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प्योंगचैंग ओलम्पिक में 5जी के इस्तेमाल ने दक्षिण कोरिया में ऐसे बदल दी है लोगों की ज़िन्दगी

सुनील रावत | Updated on: 13 February 2018, 13:06 IST

आप  यह सुनकर हैरान हो सकते है कि भारत में अभी प्रतीक्षित 5जी इंटरनेट का इस्तेमाल दक्षिण कोरिया में इंसानों के लिए नहीं बल्कि जंगली जानवरों के लिए हो रहा है. प्योंगचांग में चल रहे शीतकालीन ओलम्पिक के लिए 5 जी का इस्तेमाल किया जा रहा है. यहां ओलम्पिक स्थल के पास दर्शकों को जंगली जानवरों से बचाने  के लिए इस तकनीक का इतेमाल किया जा रहा है. 

बता दें कि यहां 5जी 4जी से 100 ज्यादा तेज है. यह 10 गीगाबिट्स तक के एचडी वीडियो एक सेकंड में भेज सकता है. प्योंगचैंग में इंटेल कार्पोरेशन के कैलिफोर्निया स्थित अधिकारी सैंड्रा रिवेरा ने कहा कि ''5जी आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, सेल्फ-ड्राइविंग वाहनों, रोबोट और अन्य मशीनों के विकास के लिए महत्वपूर्ण होगा, जो वास्तविक समय में बड़े पैमाने पर डेटा संचारित करते हैं.'' 

 

रिवेरा ने एक साक्षात्कार में कहा, "यह सच है, हम इसे मशीनों का युग कहते हैं. मशीनें आ रही हैं और 5जी कंप्यूटिंग और संचार के वास्तविक अभिसरण के साथ एक बड़ा एनाबलर है."

प्योंगचैंग में शुरू की गई 5जी सेवा को दक्षिण कोरियाई दूरसंचार कंपनी केटी कार्पोरेशन ने किया है. इंटेल, एरिक्सन एबी और सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स पहले ही इसका इस्तेमाल करते हैं. ओलम्पिक खेल खत्म हो जाने के बाद यह प्रौद्योगिकी ऑफ़लाइन हो जाएगी. हालांकि  5जी दक्षिण कोरिया में अगले साल पूरी तरह शुरू हो जाएगी.

एक अनुमान के अनुसार दुनियाभर में करीब 1 अरब लोगों तक अगले पांच साल के भीतर 5G पहुँच जाएगी.एरिक्सन और आईएचएस मार्किट के शोधकर्ताओं के अनुसार इससे 2030 के दशक तक वैश्विक आर्थिक उत्पादन में $ 12.3 ट्रिलियन की वृद्धि होगी.

Pyeongchang ओलम्पिक के दौरान 5जी लिंक वाले कैमरे लाइव वीडियो स्ट्रीम कर रहे हैं. कार्यक्रमों के 360-डिग्री वीडियो दर्शकों को हर कोण मिलते हैं. यहां स्वचालित शटल बसों में कई वीडियो स्क्रीन हैं, जो विंडो के बजाए 5G खेलों की लाइव कवरेज दिखाती है. साथ ही सड़कों को नेविगेट करने का भी काम करती है.

 

किसानों को भी मिली राहत 

यहां किसान चाहते हैं कि प्रौद्योगिकी उनकी आजीविका में सुधार कर सके. किसानों का कहना है कि यहां जंगली सूअरों की सबसे बड़ी चिंता थी. दक्षिण कोरिया के पर्यावरण मंत्रालय के मुताबिक राष्ट्रव्यापी, 2012 और 2016 के बीच जंगली सूअरों के हमलों से तीन लोग मारे गए और 21 घायल हुए.

उनका कहना है 5जी का मतलब कुछ भी नहीं है अगर यह बेहतर खेती करने में हमारी मदद नहीं करता. उनका कहना है कि हमें खुशी है कि हम अब सुअरों से बचने के लिए शिकारी और बिजली के तारों पर निर्भर नहीं रहेंगे. यहां सरकार शिकार करने की अनुमति देती है, लेकिन पशु कार्यकर्ताओं के विरोध ने इसे रोक दिया.कई किसानों ने अपने खेतों की रक्षा के लिए बिजली की बाड़ लगाई है. 

First published: 13 February 2018, 13:06 IST
 
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