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कर्ज में डूबे पाकिस्तान को खोलने पड़ेंगे चीन की मदद का राज, बढ़ी इमरान की मुसीबतें

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 October 2018, 10:10 IST

कर्ज में डूबे पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री इमरान खान की परेशनियां बढ़ती ही जा रही हैं. पाकिस्तान की आर्थिक हालत पिछले कुछ समय से काफी कमजोर रही है. जिसे लेकर पाकिस्तान विदेशों से कर्जे लेता जा रहा था. पाकिस्तान ने कर्ज का एक बड़ा हिस्सा चीन से भी लिया है. अर्थशास्त्रियों की मानें तो पाकिस्तान के हाल ग्रीस के ही तरह होते जा रहे हैं जहां पर अपना कर्ज चुकाने के लिए भी उसके सरकारी खजाने में ही फंड नहीं बचा है.

अपनी इस खस्ता आर्थिक हालत को देखते हुए पाकिस्तान के पास अब एक ही रास्ता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डिफॉल्टर बनने बच सके. इसके लिए पाकिस्तान के पास अब केवल अंतरराष्ट्रीय मुद्रा फंड (आईएमएफ) से मदद लेने का ही एक विकल्प बचा है.

पाकिस्तान के मौजूदा प्रधानमंत्री इमरान खान बीते कुछ वर्षों से पाकिस्तान की नवाज शरीफ सरकार द्वारा चीन से किए गए चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी-CPEC) की शर्तों का विरोध कर रहे हैं. इमरान खान ने प्रधानमंत्री बनने से पहले दावा किया था कि चीन की कंपनियों ने पाकिस्तानी कंपनियों से ऐसे आर्थिक करार किए हैं जिसका खामियाजा पाकिस्तान को लंबे अंतराल में भुगतना पड़ेगा.

इसी मामले में पाकिस्तान द्वारा आईएमएफ से मांगी गई आर्थिक मदद के मामले में आईएमएफ प्रमुख क्रिस्टीना लेगार्डनवंबर में आईएमएफ की टीम बेलआउट की शर्तों पर वार्ता के लिए पाकिस्तान पहुंचेंगी. इस बात की पुष्टि खुद आईएमएफ प्रमुख ने की. इस खुलासे के बाद पाकिस्तान की खस्ता आर्थिक हालत पूरी दुनिया के सामने आ गयी.

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इसके अलावा एक बात साफ है कि चीन और पाकिस्तान के बीच हुए वन बेल्ट वन रोड परियोजना (प्राचीन सिल्क रूट) का सीपीईसी चैप्टर खतरे में है. ऐसा पहली बार है जब पाकिस्तान इतनी बड़ी रकम का बेलआउट पैकेज आईएमएफ से मांग रहा है. पाकिस्तान के लिए पैदा हुए ये गंभीर हालात नए बने प्रधानमंत्री इमरान खान के लिए पहली सबसे बड़ी चुनौती है.

First published: 16 October 2018, 10:10 IST
 
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