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नेपाल में राजनीतिक घमासान, विवादित नक्शा पास करने के बाद चीन से की वर्चुअल मीटिंग

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 June 2020, 9:28 IST

बीते दिनों नेपाल ने उस विवादित नक़्शे को अपनी संसद में पास करवा लिया, जिसमें भारत के तीन क्षेत्रों को अपना बताया गया है. इस बीच शुक्रवार को नेपाल और चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टियों ने एक वर्चुअल मीटिंग की. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस मीटिंग में दोनों देशों के राजनीतिक घटनाक्रम पर चर्चा की गई. यह मीटिंग ऐसे समय में हुई है जब भारत के दोनों देशों के साथ संबंध तनाव में हैं और लद्दाख में भारतीय और चीनी सेना आपस में भिड़ गई हैं.

नेपाल की मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कई नेपाली नेताओं ने इस मीटिंग पर सवाल उठाये हैं. नेपाली नेताओं का कहना है कि भारत और चीन के बीच जारी सीमा विवाद और कालापानी, लिपुलेख एवं लिंपियाधुरा को लेकर नई दिल्ली और काठमांडू के बीच पैदा तनाव के बीच यह बैठक आवश्यक नहीं थी. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस मीटिंग से पूर्व प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल, जो पार्टी के अंतर्राष्ट्रीय प्रभाग के प्रमुख भी हैं, और झलनाथ खनाल चार घंटे की इस मीटिंग से दूर रहे.


 

NCP के सह-अध्यक्ष पुष्प कमल दहल प्रचंड और 30 केंद्रीय नेताओं को काठमांडू में पार्टी कार्यालय में उपस्थित होने के लिए कहा गया था. प्रांतों के 70 प्रतिनिधियों को राजधानी में निर्दिष्ट स्थानों पर बैठाया गया था. विवादित नक्शे को संसद में पास करवाने के बाद नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली मुश्किल में पड़ते दिख रहे हैं क्योंकि उनकी कम्युनिस्ट पार्टी में ही विरोध के सुर उठने लगे हैं.

कई पार्टी नेताओं का कहना है कि वह एकतरफा सरकार चला रहे हैं. नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के केंद्रीय समिति के सदस्य हेमराज भंडारी का कहना है कि पीएम केपी शर्मा ने फिर से सरकार को एकतरफा चलाने की आदत को शुरू कर दी है. एक अन्य सांसद राम कुमारी झाकरी ने कहा कि ओली नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की पार्टी की बैठकों से बचते रहे हैं क्योंकि वह पार्टी नेताओं का सामना नहीं कर पा रहे हैं. उन्होंने कहा ''23 जून को स्थायी समिति की बैठक बुलाई गई है, लेकिन हमें विश्वास नहीं है कि वह बैठक आयोजित होगी''.

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First published: 20 June 2020, 9:12 IST
 
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