Home » इंटरनेशनल » Pak Army uses Panama Papers to put Nawaz Sharif on the mat
 

सेना और पनामा पेपर्स नवाज शरीफ के लिए दोधारी तलवार

विवेक काटजू | Updated on: 24 April 2016, 8:30 IST

पाकिस्‍तानी फौज एक बार फिर प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ के ऊपर अपना दबाव बना रही है. इस बार यह काम हालांकि बहुत करीने से किया जा रहा है और खासकर ऐसे मुद्दे की आड़ में जो शरीफ़ परिवार की कमज़ोर नस है- भ्रष्‍टाचार.

पिछले कुछ हफ्तों के दौरान भ्रष्‍टाचार के मसले से जुड़ी ऐसी दो अहम घटनाएं रही हैं जिनके चलते फौज के मुकाबले शरीफ परिवार की चमक धुंधली पड़ी है और उसके ऊपर फौज का शिकंजा कसता गया है.

पनामा के उद्घाटक दस्‍तावेज़ों में यह बात सामने आई थी कि नवाज़ शरीफ के बेटों हसन और हुसैन व बेटी मरियम के नाम से विदेशी ठिकानों में कंपनियां हैं. इन्‍हीं कंपनियों के रास्‍ते विदेश में कई निवेश किए गए हैं जिनमें एक निवेश लंदन की एक महंगी प्रॉपर्टी में भी पाया गया है. इस सूचना ने शरीफ परिवार के बारे में पहले से कायम उस धरणा को और पुष्‍ट किया है कि उसने अपनी काली कमाई को पाकिस्‍तान से बाहर छुपा रखा है.

भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते शरीफ परिवार की चमक धुंधली पड़ी है और फौज का शिकंजा कसता गया है

अपने बच्‍चों पर भ्रष्‍टाचार का सीधा निशाना कसता देख शरीफ़ ने एक अभूतपूर्व फैसला लेते हुए सीधे देश को संबोधित किया और सबके सामने अपने परिवार का बचाव किया. उन्‍होंने मुल्‍क को याद दिलाया कि कैसे उनके ऊपर लगातार बीते दशकों के दौरान सियासी और वित्‍तीय हमले होते रहे हैं लेकिन अपनी कड़ी मेहनत और अखंडता के सहारे उन्‍होंने खुद को हमेशा बेदाग साबित किया है और दोबारा लोगों का भरोसा जीता है.

उन्‍होंने पनामा दस्‍तावेजों में सामने आई सूचनाओ की जांच के लिए एक न्‍यायिक आयोग के गठन का वादा किया है. उनके सहयोगियों का कहना है कि नवाज़ शरीफ़ के बेटों ने कुछ भी गैर-कानूनी काम नहीं किया है. दिलचस्‍प यह रहा कि इस सियासी उथल-पुथल और शर्मिंदगी के बीच शरीफ़ कथित तौर पर अपनी स्‍वास्‍थ्‍य जांच के लिए लंदन निकल लिए.

पाकिस्तान: चार साल में नवाज शरीफ ने बनाई अरबों की संपत्ति

फौज की शुरू ही समूचे घटनाक्रम पर मूक निगाह रही है, हालांकि पीटीआइ के नेता इमरान खान शरीफ़ को निशाने पर लेने का यह मौका नहीं चूके. उन्‍होंने एक अवकाश प्राप्‍त जज की अध्‍यक्षता में न्‍यायिक आयोग गठित करने के फैसले को खारिज करते हुए मांग की है कि यह मामला पाकिस्‍तान के मुख्‍य न्‍यायाधीश को सौंप दिया जाए और सुप्रीम कोर्ट के एक कार्यकारी जज द्वारा इसकी जांच हो.

इस विवाद के चलते अब तक किसी भी अवकाश प्राप्‍त जज ने जांच आयोग का जिम्‍मा संभालने के लिए अपनी मंजूरी नहीं दी है. कहा जा रहा है कि आरोपों की जांच अब एक संयुक्‍त संसदीय समिति करेगी.

नवाज़ शरीफ़ के पाकिस्‍तान लौटते ही फौज के जनरल राहिल शरीफ़ ने परोक्ष रूप से परिदृश्‍य में प्रवेश किया. उन्‍होंने भ्रष्‍टाचार के खिलाफ जंग को आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष के साथ जोड़ते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि ''पाकिस्‍तान की एकजुटता, अखंडता और संपन्‍नता के लिए चौतरफा जवाबदेही की दरकार है.''

पीएम शरीफ़ के खिलाफ आरोपों की जांच अब एक संयुक्‍त संसदीय समिति कर सकती है

य‍ह दिखाने के लिए कि वे जो बोलते हैं उसे अपनाते भी हैं, 21 अप्रैल को एक रिपोर्ट आई कि राहिल शरीफ़ ने फौज के 12 अफसरों की सेवा समाप्‍त कर दी है. इनमें एक तीनसितारा जनरल ले.जन. ओबैदुल्‍ला खान खट्टक, दो दोसितारा जनरल और कई ब्रिगेडियर शामिल हैं. यह कदम इन सब के एक फौजी जांच में भ्रष्‍टाचार का दोषी पाए जाने पर उठाया गया है.


