Home » इंटरनेशनल » Panama case verdict: PM Nawaz Sharif disqualifies by Pakistan Supreme Court
 

पनामा गेट में नवाज़ पर गाज, पीएम पद से दिया इस्तीफ़ा

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 July 2017, 15:18 IST
फाइल फोटो

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ पर पनामा गेट कांड में गाज गिरी है. पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें दोषी करार दिया है. जिसके बाद उनकी प्रधानमंत्री पद से छुट्टी हो गई है. पांच जजों की बेंच ने सर्वसम्मति (5-0) से नवाज़ शरीफ़ को दोषी ठहराया है. 

फैसला आने के बाद नवाज़ शरीफ़ ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. सुप्रीम कोर्ट के जजों की बेंच ने अपने आदेश में कहा कि नवाज के ख़िलाफ़ मुकदमा चलाया जाना चाहिए. फैसला आने से पहले ही इस्लामाबाद में सुप्रीम कोर्ट परिसर के आस-पास कड़े सुरक्षा इंतज़ाम किए गए.

सुप्रीम कोर्ट ने इसके अलावा नवाज की बेटी मरियम नवाज़ और उनके दो बेटों हसन नवाज़ और हुसैन नवाज़ को भी मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में दोषी करार दिया है. इसके साथ ही नवाज़ शरीफ़ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की कुर्सी से बेदखल हो गए हैं.  

20 अप्रैल को SIT को मिली थी जांच

इससे पहले 20 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने प्रधानमंत्री नवाज शरीफ़ के खिलाफ इस मामले में जांच का आदेश दिया था. संयुक्त जांच टीम को दो महीने में जांच पूरी करने का आदेश देते हुए सुप्रीम कोर्ट के दो जजों ने उस वक्त नवाज़ शरीफ़ को पीएम पद के अयोग्य बताया था.

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों ने कहा कि इस मामले में अभी और जांच की जरूरत है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ज्वाइंट इंवेस्टीगेशन टीम ने कतर में पैसा भेजने के आरोपों की भी तफ्तीश की. 

अप्रैल 2016 में पनामा पेपर्स का खुलासा

पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियों तहरीक-ए-इंसाफ, जमात-ए-इस्लामी, आवामी मुस्लिम लीग ने नवाज शरीफ के खिलाफ याचिका दाखिल की थी. पिछले साल अप्रैल में पनामा पेपर्स मामले का खुलासा होने से पाकिस्तान की राजनीति में हड़कंप मच गया था.

बचाव और अभियोजन पक्ष की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 23 फरवरी को फैसला सुरक्षित रखा था. सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की बेंच के मुखिया जस्टिस आसिफ सईद खोसा ने इस केस की सुनवाई की थी. इस बेंच के अन्य सदस्य जस्टिस एजाज अफजल, जस्टिस गुलजार अहमद, जस्टिस शेख अजमत सईद और जस्टिस एजाज उल हसन हैं.

नवाज आजीवन अयोग्य करार

पांच जजों की बेंच ने फैसले में कहा कि शरीफ संसद और अदालत के प्रति ईमानदार नहीं रहे और वह प्रधानमंत्री पद पर बने रहने के योग्य नहीं हैं. अटॉर्नी जनरल ने कहा कि पीठ ने शरीफ को जीवन भर के लिए अयोग्य करार दिया है.

कार्यान्वयन पीठ के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एजाज अफजल खान ने कहा कि संयुक्त जांच दल (जेआईटी) द्वारा इकट्ठा किए गए सभी सबूतों को छह हफ्ते के भीतर एक जवाबदेही अदालत के पास भेजा जाएगा.

उन्होंने कहा कि मरियम नवाज (शरीफ की बेटी), कप्तान मुहम्मद सफदर (मरियम के पति), हसन और हुसैन नवाज़ के साथ-साथ प्रधानमंत्री शरीफ के खिलाफ मामलों पर कार्रवाई होनी चाहिए और 30 दिनों के भीतर कोई फैसला सुनाया जाएगा.

न्यायमूर्ति आसिफ सईद खोसा की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस्लामाबाद स्थित सुप्रीम कोर्ट की अदालत संख्या-1 में फैसला सुनाया. अदालत ने राष्ट्रपति ममनून हुसैन से अपील की है कि वह देश के मामलों का प्रभार अपने हाथों में ले लें.

यह तीसरी बार है, जब नवाज शरीफ अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए हैं. फिलहाल यह साफ़ नहीं है कि 2018 में होने वाले अगले आम चुनाव तक इस पद पर किसे नियुक्त किया जाएगा. बेंच ने वित्तमंत्री इशाक डार और नेशनल एसेम्बली के सदस्य कप्तान सफदर को भी पद के अयोग्य घोषित कर दिया.

क्या था पूरा मामला?

पनामा पेपर्स लीक से जानकारी मिली थी कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के बेटों के स्वामित्व वाली कुछ कंपनियां हैं जो बाहरी मुल्कों में कारोबार कर रही हैं, जिनका लेन-देन लाखों डॉलर में है. हालांकि पनामा पेपर्स में उनके नाम का जिक्र नहीं है.

  • 1990 के दशक में नवाज शरीफ पर मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए लंदन में संपत्ति खरीदने का आरोप है. 
  • नवाज शरीफ और उनके परिवार पर गैर-कानूनी तरीके से विदेशों में पैसे भेजने का आरोप है. 
  • आरोप है कि ब्रिटेन में फर्जी कंपनियां बनाकर विदेश में करोड़ों डॉलर की प्रॉपर्टी बनाई गई. 
  • अमेरिका के खोजी पत्रकारों के महासंघ ने पनामा पेपर्स लीक का खुलासा अप्रैल 2016 में किया. 
  • पनामा की लॉ फर्म के 1.15 करोड़ टैक्स डॉक्युमेंट्स लीक होने के बाद पर्दाफाश. 
  • ये दस्तावेज पनामा की कंपनी मोसाक फोंसेका के थे, जिसको जर्मन अखबार में छापा गया. 
  • पनामा पेपर्स लीक में दुनिया भर के 140 राजनेताओं और अरबपतियों की छिपी संपत्ति का खुलासा. 
  • नवाज़ शरीफ़ की कथित संपत्ति के मामले का ख़ुलासा भी पनामा पेपर्स के जरिए हुआ.
First published: 28 July 2017, 12:58 IST
 
अगली कहानी