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पोप फ्रांसिस: हमें समलैंगिक समुदाय से माफी मांगनी चाहिए

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:49 IST
(एजेंसी)

ईसाई समुदाय के धर्मगुरु पोप फ्रांसिस ने कहा है कि समलैंगिकों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया जाता रहा है, उसके लिए ईसाइयों और रोमन कैथोलिक चर्चों को माफी मांगनी चाहिए.

अर्मेनिया से रोम वापस गए पोप से जब पूछा गया था कि क्या वे जर्मनी के कार्डिनल रीनहार्ड मार्क्स की इस टिप्पणी से सहमत हैं कि जिस तरह का व्यवहार चर्च ने समलैंगिक समुदाय के साथ किया है, उसके लिए उसे इस समुदाय से माफी मांगनी चाहिए.

सवाल के जवाब में पोप ने कहा, "हम ईसाइयों को सिर्फ समलैंगिक लोगों के साथ व्यवहार के लिए ही नहीं, बल्कि कई चीजों के लिए खेद व्यक्त करना चाहिए. हमें बिल्कुल माफी मांगनी चाहिए."

पोप ने कहा, "सवाल यह है कि यदि कोई ऐसा व्यक्ति उस स्थिति में है, जिसकी नीयत नेक है और जो ईश्वर में यकीन रखता है, तो फिर हम कौन होते हैं उस पर फैसला लेने वाले?"

पोप ने समलैंगिकता के बारे में पहले बोले जा चुके अपने मशहूर कथन ‘मैं कौन होता हूं फैसला करने वाला?’ को दोहराया.

उनकी यह टिप्पणी उन संकेतों में से एक थी कि पोप फ्रांसिस के नेतृत्व में वेटिकन समलैंगिक समुदाय के प्रति ज्यादा मैत्रीपूर्ण रवैया अपनाएगा.

हालांकि इसके लिए चर्च के ज्यादातर कंजर्वेटिव सदस्यों ने पोप की आलोचना भी की. फ्रांसिस ने उन लोगों से भी माफी मांगी, जिन्हें कई जगहों पर भेदभाव का सामना करना पड़ा है.

उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि चर्च को सिर्फ उन समलैंगिकों से ही माफी नहीं मांगनी चाहिए, जिसे उसने अपमानित किया है, बल्कि चर्च को उन गरीबों और महिलाओं से भी माफी मांगनी चाहिए, जिनका शोषण हुआ है. यही नहीं चर्च उन बच्चों से भी माफी मांगे, जिन्हें बचपन में काम के लिए विवश होना पड़ता है."

गौरतलब है कि पोप की यह टिप्पणी अमेरिका के ऑरलैंडो में हुए जनसंहार के महज दो हफ्ते बाद आई है. ऑरलैंडो में समलैंगिक लोगों के क्लब में उमर मतीन नाम के सिरफिरे की गोलीबारी में 49 लोग मारे गए थे.

समलैंगिक नाइट क्लब पर हमले के बाद पोप ने घटना पर टिप्पणी देते हुए उसे हिंसक मूर्खता और चेतनाशून्य घृणा करार दिया था.

First published: 27 June 2016, 2:38 IST
 
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