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भारत की नोटबंदी, नेपाल की मुसीबत, तराई में फैली अव्यवस्था

हरि बंश झा | Updated on: 11 February 2017, 5:46 IST
(नरेंद्र नानू/एएफ़पी फोटो)
QUICK PILL
  • नेपाल के तराई और पहाड़ी इलाक़ों में भारतीय करेंसी बेधड़क चलती है लेकिन नोटबंदी के बाद वहां भी इस मुद्रा को तय समय के भीतर वापस लेने की चुनौती बनी हुई है. 
  • एक समस्या यह भी है कि तस्कर अपने पुराने भारतीय नोटों को नेपाली करेंसी में बदलने की कोशिश कर रहे हैं.

बीते 8 नवम्बर को भारत सरकार के 500 और 1000 रुपए के नोटबंदी के फैसले का असर इतना व्यापक था कि देश में चल रहे 16,415 खरब की कीमत के 86.4 प्रतिशत कीमत के नोट बेकार हो गए. पूर्व प्रधानमंत्री व प्रख्यात अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह ने अनुमान लगाया कि नोटबंदी से देश की आर्थिक विकास दर 2 फीसदी गिर जाएगी. भारतीय अर्थव्यवस्था का हर क्षेत्र नोटबंदी से त्रस्त है.

पड़ोसी देश नेपाल और भूटान भी भारतीय करेंसी के पुराने नोट बंद होने से प्रभावित हुए हैं. नेपाल के तराई क्षेत्र में सीमा पार से भारत के साथ व्यापार करने वाले लोगों पर भी इसका बुरा असर पड़ा है. 

सीमा पार से

नेपाल के सेंट्रल बैंक, नेपाल राष्ट्र बैंक ने घोषणा की कि नेपाल में 3.6 करोड़ की कीमत वाले 500 और 1000 रूपए के नोट हैं लेकिन अनाधिकारिक तौर पर मोटे अनुमान के मुताबिक नेपाल में 10 खरब कीमत के पुराने भारतीय नोट हैं. अब तक भारत में काम कर रहे नेपाली जब कभी भी नेपाल जाते तो उनके पास 500 या 1000 के नोट होते थे, इसीलिए देश में बंद हो चुके नोट होने की संभावना है. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2014 में नेपाल यात्रा से पहले ये नोट कई साल तक नेपाल में बंद थे लेकिन मोदी के नेपाल दौरे के बाद भारत से नेपाल जा रहे नेपाली नागरिकों को 500 और 1000 रुपए की करेंसी में एक बार में 25,000 रुपए ले जाने की अनुमति दे दी गई. इससे मधेसियों सहित कई नेपाली भारी मात्रा में 500 और 1000 रुपए के नोट लेकर नेपाल जाते.

दरअसल नेपालियों का खयाल था कि देश में ऐसे नोटों की काफी कमी है. आधिकारिक तौर पर भारत के 100 रुपए के नोट की कीमत नेपाल में 160 रुपए है. लेकिन अनाधिकारिक तौर पर यह कहीं अधिक है, क्योंकि नेपाल में भारतीय नोटों की मांग बहुत अधिक है. अनाधिकृत बाजार में दोनों देशों के बीच करेंसी एक्सचेंज रेट काफी ज्यादा है. नेपाल में भारतीय नोट केवल तराई में ही नहीं चलते बल्कि पहाड़ी क्षेत्रों में भी चलते हैं. 

नोटबंदी के प्रभाव

भारत में नोटबंदी की घोषणा होते ही नेपाल राष्ट्र बैंक व कॉमर्शियल बैंक व वित्तीय संस्थानों ने भारतीय करेंसी को नेपाली करेंसी में बदलने से इनकार कर दिया. ऐसे में किसी न किसी काम से भारत आने वाले नेपाली नागरिकों को बिना कैश के खासी परेशानी हो रही है. 

वे इस बात से भी परेशान हैं कि नेपाल में अभी तक बड़े भारतीय नोटों को एक्सचेंज करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है और बैंकों में पुराने नोट जमा करवाने की अंतिम तिथि 30 दिसम्बर अब पास ही है. उसके बाद तो नेपाल में जितने भी लोगों के पास जितने भी पुराने नोट हैं सब बेकार हो जाएंगे.

नेपाली प्रधानमंत्री पुष्प कुमार दहल ‘प्रचंड’ ने नोटबंदी की घोषणा होते ही भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की थी. साथ ही दोनों देशों के वित मंत्रालयों ने भी आपसी विचार-विमर्श किया. नेपाल ने भारत की नोटबंदी से निपटने के लिए कूटनीतिक स्तर पर भी प्रयास किए.

समस्याएं

नेपाल में भारतीय नोटों को एक्सचेंज करना आसान काम नहीं है. भारत में काले धन के कुछ जमाखोरों ने तो नेपाली नागरिकों को अपने नोट देकर उसे नेपाली करेंसी में बदलवाने की कोशिश की होगी. नेपाल चूंकि स्वतंत्र राष्ट्र है, इसलिए वहां कितने भी पुराने भारतीय नोट नेपाली करेंसी के नए नोट में बदलवाए जा सकते हैं.

इस चुनौती के बीच यह तय करना होगा कि मधेसी समुदाय जैसे लोग कहीं अपने पुराने भारतीय नोटों को नेपाली नोटों में बदलवाने से वंचित न रह जाएं, जो इसके असल हकदार हैं. अगर कोई भारत में अपनी आय का उचित स्रोत होना साबित कर दे तो उसे उसकी सीमा के 25,000 रुपए बदलवाने की छूट दी जानी चाहिए. इस प्रक्रिया में जितनी देरी होगी नेपाली लोगों के लिए उतनी ही मुश्किल होगी.

First published: 15 December 2016, 7:57 IST
 
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