Home » इंटरनेशनल » Panama Papers Source Breaks Silence
 

पनामा पेपर्स के व्हिसलब्लोअर्स ने तोड़ी चुप्पी

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 May 2016, 8:28 IST
QUICK PILL
  • ब्रिटेन के अखबार द गार्डियन से बातचीत कर पनामा पेपर्स लीक के व्हिसल ब्लोअर ने शुक्रवार को अपनी चुप्पी तोड़ी थी. उन्होंने कहा कि विदेश में रखे काले धन ने उन्हें यह भंडाफोड़ करने पर मजबूर किया.
  • ब्रिटिश अखबार द गार्डियन ने पनामा लीक के व्हिसल ब्लोअर्स के बारे में प्रकाशित किया है लेकिन अखबार ने उनकी पहचान और लिंग के बारे में कोई खुलासा नहीं किया है.

पनामा पेपर्स लीक में व्हिसल ब्लोअर ने शुक्रवार को अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि कैसे विदेश में रखे काले धन ने उन्हें इतिहास का सबसे बड़ा भंडाफोड़ करने पर मजबूर किया. पनामा पेपर्स लीक  करने वाले इस व्यक्ति की पहचान और उसके जेंडर का खुलासा नहीं किया गया है. 

उन्होंने कहा, 'मैं आपको इतना बता सकता हूं कि मैं किसी सरकार या खुफिया एजेंसी के लिए काम नहीं करता. न तो सीधे रूप से मेरा कोई उनसे संबंध है और नहीं मैं उनके लिए ठेके पर काम करता हूं. मेरे काम के पीछे सिर्फ मैं ही हूं.' 

व्हिसल ब्लोअर ने कहा कि कि पनामा की कंपनी मोसेक फोंसेका के लीक हुए 1.15 करोड़ दस्तावेजों ने दुनिया में नई बहस छेड़ी है जो उत्साहित करने वाली है. मैं इसके लिए गार्डियन समेेत इंटरनेशनल कंसोर्सियम ऑफ न्यूजपेपर्स का शुक्रिया अदा करता हूं.

सूत्र ने लिखा, 'शेल कंपनियां अक्सर टैक्स बचाने के गुनाह में शामिल होती है. लेकिन पनामा पेपर्स बताता है कि भले ही शेल कंपनियां अवैध नहीं हो लेकिन इसका इस्तेमाल कई अपराधों को छिपाने के लिए किया गया.' उन्होंने कहा, 'आय में असमानता हमारे समय की सबसे बड़ी समस्या है.'

उन्होंने कहा, 'मौजूदा मीडिया ने अभी तक केवल स्कैंडल पर फोकस किया है. स्कैंडल में उन पहलुओं पर जिसकी अनुमति है और जो कानूनी तौर पर वैध है. लेकिन जिसकी अनुमति दी गई वह स्कैंडल है और इसे निश्चित तौर पर बदला जाना चाहिए.'

पनामा लीक से पहले कैमरन ने एंटी करप्शन समिट की घोषणा की थी. सूत्र ने कहा कि कंजरवेटिव दरअसल इस मामले में पूरी तरह 'बेशर्म हो चुके हैं.' कैमरन को पिछले महीने यह कहने के लिए मजबूर होना पड़ा कि ब्लेयमोर में उनके शेयर थे. ब्लेयरमोर उनकी पिता की विदेशी निवेश कंपनी थी.  समिट में करीब 40 से अधिक देशों के भाग लेने की उम्मीद है.

पनामा पेपर्स लीक के दस्तावेजों की पड़ताल इंटरनेशनल कंसोर्सिशयम ऑफ इनवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स के पत्रकारों ने की थी

पनामा पेपर्स का खुलासा करने वाला सूत्र पिछले साल बास्तिया ओबेरमेयर के संपर्क में था. ओबेरमेयर जर्मनी के समाचार पत्र के खोजी पत्रकार सॉडी जेटनुग के संपर्क में था. उन्होंने जॉन डी के फर्जी नाम का इस्तेमाल करते हुए संदेश भेजा, 'क्या आपको खुफिया दस्तावेजों में दिलचस्पी है?'

