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पनामा पेपर्स लीक: स्पेन के उद्योग मंत्री जोस मैनुएल सोरिया का इस्तीफा

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 April 2016, 0:52 IST

पनामा पेपर्स लीक मामले में नाम आने के कारण एक और नेता को अपनी कुर्सी से हाथ धोना पड़ा है. पनामा पेपर्स खुलासे में नाम आने के बाद स्पेन के उद्योग मंत्री जोस मैनुएल सोरिया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. अप्रैल के पहले हफ्ते में लीक दस्तावेजों में जोस मैनुएल को बाहमास की फर्म का डायरेक्टर बताया गया है.

पनामा पेपर्स के लीक कागजात के जरिए स्पेन के ऑनलाइन अखबार ‘इल कॉन्फिडेंशियल ’ ने सोमवार को कहा था कि जोस 1992 में एक विदेशी फर्म के प्रशासक थे. 

इसके जवाब में सोरिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर कहा कि इस कंपनी से मेरा कोई भी संबंध नहीं है. 

मैनुएल ने मंत्री पद के साथ ही संसद की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है. इस मामले में वामपंथी और दक्षिणपंथी विपक्षी पार्टियों ने उनके इस्तीफे की मांग की थी. उनके इस्तीफे से रूढ़िवादी पॉपुलर पार्टी को करारा झटका लगा है. 

आइलैंड के प्रधानमंत्री भी दे चुके हैं इस्तीफा

पनामा पेपर्स खुलासे के बाद यह दूसरी बड़ी घटना है जब किसी देश के मंत्री ने अपने पद से इस्तीफा दिया है. इससे पहले पनामा पेपर्स खुलासे में नाम आने के बाद आइसलैंड के प्रधानमंत्री सिगमुडुर डेवियो गुनलॉगसन ने 5 अप्रैल को इस्तीफा दिया था.

गुनलॉगसन पर आरोप है कि उन्होंने ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में फर्जी कपंनी बनाई है. ये आरोप लगने के बाद विपक्षी पार्टियों ने उनके इस्तीफे की मांग की थी. आइलैंड की जनता ने भी उनके खिलाफ काफी विरोध प्रदर्शन किया था. 

देश के हालात देखते हुए राष्ट्रपति ओलफुर रंगनार ग्रिमसन अमेरिका दौरा बीच में ही छोड़कर वापस आ गए थे.

गुनलॉगसन को पद से हटाने के लिए ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया जिस पर पहले ही दिन 16 हजार लोगों ने दस्तखत किए थे. 

पनामा पेपर्स लीक मामला

गौरतलब है कि बीते दिनों मोजेक फोंसेका कंपनी से बड़े पैमाने पर लीक हुए दस्तावेजों में भारत सहित दुनिया के कई नामी गिरामी हस्तियों के कथित तौर पर कर चोरी के मकसद से की गई संदिग्ध आर्थिक गतिविधियों का खुलासा किया गया था. 

इन दस्तावेजों में डीएलएफ के संस्थापक केपी सिंह, बॉलीवुड स्टार अमिताभ बच्चन, ऐश्वर्या रॉय समेत करीब 500 भारतीयों के नाम का खुलासा किया गया था.

पनामा पेर्पस पनामा की कानून परामर्शदाता कंपनी मोजेक फोंसेका के लगभग 1.15 करोड़ लीक दस्तावाजों का एक संग्रह है. ये कंपनी वित्तीय प्रबंधन की विशेषज्ञ है और अपने ग्राहकों को उनके देश में कर भुगतान से बचाने में मदद करती है.

इस तरह हुआ खुलासा

इंटरनेशनल कन्सॉर्शियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव (आईसीआईजे) जर्नलिस्ट्स ने पनामा पेपर्स के नाम से ये ख़ुलासा किया. भारतीय अखबार द इंडियन एक्सप्रेस इस कंसोर्शियम का हिस्सा है और उन्होंने भी इन दस्तावेजों की जांच और परख में हिस्सा लिया.

इन दस्तावेजों में पूरी दुनिया के 72 पूर्व और वर्तमान नेताओं सहित 140 राजनीतिज्ञों और अधिकारियों के नाम शामिल हैं, जिन्होंने कर भुगतान से बचने के लिए इस कंपनी की मदद ली थी.

क्या है आईसीआईजे

यह विश्व भर के 190 खोजी पत्रकारों का एक समूह है जिसमेँ 76 देशों के 109 मीडिया संस्थान शामिल हैं. 1997 में आईसीआईजे की स्थापना की गयी ताकि पत्रकारिता किसी देश की सीमा के भीतर सिमट कर न रह जाए. 

साथ ही इसका बहुउद्देशीय उपयोग किया जा सके. इसमें वे अनुभवी लोग भी हैं जो सरकारी रिकॉर्ड पढ़ने में एक्सपर्ट हैं. तथ्यों की जांच करने वाले वकील भी इसमें शामिल हैं.

First published: 17 April 2016, 0:52 IST
 
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