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Facebook के बारे में यह कड़वी सच्चाई आपको नहीं पता होगी

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 February 2018, 17:54 IST

दुनिया के दिग्गज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Facebook ने अपनी सालाना रिपोर्ट में एक बड़ा खुलासा किया है. इस खुलासे के बाद कंपनी के वैश्विक स्तर पर इतने ज्यादा यूजर्स की तादाद पर सवालिया निशान उठना लाजमी है.

Facebook ने अपनी ताजा सालाना रिपोर्ट में बताया है कि इसके प्लेटफॉर्म पर करीब 20 करोड़ (200 मिलियन) अकाउंट्स या तो फर्जी हैं या फिर डुप्लीकेट. यह आंकड़े दिसंबर 2017 तक के हैं और ऐसे अकाउंट्स की भारी तादाद के वाले देशों में भारत भी शामिल है.

Facebook के मुताबिक, "2017 की चौथी तिमाही में हमारा अनुमान है कि हमारे वैश्विक एमएयू (मंथली एक्टिव यूजर्स) का 10 फीसदी हिस्सा डुप्लीकेट अकाउंट्स का है. हमारा मानना है कि विकसित बाजारों की तुलना में भारत, इंडोनेशिया और फिलीपींस जैसे विकासशील बाजारों में डुप्लीकेट अकाउंट्स का प्रतिशत काफी ज्यादा है."

बता दें कि 31 दिसंबर 2017 को सोशल नेटवर्किंग साइट Facebook के पास 2 अरब 13 करोड़ मासिक सक्रिय यूजर्स (एमएयू) थे और 31 दिसंबर 2016 की तुलना में इसमें 14 फीसदी का ईजाफा हुआ. 31 दिसंबर 2016 को मासिक सक्रिय यूजर्स की संखअया 1 अरब 86 करोड़ थी और इनमें छह फीसदी या 11.40 करोड़ डुप्लीकेट अकाउंट्स थे.

2017 में हुई बढ़त में भारत, इंडोनेशिया और वियतनाम प्रमुख रूप से योगदान रहा. इसके अलावा दुनियाभर में दैनिक सक्रिय यूजर्स भी दिसंबर 2016 के 1 अरब 23 करोड़ की तुलना में दिसंबर 2017 में 1 अरब 40 करोड़ हो गए और इस प्रकार से 14 फीसदी की बढ़ोतरी हुई.

Facebook ने कहा, "दिसंबर 2016 की तुलना में दिसंबर 2017 में भारत, इंडोनेशिया और ब्राजील में यूजर्स ने दैनिक सक्रिय यूजर्स की बढ़त में मुख्य भूमिका निभाई."

गौरतलब है कि डुप्लीकेट अकाउंट का मतलब है कि कोई यूजर अपने मुख्य अकाउंट के अलावा अपने नाम से ही दूसरा अकाउंट बना ले.

वहीं, झूठे या फर्जी अकाउंट को दो वर्गों में बांटा गया है. पहला यूजर मिसक्लासीफाइड अकाउंट, जिसमें यूजर ने पर्सनल प्रोफाइल को बिजनेस, ऑर्गनाइजेशन या गैर-मानव उत्पाद के लिए बनाया हो. जबकि दूसरा अनडिजायरेबल अकाउंट जो यूजर प्रोफाइल के रूप में होती है, लेकिन Facebook के नियमों का उल्लंघन करती है. इसे स्पैमिंग जैसा माना जा सकता है.

कंपनी ने बताया, "डुप्लीकेट और फर्जी अकाउंट्स का अनुमान अकाउंट्स के सीमित सैंपल में से हमारे आंतरिक रिव्यू के बाद सामने आया है और हमनें इसे तय करने के लिए महत्वपूर्ण फैसले लिए."

कंपनी ने स्पष्ट किया कि डुप्लीकेट या फर्जी अकाउंट्स का अनुमान जरूरी नहीं वास्तविक संख्या बताता हो. विशेषरूप से डुप्लीकेट अकाउंट्स को मापना बहुत मुश्किल है और संभव है कि डुप्लीकेट अकाउंट्स की वास्तविक संख्या हमारे अनुमान से काफी अलग हो.

First published: 4 February 2018, 17:54 IST
 
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