Home » इंटरनेशनल » prime minister modi: indian diaspora asks un to address challenge by terrorism
 

नरेन्द्र मोदी: यूएन को पता नहीं कि आतंकवाद क्या होता है

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:50 IST

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए संयुक्त राष्ट्र को सचेत किया कि जल्दी ही आतंकवाद जैसी नये युग की घातक चुनौतियों का समाधान नहीं किया गया तो इस तरह की वैश्विक संस्था अप्रासंगिक होने की संभावना है.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह बड़े दुर्भाग्य की बात है कि संयुक्त राष्ट्र को अभी भी पता नहीं है कि आतंकवाद क्या होता है और कैसे इस संकट से निकला जाए. मोदी ने कहा कि आतंकवाद नये युग की नई चुनौती है, मानवता को चुनौती है और उसको आंकने में भी विश्व का इतना बड़ा संगठन अपना दायित्व नहीं निभा पा रहा है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने सालों से संयुक्त राष्ट्र से आग्रह किया कि आप एक प्रस्ताव पारित करें और उसमें परिभाषित करें कि कौन आतंकवादी है, कौन आतंकवादी देश है, कौन आतंकवादियों की मदद करते हैं, कौन आतंकवादियों का समर्थन करते हैं, कौन सी बाते हैं जो आतंकवाद को बढ़ावा देती हैं.

मोदी ने कहा कि एक बार यह बातें ‘ब्लैक एंड व्हाइट’ में आ जायेंगी तो लोग आतंकवाद से जुड़ने से डरना शुरू करेंगे, उससे हटने का प्रयास करेंगे. मोदी ने कहा कि मैं नहीं जानता कि संयुक्त राष्ट्र कब करेगा, कैसे करेगा लेकिन जिस तरह के हालात बन रहे हैं, अगर इन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो यूएन के अप्रसांगिक होते देर नहीं लगेगी.

अगर समय के साथ चलना है, चुनौतियों को समझना है और 21वीं सदी को सुख, शांति और चैन की जिंदगी जीने के लिए तैयार करना है तो विश्व नेतृत्व को भी जिम्मेवारियां उठानी पड़ेगी और जितनी देर करेंगे, उतना ज्यादा नुकसान होने वाला है.

आतंकवाद के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र की आलोचना करते हुए मोदी ने कहा कि देश का दुर्भाग्य देखिए, दुनिया का दुर्भाग्य देखिए, मानवता का दुर्भाग्य देखिए… युद्ध क्या होता है, युद्ध में किसे क्या करना चाहिए, युद्ध से क्यों संकट होते हैं, युद्ध को रोकने के क्या तरीके होते हैं, संयुक्त राष्ट्र के पास जाइये सब चीजें लिखी, पढ़ी मिलेंगी. लेकिन आतंकवाद के लिए पूछो तो अभी भी संयुक्त राष्ट्र को भी नहीं पता कि आतंकवाद क्या होता है और कैसे वहां पहुंचा जाए और कैसे निकला जाए.

प्रधानमंत्री ने कहा कि क्योंकि संयुक्त राष्ट्र का जन्म युद्ध की भयावहता के बीच से हुआ. यही वजह है कि वह युद्ध के दायरे के बाहर सोच नहीं पा रहा है. आतंकवाद नये युग की नयी चुनौती है, मानवता को चुनौती है और उसको आंकने में भी विश्व का इतना बड़ा संगठन अपना दायित्व नहीं निभा पा रहा है.

First published: 31 March 2016, 7:53 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी