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पाकिस्तानी शरणार्थी श्रीलंका में दर-दर भटकने के लिए हुए मजबूर, रोटी-कपड़ा-मकान के पड़े हैं लाले

कैच ब्यूरो | Updated on: 26 April 2019, 15:11 IST

श्रीलंका की राजधानी कोलंबो समेत कई इलाकों में ईस्टर के मौके लगातार कई बम धमाके हुए. इस आत्मघाती बम धमाके में 300 से ज्यादा लोग मारे गए, जिसमें 11 भारतीय भी शामिल हैं. इसी बीच श्रीलंका के पश्चिम तट और कोलंबो के उत्तर में स्थित नेगोंबो में रहने वाले पाकिस्तानी लोगों पर लोग हमला कर रहे हैं. इस ब्लास्ट के बाद से पाकिस्तानी शरणार्थियों पर लगातार हिंसक हमले हो रहे हैं.

इसकी वजह से ये लोग भागने पर मजबूर हो गए हैं. पाकिस्तान के लगभग 800 शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) द्वारा रहने के लिए किराए का घर मुहैया कराया गया है. इन लोगों को श्रीलंका के क्रिश्चियन, सिंहलीस और मुस्लिम परिवार के लोगों ने अपने घरों से बाहर निकाल दिया. श्रीलंकाई लोगों द्वारा ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि इन्हें इस बात का डर है कि इन लोगों का कहीं कोई आतंकियों से लिंक तो नहीं हैं.

इस हमले के बारे में श्रीलंका के एक अधिकारियों का कहना है कि इन बम ब्लास्ट में 359 नहीं, बल्कि 253 लोगों की मौत हुई है. अधिकारी का कहना है कि इस मामले की ऑटोप्सी पूरी हो चुकी है. दोबारा जांच करने पर बता चला है कि कुछ शवों को 2 बार गिन लिया गया था.

वहीं, इस बारे में स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा, "बहुत से पीड़ितों के शव काफी ज्यादा क्षतिग्रस्त हो गए थे. कुछ शवों को दो बार गिना गया था."

बता दें कि जिन पाकिस्तानी शरणार्थियों को श्रीलंकाई लोग अपने घर से निकाल रहे हैं, वे अपने देश में सुन्नी बहुल लोगों द्वारा दिए उत्पीड़न का सामना कर चुके हैं. पाकिस्तानी शरणार्थी अहमदिया संप्रदाय से ताल्लुक रखते हैं. ये शरणार्थी श्रीलंका में पाकिस्तान से पांच साल पहले भागकर आए थे. बता दें कि श्रीलंका अफगानिस्तान और पाकिस्तान के शरणार्थियों को परिवहन की सुविधा देता है. इसके साथ ही उनकी सुविधाओं का भी ख्याल रखता है. श्रीलंकाई सरकार तब तक ऐसा करती है, जबतक इन लोगों को ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड या फिर कोई और देश अपने शरण में नहीं लेता है.

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इस मामले पर मुस्लिम काउंसिल ऑफ श्रीलंका के उपाध्यक्ष हिल्मी अहमद ने कहा, "हमने सुना है कि बुधवार को बाकी समुदायों के साथ पाकिस्तानी शरणार्थियों का संघर्ष हुआ." श्रीलंका में मकान मालिकों द्वारा दिखाए जा रहे रोष की वजह से पाकिस्तान के लगभग 400 परिवारों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया गया है.

यंग मुस्लिम मेन एसोसिएशन के अध्यक्ष नवाज दीन ने कहा, "लगभग 60 पुरुष, महिला और बच्चे नेगोंबो पुलिस थाने में हैं. यूएनएचआरसी को निर्णय लेना है कि इन परिवारों का क्या करना है."

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First published: 26 April 2019, 11:10 IST
 
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