Home » इंटरनेशनल » pakistan army releases new song to pay tribute the children killed in peshawar school attack
 

16 दिसंबर: 'बड़ा दुश्मन बना फिरता है, जो बच्चों से लड़ता है'

निखिल कुमार वर्मा | Updated on: 16 December 2015, 8:43 IST

16 दिसंबर भारत और पाकिस्तान दोनों देशों दोनों की स्मृतियोंं में दु:स्वप्न की तरह दर्ज है. भारत मे आज से तीन साल पहले निर्भया बलात्कार कांड हुआ. जिसके बाद अमूमन पूरे देश में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को लेकर एक उबाल सड़कों पर देखने को मिला था.

दूसरी तरफ पाकिस्तान के लिए भी पिछले साल का 16 दिसंबर उसके जहन पर कभी न मिटने वाला दाग दे गया. आज ही के दिन पेशावर के आर्मी स्कूल पर हमला करके आतंकवादियों ने करीब डेढ़ सौ मासूम स्कूली बच्चों को मौत की नींद सुला दिया था.


अमूमन पाकिस्तान को लेकर एक धारणा है कि वहां का समाज कट्टरता और धर्म की रूढ़ियों में बुरी तरह से जकड़ा हुआ है. लेकिन पेशावर हमले के बाद दुनिया के सामने एक और पाकिस्तान के चेहरा सामने आया था. एक उदार पाकिस्तान जो संख्या में जरूर कम था लेकिन वहां के हालात से टकरा कर एक गूंज पैदा कर रहा था.

पाकिस्तान पेशावर हमले की पहली बरसी पर अपने बच्चों के पक्ष में और आतंक के खिलाफ आवाज उठा रहा है

आज एक बार फिर से पाकिस्तान पेशावर हमले की पहली बरसी पर नए अंदाज में अपने बच्चों के पक्ष में और आतंक के खिलाफ आवाज उठा रहा है.

आम जनता के साथ-साथ पाकिस्तानी सेना और मीडिया अलग-अलग ढंग से मारे गए बच्चों को याद कर रहे हैं. इस मौके पर पाकिस्तानी सेना ने एक दिल को छू लेने वाला वीडियो जारी किया है. इस वीडियों का शीर्षक है- 'मुझे दुश्मन के बच्चों को पढ़ाना है.'

वीडियो के जरिए यह संदेश आतंकियों और उनके समर्थकों को दिया जा रहा है कि वे पेशावर हमले का बदला लेंगे, लेकिन उन आतंकियों के बच्चों को शिक्षित करके जो हर दिन पाकिस्तान में मौत का खेल रच रहे हैं.

पिछले साल आज ही के दिन तहरीक--तालिबान पाकिस्तान के दशहतगर्दों ने पेशावर के आर्मी पब्लिक स्कूल पर हुए भीषण हमला किया था. इस हमले में पांच शिक्षकों सहित 144 बच्चे मारे गए थे.

पाकिस्तानी सेना ने दिल को छू लेने वाला वीडियो जारी किया है. इसका शीर्षक है- 'मुझे दुश्मन के बच्चों को पढ़ाना है


इस हमले के कुछ दिनों बाद भी पाकिस्तान में एक वीडियो गीत जारी हुआ था. उसके बोल थे- 'बड़ा दुश्मन बना फिरता है, जो बच्चों से लड़ता है...' इसे एक छोटे बच्चे ने गाया है. वीडियो में बच्चे आतंकवादियों को संदेश दे रहे हैं कि पेशावर नरसंहार उनकी दृढ़ता एवं संकल्पशक्ति को नहीं डिगा सकता.

पाक में आतंकी हमला कोई नई बात नहीं है लेकिन यह पहला मौका था जब एक स्कूल को निशाना बनाया गया. यहां बड़े पैमाने पर बच्चे मारे गए. ज्यादातर बच्चे पाकिस्तानी सेना के जवानों के थे. पाकिस्तान की ''9/11'' कही जाने वाली इस घटना ने वहां की सरकार, सेना और आम जनता को हिला कर रख दिया था.

घटना के तुरंत बाद पाकिस्तान सरकार ने आतंक के खिलाफ बहुत सारे कठोर कदम उठाए हैं. आतंकी गतिविधियों से जुड़े लोगों को सजा देने के लिए संविधान संशोधन कर मिलिट्री कोर्ट बनाई गई है. इसे वहां की सुप्रीम कोर्ट ने भी मान्यता दे दी.

पाकिस्तान की ''9/11'' कही जाने वाली इस घटना के बाद वहां की सरकार और सेना ने आतंकवाद के खिलाफ कई कठोर कदम उठाए हैं


देश भर के मदरसों के कार्यप्रणाली और फंडिंग पर नजर रखने और व्यापक सुधार के लिए कानूनी बदलाव किए गए हैं. हमले के बाद पाक सरकार ने छह साल से फांसी की सजा पर लगी रोक को हटाते हुए बीते एक साल में कई आतंकवादियों को फांसी दी है. पहले से चले आ रहे आतंक निरोधी सैन्य अभियान ‘जर्ब--अजब’ को व्यापक और तेज किया गया.

Peshawar Attack3

पाकिस्तानी सेना का दावा है इस अभियान में अब तक करीब 3400 आतंकी मारे गए हैं. वहीं एक अनुमान के मुताबिक पिछले एक साल में 300 से ज्यादा लोगों को फांसी दी जा चुकी है. अभी दो हफ्ते पहले ही पेशावर हमलों के संबंध में चार आतंकवादियों को फांसी दी गई थी.

दूसरी ओर पाक के प्रतिष्ठित अंग्रेजी अखबार डॉन ने अपनी वेबसाइट पर इस घटना में मारे गए बच्चों की याद में एक विशेष पन्ना जोड़ा है. '144 कहानियां' शीर्षक नाम शुरू हुई इस श्रृंखला में पेशावर हमले में मारे गए बच्चों की कहानियां है.

Peshawar Attack4

पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने 122 स्कूलों और कॉलेजों का नाम बदलकर हमले में मारे गए बच्चों के नाम पर रखने को मंजूरी दी है. शरीफ ने कहा, 'यह कदम सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है ताकि 'मृतकों की यादें हमारे जेहन में हमेशा बनी रहे. और बच्चों के ऊपर आतंकवाद का साया न पड़े.'

आमीन...

First published: 16 December 2015, 8:43 IST
 
निखिल कुमार वर्मा @nikhilbhusan

निखिल बिहार के कटिहार जिले के रहने वाले हैं. राजनीति और खेल पत्रकारिता की गहरी समझ रखते हैं. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से हिंदी में ग्रेजुएट और आईआईएमसी दिल्ली से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा हैं. हिंदी पट्टी के जनआंदोलनों से भी जुड़े रहे हैं. मनमौजी और घुमक्कड़ स्वभाव के निखिल बेहतरीन खाना बनाने के भी शौकीन हैं.

पिछली कहानी
अगली कहानी