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जर्मनी में इस नंबर +4930257950 से कॉल करके भारतीयों से लाखों ठगा जा रहा है

सादिक़ नक़वी | Updated on: 30 September 2016, 4:02 IST
QUICK PILL
  • बर्लिन में रहने वाले भारतीय को ठगनेे के लिए एक ख़ास किस्म का गिरोह सक्रिय हो गया है. यह गिरोह भारतीयों को डराकर लाखों रुपए अपने अकाउंट में ट्रांसफर करवा लेता है. बर्लिन स्थित भारतीय दूतावास के सूत्रों के मुताबिक पीड़ितों ने अपनी शिकायतें जांच एंजेसिंयों के पास दर्ज कराई हैं, फिर भी इसका खुलासा नहीं हो सका है कि ये ठग पीड़ितों की निजी जानकारी कहां से लेते हैं.

बर्लिन में पिछले डेढ़ साल से भारतीय दूतावास का टेलीफोन नंबर +4930257950 जर्मनी में कई भारतीयों को ठगने और परेशान करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि यह ‘स्पूफ’ का मामला है, जहां कॉलर इंटरनेट कॉलिंग टेक्नोलॉजी (वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल) का इस्तेमाल अपनी असली पहचान या मूल कॉल को छिपाने के लिए कर रहे हैं.  कई लोग इस धोखे के शिकार हुए हैं क्योंकि कॉल करने वालों के पास कुछ निजी जानकारियां हैं.

शोध छात्र किरण तेलुकुंटा और उनकी पत्नी ने एक ब्लॉग लिखा कि किस तरह उन्हें धोखा दिया गया. तेलुकुंटा ने कहा कि कॉलर ने खुद को अलेक्स जॉनसन बताया और वह भारी भरकम अंग्रेजी बोल रहे थे.

कॉल करने वाले 50, 000 से लेकर 1, 00, 000 रुपए तक की मांग करते हैं.

कॉलर को तेलुकुंटा की पत्नी की जन्मतिथि मालूम थी. उसने तेलुकुंटा को यह कहकर फंसाया कि उन्होंने अपनी जन्मतिथि अप्रवासी फॉर्म पर सही नहीं लिखी है. इससे उनका जर्मनी में रहना खतरे में पड़ सकता है. बढ़ती हुई आतंकवादी गतिविधियों को देखते हुए जर्मन सरकार उन्हें यहां से निकाल सकती हैं. फिर दंपती को वेस्टर्न यूनियन के माध्यम से पैसों का भुगतान करने को कहा गया.

कॉलर को पहली बार रुपए भी मिल गए. कॉलर ने दूसरी बार जब रुपए एंठने की कोशिश की तो खुशकिस्मती से दंपती को इस तरह की ठगी के मामलों की जानकारी इंटरनेट से मिल गई और उन्होंने दूसरे भुगतान की प्रक्रिया रद्द कर दी.

जिन अन्य लोगों ने अपने कटु अनुभव बताए, उनका कहना था कि कुछ कॉलर खुद को भारतीय और दूतावास में काम करने वाले बताते हैं, और हिंदी में बोलते हैं. समस्याओं को सुलझाने के लिए वे वकील की फीस के नाम पर 50, 000 से लेकर 1,00, 000 रुपए तक मांगते हैं.

संवेदनशील जानकारियां

बर्लिन में भारतीय दूतावास के सूत्रों के मुताबिक पीड़ितों ने अपनी शिकायतें जांच एंजेसिंयों के पास दर्ज कराई हैं, फिर भी इसका खुलासा नहीं हो सका है कि ये ठग पीड़ितों की निजी जानकारी कहां से लेते हैं. जिन लोगों को ऐसी कॉल्स मिली हैं, वे इंटरनेट पर लिखते हैं कि उन्हें यह जानकारी शायद सोशल मीडिया से मिलती है. तेलुकुंटा लिखते हैं कि हो सकता है, उनकी पहुंच हमारे आप्रवासी फॉर्म्स तक हो. अभी तक यह भी पता नहीं चल पाया है कि ठगों को भारतीय नागरिकों के टेलीफोन नंबर की जानकारी उन्हें कहां से मिलती है.

एक पीड़ित का दावा है कि एक मामले में पैसे भारत (सिवान, बिहार) में निकाले गए.

धोखाधड़ी की चेतावनी

इन कॉल्स के लिए केवल राजदूत के नंबर ही इस्तेमाल नहीं हो रहे हैं. द फेडरल ऑफिस ऑफ माइग्रेशन एंड रेफ्यूजीज, और द जर्मन मिनिस्ट्री ऑफ फॉरेन अफेयर्स के नंबर भी काम में लिए जा रहे हैं.

बर्लिन में भारतीय दूतावास के अधिकारी इस मुद्दे पर कमेंट करने को तैयार नहीं थे और कहा कि दूतावास ने पहले ही कई बयान दिए हैं. भारतीय दूतावास और अन्य वाणिज्य दूतावास ने इस ठगी के बारे में कई बार चेताया है, फिर भी कॉल्स आ रहे हैं.

फेसबुक पर पोस्ट किए दूतावास के परामर्श, जिसके साथ एक पीड़ित का विवरण भी संलग्न है, में लिखा है, ‘कॉलर्स के पास पहले फेडरल ऑफिस ऑफ माइग्रेशन एंड रेफ्यूजीज और भारतीय दूतावास, बर्लिन के स्पूफ नंबर्स थे. सचेत और पहले से हथियारबंद ठग आधी लड़ाई जीत जाता है. अपने परिवार और दोस्तों के बीच कृपया जागरूकता फैलाएं और ऐसे कॉल्स के शिकार नहीं हों.’

इस ठगी के लिए जागरूकता फैलाने की मुहिम से अब ऐसे मामले ज्यादा नहीं हैं.

कुछ इसी तरह के मामले कुवैत, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया आदि जगह से सामने आ रहे हैं, जहां दूतावासों ने ऐसे दावों का शिकार नहीं होने के परामर्श दिए हैं. पहले इस महीने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी ट्वीट किया था कि किस तरह भारतीय छात्रों को इस तरह के कॉल्स मिल रहे हैं और उन्हें उनका शिकार नहीं होना है.

बर्लिन में दूतावास के सूत्रों के अनुसार ऐसे कॉल्स की जानकारी समय-समय पर सब जगह से इकट्ठा करके पुलिस को दी जा रही है. इस ठगी के लिए जागरूकता फैलाने की मुहिम से लोग इस तरह की धोखाधड़ी के ज्यादा शिकार नहीं हो रहे हैं.

अधिकांश लोग इन कॉल्स पर ध्यान नहीं दे रहे हैं और पुलिस को सूचना दे रहे हैं. इसकी जानकारी फेसबुक से मिल रही है, जहां कई लोग लिख रहे हैं कि किस तरह उन्हें नकली कॉल्स की जानकारी पहले से हो गई और उन्होंने दूतावास और पुलिस को इसकी सूचना दी.

First published: 30 September 2016, 4:02 IST
 
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