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पाकिस्तान को FATF से भी झटका, अभी ग्रे लिस्ट में ही रहेगा शामिल, फरवरी तक ये मापदंड करने होंगे पूरे

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 October 2020, 6:25 IST

Pakistan to remain in FATF's Gray list: आतंकी हरकतों (Terrorist Activities) के चलते पाकिस्तान (Pakistan) पर विभिन्न संगठन तमाम तरह की पाबंदियां लगा रहे हैं. इसी बीच फाइनेंशल एक्शन टास्क फोर्स (FATA) की ओर से एक बार फिर पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है. एफएटीएफ ने शुक्रवार शाम को जारी किए अपने एक बयान में कहा कि इमरान खान (Imran Khan) सरकार आतंकवाद के खिलाफ 27 सूत्रीय एजेंडे को पूरा करने में नाकाम रही है. संगठन ने कहा कि पाकिस्‍तान ने संयुक्‍त राष्‍ट्र (United Nation) के प्रतिबंधित आतंकवादियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है.

एफएटीएफ ने आगे कहा कि तय समय-सीमा में पाकिस्तान सरकार (Government of Pakistan) ने 27 कार्ययोजनाओं में से केवल 21 को ही पूरा किया है. इसके साथ ही एफएटीएफ ने पाकिस्‍तान से सख्त लहजे में कहा कि वह फरवरी 2021 तक सभी कार्ययोजनाओं को पूरा करे. एफएटीएफ के अध्यक्ष (FATF President) मार्कस प्लीयर ने कहा कि पाकिस्तान को आतंक के वित्तपोषण में शामिल लोगों पर प्रतिबंध लगाना चाहिए साथ ही इन पर मुकदमा चलाना चाहिए. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को आतंकवाद का वित्तपोषण रोकने के लिए और कोशिश करने की जरूरत है.


बता दें कि जून 2018 में एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्‍ट में डाला था. उस समय पाकिस्‍तान को धन शोधन और आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने की 27 प्‍वाइंट्स की कार्य योजना को 2019 के अंत तक लागू करने का आदेश दिया गया था. हालांकि कोरोना वायरस को देखते हुए समय सीमा को बढ़ा दिया गया था. लेकिन तय वक्त में पाकिस्तान सिर्फ 21 प्वाइंट्स पर ही काम कर सका और छह प्वाइंट्स बच गए. पाकिस्तान ने जिन छह कार्यों को पूरा नहीं किया है उनमें जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर और लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज सईद के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल होना भी शामिल है.

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पिछले तीन दिनों में एफएटीएफ का डिजिटल पूर्ण सत्र आयोजित हुआ जिसमें फैसला लिया गया कि पाकिस्तान उसकी ग्रे लिस्ट में बना रहेगा. पाकिस्तान के खिलाफ ये फैसला मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी फंडिंग के खिलाफ लड़ाई में वैश्विक प्रतिबद्धताओं और मापदंडों को पूरा ने करने वाली व्यापक समीक्षा के बाद लिया गया है. एफएटीएफ के अध्यक्ष मार्कस प्लीयर ने पेरिस से एक ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन में कहा, "पाकिस्तान निगरानी सूची या ग्रे सूची में बना रहेगा."

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सूत्रों के मुताबिक, इसके अलावा एफएटीएफ ने इस बात को भी ध्यान में रखा कि आतंकवाद विरोधी अधिनियम की अनुसूची चार के तहत उसकी आधिकारिक सूची से अचानक से चार हजार से अधिक आतंकवादियों के नाम गायब हो गए है. अब अगले साल फरवरी में होने वाली एफएटीएफ की अगली बैठक में पाकिस्तान की स्थिति की समीक्षा की जाएगी. साथ ही एफएटीएफ की इस कार्रवाई से ये साफ हो जाता है कि पाकिस्तान सबकी आंखों में धूल झोंककर अपने दामन से आतंकवाद का दाग नहीं छुड़ा सकता. उसे आतंकवाद के खिलाफ सच में कार्रवाई करनी होगी.

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फाइनेंशल एक्शन टास्क फोर्स ने कहा कि पाकिस्तान को 1267 और 1373 के तहत नामित आतंकवादियों और इनके लिए काम करने वालों पर प्रभावी वित्तीय प्रतिबंध लगाना चाहिए. साथ ही ये किसी तरह धन एकत्रित ना कर सकें. इनकी संपत्तियों की पहचान करके उन्हें जब्त किया जाना चाहिए.

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हालांकि, पाकिस्तान मामलों के जानकारों का कहना है कि पड़ोसी मुल्क के लिए इन छह उपायों पर काम करना काफी मुश्किल है. पाकिस्तान के पास दो ही रास्ते हैं या तो वह आतंकवाद की राह छोड़े या फिर एफएटीएफ की ओर से काली सूची में डाले जाने को तैयार रहे. उसके लिए ये दोनों ही विकल्प बेहद मुश्किल हैं. आतंकवाद पाकिस्तान की स्टेट पॉलिसी है और वर्षों से उसने इसका हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है, ऐसे में वह दहशतगर्दी से पूरी तरह से नाता तोड़ ले यह काफी कठिन है और यदि उसने ऐसा नहीं किया तो काली सूची में डाल दिया जाएगा, जिससे पहले से ही आर्थिक रूप से बदहाल पाकिस्तान एक-एक पैसे को मोहताज हो जाएगा.

First published: 24 October 2020, 6:26 IST
 
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