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पाकिस्तान से छिन सकता है 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' का दर्जा, पीएम मोदी ने बुलाई बैठक

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 September 2016, 12:18 IST
(फाइल फोटो)

उरी हमले के बाद पाकिस्तान को भारत किसी सूरत में बख्शने के मूड में नहीं है. सोमवार को पीएम मोदी ने 56 साल पुराने सिंधु समझौते की समीक्षा के लिए बैठक बुलाई थी. अब पाकिस्तान को एमएफएन (मोस्ट फेवर्ड नेशन) दर्जे के मुद्दे पर भी पीएम मोदी ने अहम बैठक बुलाई है. 

भारत ने पाकिस्तान को एमएफएन स्टेटस दिया हुआ है. इसकी समीक्षा के लिए पीएम मोदी ने 29 सितंबर को बैठक बुलाई है. इस अहम बैठक में विदेश मंत्रालय के अलावा वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी भी शिरकत करेंगे.

इससे पहले सोमवार को सिंधु जल समझौते पर पीएम मोदी ने एक बैठक की. सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान पीएम मोदी ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते.

क्या है एमएफएन स्टेटस?

डब्ल्यूटीओ (वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन) और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों को लेकर एमएफएन (मोस्ट फेवर्ड नेशन) स्टेटस दिया जाता है. एमएफएन दर्जा दिए जाने पर दूसरा देश इस बात को लेकर आश्वस्त रहता है कि उसे व्यापार में नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा.

भारत ने 1996 में पाकिस्तान को एमएफएन का दर्जा दिया था. इसकी वजह से पाकिस्तान को ज्यादा आयात कोटा और कम ट्रेड टैरिफ मिलता है. गौर करने वाली बात यह है कि बदले में पाकिस्तान ने आश्वासन देने के बावजूद भारत को अब तक एमएफएन दर्जा नहीं दिया है.

पाक को अलग-थलग करने के निर्देश

उरी में 18 सितंबर को हुए हमले के बाद भारत में लगातार पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज है. पीएम मोदी ने कूटनीतिक स्तर पर पाक को अलग-थलग करने के निर्देश दिए हैं. इसकी नजीर सोमवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के भाषण में दिखी.

सुषमा ने कहा कि जो देश आतंकवाद को पालते-पोसते हैं और साथ ही उसका निर्यात करते हैं, ऐसे देशों को आतंकवादक के खिलाफ लड़ाई में अलग-थलग कर देना चाहिए. बिना नाम लिए सुषमा ने यह इशारा सीधे तौर पर पाकिस्तान के खिलाफ किया.

अब एमएफएन दर्जे की समीक्षा भी पीएम के इसी निर्देश के तहत होने वाली है. भारत सरकार के ये फैसले पाकिस्तान की मुश्किल बढ़ा सकते हैं. पाकिस्तान की आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर इसका विपरीत असर पड़ सकता है.

केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री अर्जुनराम मेघवाल पहले ही कह चुके हैं कि सरकार के पास एमएफएन पर विचार करने का प्रस्ताव पहले से ही है.

First published: 27 September 2016, 12:18 IST
 
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