ले.जन. खट्टक के खिलाफ की गई कार्रवाई को सार्वजनिक करना उनके लिए इतना आसान नहीं था क्‍योंकि वे फौज की स्‍ट्रेटेजिक फोर्स कमान के कमांडर थे जिसके हाथों में पाकिस्‍तान के नाभिकीय हथियारों की चाबी होती है. राहिल शरीफ़ ने इस बात को नज़रंदाज़ किया है कि इस अहम कमान के पद पर नियुक्ति संबंधी फौज की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए जा सकते हैं. यह इस बात का संकेत है कि फौज के भीतर नवाज़ शरीफ़ को लेकर प्रतिकूल भावनाएं मौजूद हैं.

पाकिस्तान: राहिल शरीफ ने फौज के 12 भ्रष्ट अफसरों को बर्खास्त किया

अब सवाल यह उठता है कि क्‍या नवाज़ शरीफ इस ताज़ा हमले में बच पाएंगे और अगर बच भी गए, तो क्‍या उनकी सियासी ताकत पहले जितनी रह जाएगी. यही सवाल राहिल शरीफ़ के भविष्‍य से भी जुड़ा जिन्‍हें इस नवंबर में रिटायर होना है.

राहिल शरीफ़ उत्‍तरी वज़ीरिस्‍तान और फाटा के अन्‍य इलाकों में तहरीक-ए-तालिबान-पाकिस्‍तान (टीटीपी) के खिलाफ की गई कठोर कार्रवाई के चलते काफी लोकप्रिय रहे हैं. उन्‍होंने ईस्‍टर को लाहौर में हुए आतंकी धमाकों के बाद पंजाब में पाकिस्‍तान निर्देशित आतंकी समूहों के खिलाफ फौजी कार्रवाई के मसले पर शरीफ़ को आड़े हाथों भी लिया था.

राहिल शरीफ़ की तस्‍वीर वाली होर्डिंगों से पाकिस्‍तानी शहर पटे हुए हैं लेकिन उन्‍होंने एलान किया है कि वे अपना कार्यकाल खत्‍म होने के बाद अवकाश ले लेंगे. पाकिस्‍तान के जानकार मध्‍यस्‍थ इस एलान को विश्‍वसनीय मान रहे हैं क्‍योंकि उन्‍हें लगता है कि राहिल शरीफ अपने भाई और चाचा की यादों पर कोई धब्‍बा नहीं लगने देना चाहेंगे जो पाकिस्‍तान के नायक रहे हैं और जिन्‍हें भारत के खिलाफ जंग में शौर्य के लिए मरणोपरांत देश का सबसे बड़ा वीरता पदक दिया जा चुका है.

पाक सेना प्रमुख राहिल शरीफ़ इस साल नवंबर में रिटायर होने वाले हैं

ऐसे में सवाल बस इतना रह जाता है कि क्‍या जनरल यह चाहेंगे कि पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री द्वारा चुने गए अपने उत्‍तराधिकारी के हाथ में फौज की मान सौंपने से पहले नवाज़ शरीफ खुद कुर्सी से हट जाएं. दो साल पहले फौज ने नवाज़ शरीफ के लिए दिक्‍कतें खड़ी कर दी थीं.

उस वक्‍त इमरान खान और ताहिर-उल-कादरी फौज की ओर से खेल रहे थे. फौज नवाज़ शरीफ़ को यह जताना चाहती थी कि उन्‍हें मिले लोकप्रिय जनादेश के बावजूद जब बात उन मसलों की आती है जिन्‍हें फौज अपना अख्तियार समझती है, तो ऐसे में नवाज़ को अपनी हदों में रहना चाहिए. इस बार फौज इस बात पर ज़ोर देगी कि पनामा दस्‍तावेज़ों की जांच कायदे से हो और अगर इसके चलते नवाज़ को कुर्सी छोड़नी भी पड़े, तो यही सही.

लाहौर हमला: क्या पाकिस्तान में एक और तख्तापलट की जमीन तैयार है?

जहां तक नवाज़ शरीफ का सवाल है, वे अपने सियासी समर्थकों और समान विचार वाले दलों को जुटाने में लगे हैं. उन्‍होंने ''कठोर जवाबदेही'' का सामना करने की अपनी मंशा जतायी है, हालांकि पाकिस्‍तान के एक बड़े अखबार ने 22 अप्रैल के अपने संपादकीय का शीर्षक दिया है, ''प्रधानमंत्री और उनकी सरकार में लोगों का भरोसा हिला.''

इसी के साथ पाकिस्‍तान में मोदी की पहल भी धुंधली पड़ती जा रही है. क्‍या मोदी अब भी इस बात पर कायम रहेंगे कि नवाज़ शरीफ़ से वार्ता का कोई मतलब है?

First published: 24 April 2016, 8:30 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी