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एनएसजी पर शी जिनपिंग से मिलकर चीन को मना सकते हैं मोदी

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 June 2016, 9:04 IST
(पत्रिका)

न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) में भारत की सदस्‍यता का विरोध कर रहे चीन को मनाने का जिम्मा अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद उठाया है. सूत्रों के मुताबिक इसी महीने ताशकंद में होने वाली बैठक में मोदी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात कर सकते हैं.

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गौरतलब है कि अमेरिका के समर्थन के बावजूद गुरुवार को विएना में आयोजित प्रारंभिक तकनीकी बैठक में भारत, पाकिस्तान और नामीबिया से मिले आवेदनों पर चर्चा की गई लेकिन ये बैठक बेनतीजा रही. अब ये मुद्दा 24 जून को एनएसजी की सिओल में होने वाली प्लेनरी (मीटिंग) में रखा जाएगा.

चीन के विरोध की वजह

इसके अलावा राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी पिछले दिनों पड़ोसी देश के साथ भारत के संबंधों को मधुर करने के संबंध में चीन की यात्रा की यात्रा की थी. वहीं चीनी विदेश मंत्रालय कह चुका है कि वह भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मधुर करना चाहता है. 

भारत के अमेरिका से बढ़ रहे संबधों को चीन के विरोध की सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है. भारत के साथ अमेरिका के संबंधों में आ रही दृढ़ता को लेकर चीन बौखलाया हुआ है.

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वहीं चीन का कहना है कि बिना परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर किए भारत एनएसजी का सदस्य नहीं बन सकता. न्यूजीलैंड, साउथ अफ्रीका, आयरलैंड, तुर्की और ऑस्ट्रेलिया भी इसी वजह से भारत का विरोध कर रहे है.

पाक के साथ हो सकता है शामिल

अगर भारत शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (एससीओ) के लिए समयसीमा में कागजों की कानूनी कार्रवाई पूरी कर लेता है, तो बैठक में पाकिस्तान के साथ शामिल हो सकता है.

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सूत्रों का कहना है कि ऐसा हुआ तो पीएम मोदी के पास 23-24 जून को इसमें हिस्सा लेने का मौका होगा. एनएसजी के लिए सम्मेलन सियोल में 20 से 24 जून तक होना है, जिसमें भारत के शामिल होने या नहीं होने का फैसला हो जाएगा.

First published: 12 June 2016, 9:04 IST
 
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