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लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स: अनपढ़ नहीं इंजीनियर बन रहे हैं आतंकी

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 March 2016, 20:15 IST

इस समय आतंकवाद को दुनिया और मानवता के लिए सबसे बड़े खतरे के रूप में देखा जा रहा है. आये दिन दुनिया के तमाम देश प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से आतंकी गतिविधियों के शिकार होते रहते हैं. आतंकी मामलों में एक धारणा व्यापक होती है कि इन घटनाओं में शामिल ज्यादातर आतंकी गरीब और अशिक्षित होते हैं. लेकिन एक नये अध्ययन में जो खुलासा हुआ है, वह इसके बिल्कुल उलट है. 

अध्ययन के मुताबिक मुस्लिम देशों में जन्मे और शिक्षा अर्जित करने वाले इस्लामी कट्टरपंथियों के पास इंजीनियरिंग की डिग्री होने की संभावना इन देशों के आम लोगों की तुलना में 17 गुणा अधिक है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक लंदन स्कूल ऑफ इकोनोमिक्स एंड पोलिटिकल साइंस (एलएसई) द्वारा लायी जा रही नयी पुस्तक 'इंजीनियर्स ऑफ जिहाद' के निष्कर्ष हिंसक इस्लामिक संगठनों के 800 से अधिक सदस्यों के अध्ययन पर आधारित हैं.

पुस्तक के लेखक एलएसई के विद्वान डॉ. स्टीफन हटरेग और यूरोपीय यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर डिएगो गाम्बेटा के मुताबिक यह पुस्तक इस व्यापक धारणा को चुनौती देती है कि बहुत सारे आतंकवादी गरीब होते हैं और उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं होता.

हटरेग ने कहा कि इस बात में शायद ही कोई संदेह है कि हिंसक इस्लामिक कट्टरपंथी मुस्लिम जगत में पैदा होने और वहां शिक्षा पाने वाले आम लोगों की तुलना में अधिक शिक्षित होते हैं और इसमें इंजीनियरों की भारी तादाद है.

लेखकों का दावा है कि इस्लामिक कट्टरपंथियों के बीच ग्रेजुएट की इतनी बड़ी उपस्थिति की वजह मूल मुस्लिम देशों में आर्थिक विकास की विफलताएं हैं. लेखकों ने कहा कि महत्वाकांक्षी युवा स्नातक खासकर इंजीनियर और दूसरे पेशेवर स्नातक कुछ कम हद तक नव-प्रशिक्षित डॉक्टर नौकरी के अवसरों के अभाव में कुंठित हो गए हैं, क्योंकि उनकी आर्थिक स्थिति डगमगा गई है.

उन्होंने कहा कि जहां पश्चिम शिक्षित स्नातकों के पास अच्छे आर्थिक अवसर थे, वहीं मुस्लिम देशों में उनके समकक्ष बुरी तरह से असंतुष्ट थे और वे कट्टरपंथी इस्लामिक नेटवर्कों की तरफ मुखातिब हो गए.

First published: 15 March 2016, 20:15 IST
 
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