प्रतिबंध लगाने और मुस्लिम शरणार्थियों के लिए अपनी सीमाएं सील करने का वादा कर रहे हैं.

यहां गौरतलब है कि अपनी चरम नीतियों के चलते उन्हें गठबंधन सहयोगी मिलने की संभावना बेहद कम है, जो कि डच राजनीति में बहुत जरूरी है. इसलिए राजनीति की डगर उनके लिए थोड़ी कठिन हो सकती है. हालांकि, तथ्य यह है कि वे अपनी वर्तमान सीट संख्या से दोगुनी सीटें जीत सकते हैं, यह भी एक तरह से इस्लामोफोबिया के प्रसार का ही प्रतीक है.

यूनाइटेड किंगडम

ब्रेग्जिट पर जनमत संग्रह के दौरान यूके की बहुलतावादी संस्कृति की समस्या उभर कर सामने आई. जनमत संग्रह से महीनों पहले हमने यूकिप पार्टी के नेता नाइगेल फैराज को यूके में जगह-जगह घूम कर आप्रवासियों के प्रति खौफ पैदा करते देखा.

हालांकि, उस समय माना जा रहा था कि उनके विचार, विशेष रूप से इस्लाम विरोधी बयानबाजी, उन तक ही सीमित हैं लेकिन जनमत संग्रह ने यह अनुमान गलत साबित कर दिया.

जनमत संग्रह के तुरंत बाद वाले सप्ताह में इंग्लैंड और वेल्स में नफरत फैलाने वाले अपराधों की संख्या में 42 फीसदी की वृद्धि हुई. जिन क्षेत्रों में ईयू को छोड़ने पर अधिक मत पड़े, वहां अपराधों की संख्या ज्यादा पाई गई, जो इस्लाम से सीधा संबंध दर्शाता है.

अभी हाल ही नस्लीय भेदभाव के उन्मूलन पर संयुक्त राष्ट्र की समिति ने ब्रिटेन के राजनेताओं द्वारा आप्रवासी भावनाओं को उजागर करने वाली बयाननबाजी पर प्रकाश डाला. हालांकि, इस नस्लवाद के लिए ब्रेग्जिट को पूरी तरह दोष देना गलत होगा.

मुस्लिम विरोधी नफरत फैलाने वाली गतिविधियों पर नजर रखने वाली एक संस्था टेल मामा के अनुसार 2015 में इस्लामी समुदाय के खिलाफ नफरत के अपराधों में 316 फीसदी वृद्धि देखी गई.

इटली

फ्रांस के बुर्किनी पर प्रतिबंध के मद्देनजर, इटली के आंतरिक मामलों के मंत्री इस प्रकार के प्रतिबंध की संभावना को खारिज करते दिखाई दिए. हालांकि, पूरी इटली में प्रतिक्रया का स्तर यही नहीं है. मिस्र में जन्मे इतालवी सांसद, मैग्डा अल्लम ने 2008 में ईसाई धर्म अपना लेने के बाद खुल कर इस्लाम की मुखालफत की है, यहां तक कि उन्होंने इस्लाम को ‘कैंसर’ तक कह डाला.

मस्जिद विरोधी राजनेता गियानलुसा गैम्बिनी का मानना है मस्जिद वह स्थान है, जहां कट्टरवाद पनपने का डर रहता है.

इस बीच दुनिया के सात अजूबों में सम्मिलित पीसा की झुकी मीनार वाले शहर पीसा के निवासी इस स्मारक से 400 मीटर की दूरी पर बनाई जा रही एक मस्जिद का विरोध कर रहे हैं.

मस्जिद विरोधी राजनेता गियानलुसा गैम्बिनी ने कहा, 57 फीसदी पीसावासी इस मस्जिद के निर्माण के खिलाफ हैं. उनका मानना है मस्जिद वह स्थान है, जहां कट्टरवाद पनपने का डर रहता है.

First published: 29 August 2016, 15:39 IST
 
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