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भारत-चीन के बीच अहम समझौता, भारत से गैर-बासमती चावल भी खरीदेगा चीन

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 June 2018, 14:31 IST

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के लिए दो दिन की चीन यात्रा पर गए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि पडोसी देशों और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के साथ कनेक्टिविटी भारत की प्राथमिकता है. उन्होंने कहा हम फिर से एक मंच पर पहुंचे हैं जहां भौतिक और डिजिटल कनेक्टिविटी भूगोल की परिभाषा को बदल रही है. इसलिए हमारे पड़ोस और एससीओ क्षेत्र में कनेक्टिविटी हमारी प्राथमिकता है.

इस दौरान प्रधामंत्री मोदी ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति ममनून हुसैन से हाथ मिलाया. दोनों के बीच कुछ सेकंड तक बातचीत भी हुई. इससे पहले भारत ने चीन के साथ कुछ समझौतों पर भी हस्ताक्षर किये. पहले समझौते में चीन ने बाढ़ के मौसम के दौरान ब्रह्मपुत्र नदी से पानी के सीमा पार प्रवाह पर डेटा साझा करने पर भारत के साथ अपने समझौते को नवीनीकृत कर दिया है.

9 जून को हस्ताक्षर किए गए समझौते के तहत चीन 15 मई से 15 अक्टूबर तक जल प्रवाह की सूचनाओं को भारत को प्रदान करेगा. पिछले साल डोकलाम विवाद के चलते चीन ने भारत के साथ ब्रह्मपुत्र के प्रवाह से जुड़े आंकड़े साझा करने बंद कर दिए थे.

जानकारों की मानें तो भारत और चीन के बीच इस समझौते का टिक पाना इतना आसान भी नहीं है. उपग्रह से मिली तस्वीरों से पता चलता है कि चीन ब्रह्मपुत्र नदी पर एक बड़े पैमाने पर बांध बना रहा है. इसके अलावा एक भूमिगत सुरंग का निर्माण भी किया जा रहा है.

ब्रह्मपुत्र भारतीयों और तिब्बती लोगों के लिए समान है और इसकी उत्पत्ति तिब्बत के पुरांग के अंगसी ग्लेशियर में हुई है. चीन इसे Taklamakan रेगिस्तान की शुष्क भूमि में बदलने की योजना बना रहा है. दूसरे समझौते में चीन ने भारत से गैर बासमती चावल के आयात पर भी समझौता कर लिया है.

चीन दुनिया का सबसे बड़ा चावल बाजार माना जाता है. फिलहाल चीन भारत से केवल बासमती चावल का आयात करता है. दोनों देशों के बीच इस समझौते के बाद भारत अब गैर-बासमती चावल भी चीन को निर्यात कर सकेगा.

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First published: 10 June 2018, 13:45 IST
 
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