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मोदी: 1971 में भारत की दिखाई इंसानियत पिछली सदी की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 April 2017, 17:27 IST
(ट्विटर)

पीएम नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत दौरे के बीच 1971 के मुक्ति संग्राम पर भी अपने विचार रखे. दिल्ली के सैम मानेकशॉ सेंटर में पीएम मोदी और शेख हसीना ने 1971 में पाकिस्तान से हुई जंग में शहादत देने वाले भारतीय सैनिकों के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया. इस दौरान पीएम मोदी ने इशारों-इशारों में पाकिस्तान पर भी निशाना साधा. एक नज़र पीएम मोदी के संबोधन की कुछ बड़ी बातों पर: 

  • आज एक विशेष दिन है. आज भारत तथा बांग्लादेश के शहीदों के प्राण बलिदान को स्मरण करने का दिन है.
  • आज का दिन ऐतिहासिक है. बांग्लादेश स्वतंत्रता संग्राम में शहीद हुए सभी भारतीय सैनिकों के परिवारों के लिए ये कभी न भूल पाने वाला क्षण है.
  • यह मेरा परम सौभाग्य है कि इस समय 7 भारतीय शहीदों के परिवार यहां उपस्थित हैं.
  • भारतीय सैनिकों के बलिदानों के लिए मैं और पूरा देश सभी शहीदों को कोटि-कोटि नमन करते हैं.
  • बांग्लादेश का जन्म जहां एक नयी आशा का उदय था. वहीं 1971 का इतिहास हमें कई अत्यंत दर्दनाक पलों की भी याद दिलाता है.
  • बांग्लादेश की जन्मगाथा असीम बलिदानों की गाथा है.
  • मुक्तियोद्धाओं के साथ-साथ बांग्लादेश के लिए किए गए भारतीय फौज का संघर्ष और बलिदान को भी कोई नहीं भुला सकता.
  • ऐसा करने में उनकी एक मात्र प्रेरणा थी, बांग्लादेश की जनता के प्रति उनका प्रेम, और बांग्लादेश के लोगों के सपनों के प्रति उनका सम्मान.
  • 1971 में भारत की दिखाई ये इंसानियत पिछली शताब्दी की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक है.
  • मेरा यह स्पष्ट मत है कि मेरे देश के साथ ही भारत का हर पड़ोसी देश प्रगति के मार्ग पर अग्रसर हो.
  • स्वार्थी न बनकर हमने पूरे क्षेत्र का भला चाहा है, लेकिन दुःख की बात है कि इन दो विचारधाराओं के विपरीत भी दक्षिण एशिया में एक मानसिकता है.
  • भारत और बांग्लादेश की विकास की विचारधाराओं के विपरीत दक्षिण एशिया में एक मानसिकता आतंकवाद की प्रेरणा तथा उसकी पोषक है.
  • ऐसी सोच जिस का वैल्यू सिस्टम मानवता पर नहीं, अपितु हिंसा, अतिवाद तथा आतंक पर आधारित है.
  • भारत-बांग्लादेश संबंध ना सरकारों के मोहताज हैं और ना ही सत्ता के.
  • भारत और बांग्लादेश इसलिए साथ हैं, क्योंकि दोनों देशों के 140 करोड़ लोग साथ हैं. हम दुःख-सुख के साथी हैं. 
First published: 8 April 2017, 17:17 IST
 
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