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म्यांमार सरकार कर सकती है रोहिंग्या विद्रोहियों से बातचीत!

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 October 2017, 8:42 IST

म्यांमार सरकार ने अराकन रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी (एआरएसए) को एक आतंकी संगठन घोषित कर रखा है. सरकार इस संगठन को पूरी तरह ख़त्म करने के लिए लगातार अभियान चला रही है. इस बीच अराकन रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी की ओर से कहा है कि वह सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार है. माना जाता है कि एआरएसए विद्रोहियों ने अगस्त माह में राखिने क्षेत्र में बहुसंख्यकों पर हमले किए थे. इसके बाद इस इलाक़े में सेना की हिंसक कार्रवाई हुई और लाखों रोहिंग्या लोगों को विस्थापित होना पड़ा.

एआरएसए ने यह बयान सोशल मीडिया पर जारी किया है. संगठन ने कहा है, 'अगर किसी भी चरण पर म्यांमार सरकार शांति के लिए झुकती है तो एआरएसए इस झुकाव का स्वागत करेगा और उस पर वार्ता करेगा.' इस बयान के यही मायने निकलते हैं कि एआरएसए म्यांमार सरकार से बातचीत के लिए तैयार है.

हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एआरएसए ने यह भी कहा कि सितंबर महीने में युद्धविराम के बाद क्षेत्र में मानवतावादी सहायता पहुंचने के सिलसिले का अंत सोमवार को हो जाएगा और उन्होंने म्यांमार के अधिकारियों पर आरोप लगाया है कि यह राखिने में सहायता को रोकने के लिए किया जा रहा है.

बयान में कहा गया है, "मानवीय पहुंच को बाधित करने का मुख्य कारण म्यांमार सरकार का निरंतर सैन्य संचालन और एक राजनीतिक रणनीति है, जो जनहत्या, हिंसा, आगजनी, धमकी और जनसंहार, दुष्कर्म जैसे हथकंडों का उपयोग कर रही है.'

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, 25 अगस्त के बाद से करीब 515,000 रोहिंग्या लोग भागकर बांग्लादेश जा चुके हैं. राखिने में रहने वाले एक लाख से अधिक रोहिंग्या वर्ष 2012 में सांप्रदायिक हिंसा के बाद से उत्पीड़न का शिकार हुए, जिसमें कम से कम 160 लोग मारे गए और 120,000 लोग 67 शरणार्थी शिविरों तक सीमित हैं.

म्यांमार ने रोहिंग्या, जो देश में कई पीढ़ियों से रह रहे थे, उन्हें बांग्लादेश से भागकर आए अवैध आप्रवासी माना और उनसे नागरिक अधिकार छीन लिए हैं.

First published: 8 October 2017, 8:42 IST
 
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