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हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल है पाकिस्तान का ये शहर, जहां मुसलमानों से ज्यादा रहते हैं हिंदू

कैच ब्यूरो | Updated on: 3 February 2019, 21:59 IST

पाकिस्तान का नाम पूरी दुनिया में आतंकवाद के पनाहगार के रूप में जाना जाता है. साथ ही इसे हिंदूओं पर अत्याचार के रूप में भी पहचान मिली है. इस देश में आएं दिन अल्पसंख्यकों पर अत्याचार की खबरें आती रहती हैं. लेकिन ऐसा नहीं है पाकिस्तान के हर शहर या गांव में अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं है. यहां पर एक एक ऐसा भी शहर है जिसकी आबादी ना सिर्फ मुसलमानों से ज्यादा है बल्कि यहां कभी भी सांप्रदायिक दंगे नहीं होते.

बता दें कि इस शहर का नाम मीठी है. ये शहर मीठी थारपारकर जिले में स्थित है. यह शहर लाहौर से करीब 875 किलोमीटर, जबकि भारत के गुजरात के अहमदाबाद से करीब 340 किलोमीटर दूर है. इस शहर में हिंदू-मुस्लिम एकता की अनोखी मिसाल देखने को मिलती है.

इस शहर की आबादी करीब 87 हजार है, जिसमें से करीब 80 फीसदी हिंदुओं की आबादी है. जबकि पूरे पाकिस्तान में करीब 95 फीसदी मुसलमान हैं. कहा जाता है कि इस शहर में जब भी कोई धार्मिक त्योहार या सांस्कृतिक आयोजन होता है तो हिंदू-मुस्लिम दोनों धर्मों के लोग उसमें मिल-जुलकर भाग लेते हैं.

बता दें कि इस शहर में हिंदू और मुस्लिम दिवाली और ईद का त्योहार मिल-जुलकर मनाते हैं. मीठी में हिंदू लोग मुहर्रम के जुलूसों में भाग लेते हैं यही नहीं कई बार तो मुसलमानों के साथ रोजे भी रखते हैं. वहीं, हिंदुओं के धर्म का सम्मान करते हुए यहां के मुसलमान गाय को नहीं काटते. साथ ही वो बीफ भी नहीं खाते.

यही नहीं शहर में क्राइम रेट पाकिस्तान के दूसरे शहरों की अपेक्षा बहुत कम है. यहां अपराध दर महज दो फीसदी है. साथ ही यहां धार्मिक असहिष्णुता कभी भी देखने को नहीं मिलती.

बता दें कि इस शहर में कई मंदिर भी हैं, जिसमें सबसे प्रसिद्ध श्रीकृष्ण मंदिर है. कहते हैं कि जब यहां हिंदू मंदिरों में पूजा करते हैं, तब अजान के लिए तेज आवाज में स्पीकर नहीं बजाए जाते और नमाज के वक्त मंदिरों में घंटियां नहीं बजाई जाती हैं.

यहां के मुसलमानों का कहना है कि 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में जब भारतीय सेनाएं मीठी तक पहुंच गई थीं, तब उन्हें रातोंरात यहां से भागना पड़ा था. हालांकि बाद में यहां रहने वाले हिंदुओं ने उन्हें फिर से यहां रहने के लिए मनाया, उसके बाद फिर से वो लोग यहां साथ में रहने लगे.

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First published: 3 February 2019, 21:59 IST
 
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