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इट हैपेंस: रेप पीड़ितों की यह तस्वीरें विचलित कर सकती हैं

प्रियता ब्रजबासी | Updated on: 10 September 2016, 8:14 IST
(Facebook/yanamazurkevichphotography/Current Solutions)
QUICK PILL
चेतावनी: इस आलेख में इस्तेमाल की गई तस्वीरें यौन उत्पीड़िन के शिकार लोगों और अन्य दूसरे पाठकों को विचलित कर सकती हैं.

ब्रॉक टर्नर के मुकदमे ने विश्व को कोई बात सिखाई है तो वह यह कि यदि आप संपन्न हैं, आइवी लीग से पढ़े ‘गोरे’ हैं, तो आप हत्या के अपराध से भी बच सकते हैं! या ब्रॉक टर्नर के संदर्भ में कहें तो बलात्कार से भी! उनके मुकदमे से विश्व के सबसे शक्तिशाली देश की न्यायिक व्यवस्था के पाखंड की पोल खुल गई है, जिसने बलात्कार की पीड़िता को न्याय के असफल हो जाने की पीड़ा के साथ जीने को विवश कर दिया है.

21 वर्ष के टर्नर को जनवरी 2015 में स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी में कचरे के डिब्बे के पीछे एक अचेत महिला का बलात्कार करने के लिए सजा सुनाई गई थी. पर उन्हें इस सप्ताह जेल से महज तीन महीने बाद ‘अच्छे व्यवहार’ के आधार पर रिहा कर दिया गया. जज एरोन पर्स्की ने उन्हें छह माह की सजा सुनाई थी, बावजूद इसके कि अभियोग पक्ष छह साल की सजा की मांग कर रहा था. यह एक ऐसा अपराध है, जिसके लिए अधिकतम सजा 14 साल तक की हो सकती है.

Facebook/yanamazurkevichphotography/Current Solutions

टर्नर को पहले ही महज छह महीने की सजा सुनाई गई थी, उस पर भी उसे महज तीन माह में छोड़ दिया गया, इस बात से अमेरिका और विश्व भर में एक बार फिर महिला अदिकारों और यौन उत्पीड़न के सवाल पर बवाल मच गया है.

ब्रॉक टर्नर की रिहाई की प्रतिक्रिया में इथाका कॉलेज की एक छात्रा और फोटोग्राफर याना मजूरकेविच ने यौन उत्पीड़न जागरूकता संगठन ‘करेंट सॉल्यूशंस’ के सहयोग से ब्रॉक टर्नर से प्रेरित अपनी दूसरी फोटो सीरीज प्रकाशित की है. ‘इट हैपंस’ शीर्षक से इस फोटो सीरीज में सभी तरह के यौन उत्पीड़न का बेहद सशक्त चित्रण है.

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दिलचस्प यह है कि याना ने अपने चित्रों में पीड़ित और उत्पीड़क दोनों को शामिल किया है, ये लोग होमो, ट्रांस और बाई, सभी तरह के सेक्स से जु़ड़े हैं. उनका काम इस बात पर रोशनी डालता है कि यौन उत्पीड़न किसी के साथ हो सकता है, किसी के द्वारा हो सकता है और कहीं भी हो सकता है, चाहे वे किसी भी लिंग, उम्र या लैंगिक रुझान के हों.

इथाका कॉलेज के विद्यार्थियों द्वारा प्रकाशित समाचार पत्र ‘द इथाकन’ को मजूरकेविच ने बताया कि वे पात्रों को निर्जीव और सदमे में चित्रित करना चाहती थीं, जो एक तरह से दर्शकों को यह महसूस कराए कि उनके साथ सच में अमानवीय घटना हुई है. ‘रेप होने के दौरान वे कुछ ऐसा ही महसूस करते हैं. एकदम ठंडे पड़ जाते हैं.’

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याना की पहली फोटो सीरीज- ‘डियर ब्रॉक टर्नर’ ने इस बात पर फोकस किया था कि किस तरह रेप संस्कृति यौन उत्पीड़न के लिए महिला पीड़ितों को दोषी ठहराती है और उनकी निंदा करती है.

मजूरकेविच ने कहा कि वह अपनी पहली फोटो सीरीज को लेकर खासतौर पर चिंतित थी क्योंकि उसमें अलग-अलग दृष्टिकोणों की कमी थी और वह लैंगिक समानता को सही ढंग से दर्शाने में विफल रहीं.

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मजूरकेविच ने ‘द इथाकन’ को आगे बताया, ‘मैं लोगों के कमेंट्स पढ़ रही थी कि वे क्या कह रहे हैं, और उनमें कुछ कमेंट्स थे- ‘पुरुषों का भी बलात्कार होता है?’, ‘औरतों का औरतों द्वारा बलात्कार होता है?’ और, यह, ‘ये सभी औरतें व्हाइट क्यों हैं?’ मैं अच्छी तरह समझती हूं कि ये लोग कहां से हैं.’

मजूरकेविच ने अपनी बात जारी रखी, ‘इसलिए खासकर इस समय और इस दौर में, और हरेक के साथ जो हो रहा है -समान अधिकारों और जाति के साथ जो हो रहा है- मैं बस उन सबको विस्तार से कहना चाहती थी और हर बात को शामिल करना चाहती थी.’

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यह सीरीज उनके पहले वाली सीरीज से ज्यादा विचलित करती है. सीरीज में 9 तस्वीरें हैं, और हरेक में औरत पीड़ित है, उसे जबरन छुआ जा रहा है या वह किसी के शिकंजे में है, और कैमरे की ओर देख रही है. मुजरिमों के चेहरे ज्यादा नहीं दिखाई दे रहे हैं, और हर तस्वीर के साथ संदेश है: ‘यह अचानक होता है’, या ‘यह अनपेक्षित ढंग से होता है’, या ‘यह हरेक के साथ होता है.’

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हर तस्वीर सच्ची कहानियों से प्रेरित है, जो उनकी फ्रैंड्स ने सुनाई थीं. कुछ मॉडल्स जिनकी तस्वीरें ली गई हैं, वे याना की फ्रैंड्स हैं. याना ने ‘द इथाकन’ को अपने इंटरव्यू में कहा, ‘मैं और हजारों तस्वीरें ले सकती थी, फिर भी वे कम पड़तीं.’

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स्वयं यौन उत्पीड़न की शिकार याना ने अपने काम के माध्यम से यौन हिंसा के खिलाफ आंदोलन की शुरुआत की है. उन्होंने कहा, ‘मैं कुछ ऐसा क्रिएट करना चाहती थी, जो लोगों को महसूस करने पर मजबूर कर दे कि यौन उत्पीड़न वाकई एक बड़ा और गंभीर मुद्दा है. यह जातिवाद या आतंकवाद जितना ही महत्वपूर्ण है.’ उन्होंने आगे कहा, ‘यह आपकी नजर के सामने है. आप उसे अनदेखा नहीं कर सकते.’

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First published: 10 September 2016, 8:14 IST
 
प्रियता ब्रजबासी @PriyataB

Priyata thinks in words and delivers in pictures. The marriage of the two, she believes, is of utmost importance. Priyata joined the Catch team after working at Barcroft Media as a picture desk editor. Prior to that she was on the Output Desk of NDTV 24X7. At work Priyata is all about the news. Outside of it, she can't stay far enough. She immerses herself in stories through films, books and television shows. Oh, and she can eat. Like really.

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