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विश्व पर्यावरण दिवस: हाथियों के प्यार में नौकरी छोड़कर जंगल में रहने लगीं शैरोन

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 June 2016, 9:58 IST
(लॉन्गरूम डॉट कॉम)

हाथी बेहद सामाजिक जीव हैं. हाथियों के झुंड का आदरूनी सामाजिक तानाबाना किसी इंसानी समाज जितना ही गहरा, भावुक और करुणापूर्ण होता है. हाथियों के झुंड में मातृसत्ता चलती है. झुंड का नेतृत्व हमेशा सबसे आगे रहकर सबसे बुजुर्ग हथिनी करती है. ये सारी बातें ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड में रहने वाली शैरोन पिनकॉट को डेढ़ दशक पहले पता चलीं. और फिर धीरे-धीरे वे हाथियों की होकर रह गईं.

जानवरों के प्यार में इंसान द्वारा उसे पाल लेने या रख रखाव की कहानियां बहुत आम हैं, लेकिन किसी जानवर के प्यार में दुनिया छोड़कर जंगलों का हो जाना बेहद अनोखा है. 2001 में एक फोटोग्राफर और लेखिका शैरोन पिनकॉट ने हाथियों के प्रति अपने प्रेम के चलते दुनिया से किनारा कर लिया और जंगलों में जाकर रहने लगीं.

शैरोन पिनकॉट/डेली मेल

13 साल हाथियों के बीच जंगल में रहने के दौरान शैरोन ने उनके लिए संघर्ष करने के साथ गहरे और जीवन बदलने वाले रिश्ते बना लिए. जिसे जंगली हाथियों के साथ अब तक के सबसे बड़े दस्तावेजी रिश्ते के रूप में माना गया है.

जिम्बॉब्वे के ह्वेंग बुश पार्क में शैरोन ने इस दौरान काफी कठिन वक्त भी बिताया लेकिन हाथियों के साथ उनकी मोहब्बत ने उन्हें जोखिम लेने से पीछे हटने नहीं दिया.

शैरोन पिनकॉट/फेसबुक

डेलीमेल ऑस्ट्रेलिया को शैरोन ने बताया, "पहला हाथी देखना एक ऐसा अनुभव था जिसे मैं कभी नहीं भूल सकती और तभी मेरे सामने एक अवसर आया कि मैं उनके बीच जाकर उनकी मदद करूं, और मैंने यह मौका नहीं छोड़ा."

पहली बार ह्वेंग बुश में पहुंची शैरोन बिल्कुल भी प्रशिक्षित नहीं थी. इसलिए उन्होंने शुरुआती दिनों में अपने दोस्त बनाने शुरू किए और हाथियों व उनके परिवारों के बारे में ज्यादा जानकारी जुटाना चालू किया. 

शैरोन पिनकॉट/फेसबुक

वे कहती हैं, "जब मैं वहां पहली बार पहुंची तो मैं सच बोलूंगी कि मैंने खुद को वहां विशालकाय काले जानवरों के बीच घिरा पाया लेकिन मैंने उन्हें समझना शुरू कर दिया और वे मेरे मित्र बन गए."

जंगलों में उनकी जिंदगी कुछ ऐसी थी कि रोज सुबह नहाने-धोने के बाद वे करीब 10 बजे अपनी जीप से हाथियों को ढूंढ़ने निकल जाती थीं. 

शैरोन पिनकॉट/फेसबुक

इसके बाद उन्होंने अलग-अलग प्रजाति के हाथी खोजे और परिवारों के हिसाब से उनके नाम रखे. जैसे एम फैमिली में हर सदस्य का नाम एम से शुरू होता है. इससे उस परिवार के हर हाथी को पहचानना बेहद आसान था और मैं कभी भी उन्हें पहचान सकती हूं.

कुछ सालों बाद हाथियों ने उन्हें अपना लिया और यह एक ऐसा लम्हा था जो वो कभी नहीं भूल सकतीं. वे कहती हैं, "हाथी मेरे दरवाजे पर आ जाते थे और अपने परिवार के सदस्यों की ही तरह चिंघाड़ते हुए पुकारते थे. इसके लिए तीन-चार साल लगे, लेकिन यह बहुत शानदार था क्योंकि मादा हाथी भी अपने तीन-चार दिन के बच्चों को लेकर मेरे दरवाजे पर आ जाती थीं."

शैरोन पिनकॉट/फेसबुक

वहां पर एक लेडी नाम की मादा हाथी से घनिष्ठ मित्रता बनाने वाली शैरोने कहती हैं, "लेडी के लिए मेरे दिल में एक विशेष जगह है. उसने मुझे उनके बारे में काफी कुछ सिखाया. वो पहली हाथी थी जिसे मैंने छुआ."

हालांकि 13 साल के लंबे वक्त के बाद शैरोन को जिम्बॉब्वे को अलविदा कहना पड़ा. अपने इस अनुभव के बारे में वो कहती हैं, "यह फैसला जिंदगी को तहस-नहस करने वाला था लेकिन जरूरी भी."

अपने 13 साल के अनुभव पर लिखी शैरोन पिनकॉट की लिखी किताब 'एलीफैंट डॉन' (शैरोन पिनकॉट डॉट कॉम)

शैरोन के मुताबिक दुनिया भर में फिलहाल चार लाख हाथी हैं जो ज्यादातर एक जैसी ही आवाज करते हैं लेकिन इसका तब कोई मतलब नहीं बनता जब आपको पता चलता है कि हर 15 मिनट में एक हाथी की हत्या कर दी जाती है. 

हर साल करीब 30 हजार हाथियों की हत्या कर दी जाती है. हम केवल इसे होने से रोकने की कोशिश कर सकते हैं. शैरोन कहती हैं कि अगर हाथी के दांत, बाल, खाल या किसी भी चीज से बने उत्पादों को हम खरीदना बंद कर दें तो उनकी हत्या का सिलसिला भी रुक जाएगा.

First published: 5 June 2016, 9:58 IST
 
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