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भारत की तैयारियों के जवाब में पाकिस्तान ने चीन से खरीदी 8 लड़ाकू पनडुब्बियां

सादिक़ नक़वी | Updated on: 4 September 2016, 8:05 IST
(गेट्टी इमेजेज)

उपमहाद्वीप में हथियारों की होड़ बढ़ाते हुए पाकिस्तान सरकार ने चीन से आठ डीजल इंजन वाली लड़ाकू पनडुब्बियां खरीदे जाने की योजना को स्वीकृत दे दी है. चीन के लिए यह सबसे बड़ा हथियार निर्यात माना जा रहा है. भारतीय रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि चीन का यह कदम भारत को परेशान करने के उद्देश्य से उठाया गया है विशेषकर अरब सागर में.

सह-नौसेनाध्यक्ष राजा के मेनन कहते हैं कि भारत को केन्द्र में रखते हुए ही इस योजनाबद्ध सौदे को अनुमति दी गई है. हालांकि भारत की नौसेना क्षमता पाकिस्तान की क्षमताओं की अपेक्षा बेहद उच्च किस्म की हैं, फोर्स में भी ज्यादा है. तो फिर पाकिस्तान की नौसेना इस सौदे पर ध्यान क्यों केंद्रित कर रही है? मेनन का मानना है कि यह समझौता हमें गंभीर रूप से प्रभावित करेगा.

पाकिस्तान के एक विशेषज्ञ कहते हैं कि इससे भारत की नौसेना को चुनौती देने के लिए उनके देश की क्षमताओं में वृद्धि होगी. हालांकि चीन की पनडुब्बियां समुद्री क्षेत्र में हथियारों को लेकर ज्यादा एडवांस्ड नहीं हो सकतीं. खबरों के अनुसार चार पनडुब्बियों की आपूर्ति 2023 में की जाएगी जबकि शेष चार पनडुब्बियों की आपूर्ति 2028 में होगी.

चीन-पाकिस्तान के बीच इस समझौते से पाकिस्तानी नौसेना की समुद्री क्षेत्र से परमाणु हथियारों को छोड़ने की क्षमताओं में इजाफा हो जाएगा. पाकिस्तान ने वर्ष 2012 में नेवल स्ट्रेटेजिक फोर्स कमान गठित की थी. इसके बाद से ही वह अपने इस ट्रायड के अस्तित्व का संकेत दे चुका है.

ताकतवर होते जाना

इस खरीद की पहली आधिकारिक पुष्टि करते हुए पाक सेना के अधिकारियों ने बताया कि इस योजना पर वर्ष 2011 से काम चल रहा था. पाकिस्तान की अगली पीढ़ी के पनडुब्बी कार्यक्रम के प्रमुख और वरिष्ठ नौसेना अधिकारियों ने चार से पांच अरब डॉलर के इस सौदे की रक्षा मामलों पर नेशनल एसेंबली की स्थायी समिति को 26 अगस्त को जानकारी दी है.

हालांकि, अभी सौदे पर दस्तखत होने के बारे में स्पष्ट नहीं हो सका है. खबरों के अनुसार चीन इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए कम ब्याज पर दीर्घकालीन कर्ज दे सकता है. चीन को पाकिस्तान का सुख-दुख का साथी भी कहा जाता है. यह माना जाता है कि चीन का यह सबसे बड़ा निर्यात सौदा है और पनडुब्बियों को एकसाथ बेचे जाने की सबसे बड़ी डील भी.

अभी इस बात की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हो सकती है कि पाकिस्‍तानी नौसेना को चीन किसी तरह की पनडुब्‍बियों की आपूर्ति करने वाला है. विश्लेषकों का अनुमान है कि यह पीपुल लिबरेशन आर्मी नेवी (पीएलएनएन) की यूआन श्रेणी की टाइप 039 और 041 लड़ाकू पनडुब्बियों का हल्का संस्करण हो सकता है.

पाकिस्तानी नौसेना वर्तमान में फ्रांस की पांच पनडुब्बियों को इस्तेमाल में ला रही है. इसमें 70 के दशक की दो अगस्टा जिसे 1979 और 1980 में खरीदा गया था और 90 के दशक में खरीदी गई वह तीन अगस्टा पनडुब्बियां भी है जिसे एयर इंडिपेंडेन्ट प्रोपल्शन प्रणाली से जोड़ा गया है. इन्हें 1999 के बाद कमीशन मिला था. इसके पहले फ्रांस ने पाकिस्तान को स्कार्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों को बेचे जाने से इसलिए इनकार कर दिया था कि वह इसी तरह की स्कार्पीन पनडुब्बियां भारत को बेच चुका है.

भारत इस बीच, डीजल पावर्ड 14 पनडुब्बियों और एक परमाणु क्षमता युक्त अकुला श्रेणी की पनडुब्बी को ऑपरेट कर रहा है. चीन अपने तटीय सीमा वाले देशों को रक्षा निर्यात में तेजी से वृद्धि कर रहा है. सिपरी की हाल की एक रिपोर्ट के अनुसार इसमें अधिकांश भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान (35 फीसदी), बांग्लादेश (20 फीसदी) और म्यांमार को (16 फीसदी) निर्यात किया गया है.

विदेशी मदद

इसके पहले अप्रैल में पाकिस्तान नौसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने घोषणा की थी कि कराची शिपयार्ड एवं इंजीनियरिंग वर्क्‍स (केएसईडब्ल्यू) ने चाइना शिपबिल्डिंग ट्रेडिंग कम्पनी (सीएसटीसी) की मदद से आठ पनडुब्बियों को बनाने का समझौता किया है. इसमें चार अभी बनाई जाएंगी और चार बाद में. इन सभी को एयर इंडिपेंडेन्ट प्रोपल्शन प्रणालियों से जोड़ा जाएगा.

दिलचस्प तो यह है कि मई 2015 में चीन की युआन श्रेणी की '335' पनडुब्बी ने कराची में एक हफ्ते का समय गुजारा था. इससे इन अटकलों को बल मिला था कि इस पनडुब्बी ने या तो पाक नेवी को प्रशिक्षित करने के लिए कराची बंदरगाह में प्रवेश किया अथवा अपनी मौजदूगी दिखाने के लिए किया था.

भारत भी, समुद्री नौकाओं की अपनी फ्लीट बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है. फ्रांस की कम्पनी डीसीएनएस ने भारतीय नेवी के लिए छह स्कार्पीन पनडुब्बियों को डिजायन किया है. इस श्रेणी की पहली पनडुब्बी के इसी साल के बाद भारतीय नेवी में शामिल किए जाने की उम्मीद है. पर इन पनडुब्बियों के दस्तावेजों की गोपनीय जानकारी लीक हो गई है. हालांकि मेनन का मानना है कि इस लीक से ज्य़ादा प्रभाव नहीं पड़ेगा. चीनी पनडुब्बियां इस लीक से लाभ उठाने में समर्थ नहीं हैं.

एक अन्य विशेषज्ञ का कहना है कि भारत को अपनी रक्षा खरीद योजनाओं के लिए नींद से जागने की जरूरत है. पूर्ववर्ती यूपीए सरकार में रक्षा मंत्री एके एंटनी के कार्यकाल से ही खरीद नीति पर संघर्ष जारी है.

First published: 4 September 2016, 8:05 IST
 
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