Home » इंटरनेशनल » Pakistan Senate passes landmark Hindu marriage bill: Pak media
 

ऐतिहासिक: पाकिस्तानी हिंदुओं को मिलेगा हक़, सीनेट में हिंदू मैरिज बिल पास

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 February 2017, 12:14 IST
(एएनआई)

पाकिस्तान में हिंदुओं की शादी को कानूनी दर्जा मिलने का रास्ता साफ़ हो गया है. पाकिस्तान की संसद के उच्च सदन सीनेट ने ऐतिहासिक हिंदू मैरिज बिल को पास कर दिया है. पाकिस्तानी संसद के निचले सदन नेशनल असेंबली ने बिल पर पिछले साल 26 सितंबर को ही मुहर लगा दी थी.  

69 साल के लंबे टाल-मटोल के बाद हिंदू मैरिज बिल नेशनल असेंबली में पिछले साल पेश हुआ था. इस बिल के कानून बनने के बाद पाकिस्तान में रह रहे अल्पसंख्यक हिंदुओं को अपनी शादी का रजिस्ट्रेशन कराने का हक़ मिल गया है. 

शादी के रजिस्ट्रेशन के लिए कानून

पाकिस्तान की 19 करोड़ की आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी 1.6 प्रतिशत है. 1947 में विभाजन के बाद पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं के पास कानूनी तौर पर ऐसा तरीका नहीं था जिससे वो अपनी शादी का रजिस्ट्रेशन करा सकें. हालांकि पाकिस्तान के एक अन्य अल्पसंख्यक समुदाय ईसाई लोगों के लिए शादी से जुड़ा 1879 का एक कानून है.

अभी तक अल्पसंख्यक हिंदुओं को रजिस्ट्रेशन के नाम पर शादी की तस्वीरों से काम चलाना पड़ता है. लॉ एंड जस्टिस की स्टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट पर बिल को पिछले साल पाक संसद में पेश किया गया था. 

पाक हिंदुओं का पहला पर्सनल लॉ

पाकिस्तान की सत्ताधारी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज बिल के समर्थन में है. पाकिस्तान के कानून मंत्री ज़ाहिद अहमद ने सीनेट में हिंदू मैरिज बिल को पेश किया, जिसे बिना किसी विरोध या आपत्ति के पास कर दिया गया. 

इससे पहले 2 जनवरी को मानवाधिकार पर पाक संसद के सीनेट की कार्यकारी कमिटी ने इसे बहुमत के साथ पास किया था. यह पाकिस्तानी हिंदुओं का पहला पर्सनल लॉ है, जो पंजाब, बलोचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में लागू होगा. सिंध में पहले से अलग हिंदू मैरिज लॉ है.

क्या है हिंदू मैरिज बिल?

नए बिल में हिंदुओं के लिए शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल रखी गई है. वहीं अन्य धर्मों में शादी के लिए लड़के की उम्र कम से कम 18 जबकि लड़की की उम्र 16 होनी चाहिए. इससे कम उम्र में शादी करने पर पाकिस्तान में छह महीने की जेल और पांच हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान है. 

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि अब तक पाकिस्तान में हिदुओं की शादियों का रजिस्ट्रेशन न होने के कारण उन्हें मान्यता नहीं थी, ऐसे में अक्सर हिंदू महिलाओं का अपहरण कर उनके बलात्कार और जबरन धर्म परिवर्तन की खबरें मिलती रहती थीं.

बिल में कहा गया है कि हिंदुओं की शादी पंडित करवाएंगे, लेकिन शादी का रजिस्ट्रेशन उसे रजिस्ट्रार के पास ही कराना होगा. स्टैंडिंग कमिटी ने शादी के लिए लड़के और लड़की की उम्र कम से कम 18 साल रखने पर सहमति दे दी है. शादी के बाद लड़का और लड़की चाहे तो आपसी सहमति से अलग हो सकते हैं, लेकिन उसके लिए अदालत से मंजूरी लेनी होगी. वहीं समझौता हो जाने की हालत में साथ रहने के लिए दोबारा शादी की जरूरत नहीं होगी.

First published: 18 February 2017, 12:14 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी