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पाक उच्चायोग के अफ़सर रिहा, 48 घंटे में देश छोड़ने का आदेश

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 October 2016, 15:06 IST
(एएनआई)

दिल्ली पुलिस ने पाकिस्तान उच्चायोग के एक अधिकारी महमूद अख़्तर को जासूसी के आरोप में हिरासत में लेने के बाद छोड़ दिया है. उन्हें क्राइम ब्रांच के ज्वाइंट कमिश्नर रविंद्र यादव की अगुवाई में पकड़ा गया था. वहीं पाकिस्तानी उच्चायोग ने दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई पर एतराज़ जताया है. उन्होंने अपने अधिकारी पर लगे आरोपों को बेबुनियाद भी बताया है. 

महमूद अख़्तर को डिप्लोमेटिक इम्युनिटी के तहत छोड़ा गया है. भारत के विदेश मंत्रालय ने आदेश दिया है कि महमूद अख्तर अगले 48 घंटे के अंदर भारत छोड़ दें. 35 साल के अख्तर को क्राइम ब्रांच ने उस वक्त दबोचा, जब वह एक भारतीय नागरिक से दस्तावेज़ खरीद रहे थे.  

रविंद्र यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा है कि महमूद के पास कथित तौर पर बीएसएफ़ की तैनाती से जुड़े दस्तावेज़ मिले थे. उन पर जासूसी करने और रक्षा से जुड़े दस्तावेज़ों को लीक करने का आरोप लगाया गया था. अख़्तर पाकिस्तानी उच्चायोग के वीज़ा सेक्शन में अधिकारी थे. 

रविंद्र यादव ने बताया कि महमूद अख़्तर पिछले डेढ़ साल से जासूसी कर रहे थे और क्राइम ब्रांच के रडार पर थे. टीम उन पर डेढ़ महीने से नज़र रख रही थी. क्राइम ब्रांच ने दो भारतीय नागरिकों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है, जो रुपयों की एवज में अख़्तर को दस्तावेज़ सौंपते थे. 

वहीं पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने इसे विएना कन्वेंशन का उल्लंघन करार देते हुए विरोध जताया है. उन्होंने भारत सरकार से यह भी गुज़ारिश की है कि भविष्य में उनके किसी स्टाफ के साथ ऐसी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए. 

पढ़ें: जासूसी के आरोप में पकड़े गए पाक उच्चायोग के अफसर को भारत छोड़ने का आदेश

पाक उच्चायोग के अफसर महमूद अख्तर को विदेश मंत्रालय ने भारत छोड़ने का आदेश दिया है. (एएनआई)

क्राइम बांच का दावा

  • शुरुआती पूछताछ में महमूद अख्तर ने दिल्ली पुलिस को बताया कि वह एक भारतीय नागरिक हैं. सबूत के तौर पर उन्होंने एक फर्जी आधार कार्ड दिखाया.
  • दिल्ली पुलिस के ज्वाइंट सीपी रवींद्र यादव ने बताया है कि जोधपुर के शोएब नाम के भी एक संदिग्ध हैं जिन्हें जल्दी ज़द में लिया जाएगा. 
  • महमूद अख्तर के पास से मिले फर्जी आधार कार्ड में उच्चायोग के अफसर का नाम मेहबूब राजपूत लिखा है. इस आधार कार्ड में उसकी जन्मतिथि 23 मार्च 1981 दर्ज है. इसके अलावा दिल्ली के पते का जिक्र है.
  • आधार कार्ड में दिल्ली का फर्जी पता लिखा है. जो इस तरह है- आत्मज: हसन अली, 2350, गली नजदीक मदारी, रोदग्रान मोहल्ला, चांदनी चौक, उत्तरी दिल्ली-110006.
  • दिल्ली पुलिस के मुताबिक गोपनीय दस्तावेज मुहैया कराने के लिए इन्हें मोटा पैसा मिलता था. तीनों जासूसों को दिल्ली के चिड़ियाघर से हिरासत में लिया गया.
  • पाकिस्तानी उच्चायोग के कर्मचारी के पास बीएसएफ की तैनाती और रक्षा तैनाती के नक्शों से संबंधित दस्तावेज थे. पकड़े गए तीनों शख्स डेढ़ साल से जासूसी में शामिल थे.
  • तफ्तीश में यह भी पता चला है कि उन्होंने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों को जानकारी मुहैया करवाई है. रवींद्र यादव ने कहा कि महमूद और दूसरे लोग डेढ़ साल से आईएसआई के लिए जासूसी कर रहे थे.
  • दिल्ली पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि महमूद अख्तर पाकिस्तानी सेना का हवलदार था और वीजा कंसल्टेंट के तौर पर काम कर रहा था.

  • वह पाकिस्तानी सेना के बलोच रेजीमेंट में तैनात था. दिल्ली पुलिस के मुताबिक अख्तर को जानबूझकर विभाग में लाया गया था. वह तीन साल पहले ही हाईकमीशन में आया था.
  • महमूद अख्तर के पास से बॉर्डर के नक्शे भी बरामद किए गए हैं. वह लंबे समय से आईएसआई के लिए जानकारी जुटा रहा था. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने राजनयिक छूट हासिल होने की वजह से पूछताछ के बाद अख्तर को छोड़ दिया.

बासित ने कहा बेबुनियाद आरोप

इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए भारत ने पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित को तलब किया. वहीं भारत छोड़ने के विदेश मंत्रालय के फरमान पर पाकिस्तान ने ऐतराज जताया है.

इसके अलावा पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने भारतीय विदेश सचिव एस जयशंकर से मुलाकात करते हुए अपना विरोध जताया है. बासित ने कहा कि उच्चायोग के अफसर के साथ इस तरह का व्यवहार अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है.

अब्दुल बासित ने कहा कि यह 1961 की विएना संधि का सरासर उल्लंघन है. पाक उच्चायुक्त ने साथ ही कहा कि भारत का आरोप बेबुनियाद और निराधार है और भविष्य में इस प्रकार की घटना दोबारा नहीं होनी चाहिए.

बासित ने इसके साथ ही भारत के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पाक उच्चायुक्त का अफसर जासूसी नहीं कर रहा था. पाकिस्तानी उच्चायोग ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं है, जो उसके राजनयिक दर्जे से मेल नहीं खाती.

First published: 27 October 2016, 15:06 IST
 
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