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पाक का दावा, एनएसजी में चीन रोकेगा भारत की एंट्री

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 April 2016, 15:43 IST
QUICK PILL
  • संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के पूर्व स्थायी प्रतिनिधि जमीर अकरम ने कहा कि भारत को अब परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में प्रवेश मिलने की संभावना न के बराबर है. 
  • पिछले महीने नेशनल कमांड अथॉरिटी के सलाहकार जनरल खालिद किदवई ने कहा था, \'हमारे भी एनएसजी में दोस्त हैं और वह ऐसा नहीं होने देंगे.\'

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के पूर्व स्थायी प्रतिनिधि जमीर अकरम ने कहा कि भारत को अब परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में प्रवेश मिलने की संभावना न के बराबर है. जमीर अकरम कॉफ्रेंस ऑन डिसामेंर्ट में पाकिस्तान के दूत भी हैं.

अकरम ने कहा कि एनएजी का सदस्य बनने की होड़ में शामिल भारत को अमेरिका का समर्थन हासिल है लेकिन इसके बावजूद उसके एनएसजी का सदस्य बनने की संभावना 'न के बराबर' है.

पाकिस्तान की तरफ से महीने भर के भीतर इस तरह का यह दूसरा बयान है. पहला बयान भी देश के परमाणु मामलों से जुड़े अधिकारी ने दिया था. 

पिछले महीने नेशनल कमांड अथॉरिटी के सलाहकार जनरल खालिद किदवई ने कहा था, 'हमारे भी एनएसजी में दोस्त हैं और वह ऐसा नहीं होने देंगे.'

किदवई का कहना था कि बीजिंग नई दिल्ली को परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में प्रवेश लेने नहीं देगा क्योंकि भारत के इस समूह का सदस्य बनने के बाद इस्लामाबाद के साथ चीन के परमाणु सहयोग पर असर होगा. 

उन्होंने कहा कि चीन भारत और पाकिस्तान को एक साथ परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह का सदस्य बनाए जाने के पक्ष में है. अकरम ने कहा कि कुछ देश भारत के मामले में अपनाए गए दोहरे रवैये से खुश नहीं है.

2008 में भारत को आईएईए की तरफ से सुरक्षा मानकों में कई रियायतें दी गई थी, जिसका विरोध होता रहा है

2008 में भारत को आईएईए की तरफ से सुरक्षा मानकों में कई रियायतें दी गई थी जिसकी वजह से परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों को भारत के साथ परमाणु व्यापार करने की छूट मिली. जबकि इसके लिए भारत का एनपीटी पर दस्तखत करना जरूरी था.

चीन और पाकिस्तान ने भारत को दी गई इस रियायत का विरोध किया था लेकिन बाद में अमेरिकी दबाव की वजह से इस्लामाबाद शांत हो गया था. 

इस बीच पाकिस्तान के पूर्व ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के पूर्व चेयरमैन जनरल एहसानुल हक ने कहा कि दुनिया का परमाणु समीकरण निहायत ही भेदभावपूर्ण है. उन्होंने कहा कि पाकस्तिान का परमाणु कार्यक्रम जारी रहेगा.

हक ने कहा, 'चाहे कितनी भी प्रतिकूल स्थितियां बने, हम अपने क्रेडिबल डेटरेंस की दिशा में काम करते रहेंगे.'

First published: 14 April 2016, 15:43 IST
 
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