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भारत की एनएसजी सदस्यता पर अब सियोल में फैसला

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 June 2016, 10:32 IST
(कैच न्यूज़)

परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में सदस्यता के लिए भारत की अर्जी पर विएना में बैठक के दौरान कोई फैसला नहीं हो सका. अब सियोल बैठक में इस पर विचार किए जाने की उम्मीद है.

दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में इस महीने के अंत में होने वाले एनएसजी के पूर्ण अधिवेशन में भारत की दावेदारी पर कोई फैसला होने की संभावना है. विएना में हुई एनएसजी की दो दिवसीय बैठक में इस मुद्दे पर किसी निष्कर्ष पर न पहुंच पाने के बाद यह फैसला किया गया.

अमेरिका, 48 देशों के समूह में भारत की सदस्यता का पुरजोर समर्थन कर रहा है. हाल ही में पीएम नरेंद्र मोदी की विदेश यात्रा में अमेरिका, स्विट्जरलैंड और मैक्सिको ने भारत को समर्थन का भरोसा दिया था. 

दावेदारी में चीन बाधा

एनएसजी के ज्यादातर सदस्य देश भी भारत की दावेदारी का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन इसका विरोध कर रहे चीन की दलील है कि एनएसजी को नए आवेदकों के लिए विशिष्ट शर्तों में ढील नहीं देनी चाहिए. 

एनएसजी संवेदनशील परमाणु प्रौद्योगिकी तक पहुंच को नियंत्रित करता है. परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर भारत की ओर से दस्तखत न किए जाने को आधार बनाकर पहले कई देश भारत का विरोध कर रहे थे.

पढ़ें: एनएसजी की सदस्यता में चीन का अड़ंगा

इस बीच कई देशों ने भी भारत की एनएसजी सदस्यता के मुद्दे पर अब अपना रुख नरम किया है. बहरहाल, चीन अपने रुख पर अड़ा हुआ है. विएना में हुई बैठक में चीन ने सीधे तौर पर तो भारत की सदस्यता का विरोध नहीं किया, लेकिन इसे एनपीटी पर दस्तखत न करने से जोड़ा.

24 जून को सियोल अधिवेशन

एनएसजी आम राय के आधार पर काम करती है और भारत के खिलाफ किसी एक देश का वोट भी उसकी दावेदारी में रोड़े अटका सकता है. 

48 देशों के समूह एनएसजी में चीन के अलावा न्यूजीलैंड, आयरलैंड, तुर्की, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रिया भी भारत की दावेदारी के विरोध में हैं. सियोल में 24 जून को एनएसजी का पूर्ण अधिवेशन होने वाला है.

पढ़ें: एनएसजी और एमटीसीआर पर भारत को मिला अमेरिका का साथ

First published: 11 June 2016, 10:32 IST
 
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