सूत्र ने सॉडी को मोजेक फोंसेका के आंतरिक डाटाबेस से लीक हुई जानकारी मुहैया कराई. दस्तावेजों में विदेशी कंपनियों के मालिकों, पासपोर्ट के विवरण और ईमेल्स थे. न्यूजपेपर ने इन सभी दस्तावेजों को इंटरनेशनल कंसोर्सियम ऑफ इनवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स के साथ साझा कर दिया. 

ऐतिहासिक साझेदारी के तहत आईसीआईजी ने इन सभी दस्तावेजों को 100 से ज्यादा मीडिया संगठनों के साथ साझा किया. फिर इन मीडिया संगठनों ने करीब एक साल से अधिक समय तक इन दस्तावेजों की पड़ताल की.

लीक हुए पेपर्स को पिछले महीने सभी अखबार प्रकाशित कर चुके हैं. इसके बाद अब सुरक्षा एजेंसियों ने इन फाइलों का विवरण मांगा है. आईसीआईजे ने इस मामले में मदद करने से मना कर दिया. सूत्र ने कहा, 'हालांकि मैं हर संभव रक्षा एजेंसियों की मदद करना चाहूंगा.'

सूत्र ने कहा कि उन्होंने शुरुआत में कई बड़े मीडिया समूह को दस्तावेज दिए थे. 'संपादकों ने इन दस्तावेजों की समीक्षा की लेकिन उन्होंने इसे कवर करने से मना कर दिया.' हालांकि यह अभी तक साफ नहीं हो पाया है कि किस मीडिया संगठन ने दस्तावेजों को छापने से मना कर दिया था.

बाद में व्हिसलब्लोअर ने एक बार फिर से विकीलीक्स से संपर्क किया. उन्होंने कहा, 'यहां तक विकीलीक्स ने भी इसका जवाब नहीं दिया. मीडिया पूरी तरह विफल रही.' 

सूत्र ने बताया कि पनामा की कंपनी का आधे से अधिक काम ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड से जुड़ा हुआ है. बीवीआई पूरी तरह से ब्रिटेन के क्षेत्राधिकार में आता है.

सूत्र ने सरकार के रवैये की भी आलोचना की. उन्होंने कहा कि इस मामले में ब्रिटिश सरकार ने एडवर्ड स्नोडेन की तरह बर्ताव करने की कोशिश  की.  

स्नोडेन ने 2013 में इस बात का खुलासा किया था कि कैसे अमेरिका और ब्रिटेन ने लगातार अपने नागरिकों की निगरानी की. ओबामा प्रशासन के स्नोेडेन के खिलाफ जासूसी का मामला बनाया और फिलहाल वह मॉस्को में फंसे हुए हैं.

सूत्र ने कहा, 'एनएसए के बारे में किए गए खुलासे के बाद स्नोडेन को नायक की तरह देखा जाना चाहिए. उन्हें पुरस्कार देना चाहिए न कि उन्हें सजा दी जानी चाहिए.'

पनामा लीक में पनामा की कंपनी मोजेक फोंसेका के वित्तीय दस्तावेज लीक हुए थे जिसमें विदेशों में जमा धन के बारे में जिक्र था

अन्य व्हिसलब्लोअर्स मसलन एंटनी डेल्टो को पहले सजा भी मिल चुकी है. डेल्टो के खिलाफ फिलहाल मुकदमा चल रहा है. उन्होंने कहा कि कुछ सकारात्मक कदम के बावजूद ब्रिटिश सरकार को और अधिक कदम उठाने की जरूरत है. उन्होंने कहा, 'ब्रिटेन को अपने अधीन आने वाले क्षेत्रों में वित्तीय गोपनीयता को खत्म करने के लिए और अधिक कदम उठाने की जरूरत है.' 

सूत्र ने कहा कि आज के कम खर्च वाले और अनियंत्रित डिजिटल स्टोरेज के युग में सीमाओं का कोई मतलब नहीं रह गया है. अगली क्रांति डिजिटल होगी. या फिर कहें कि इसकी शुरुआत हो चुकी है.

First published: 9 May 2016, 8:28 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी