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ब्रिटेन ने छोड़ा यूरोपीय संघ का साथ, जनमत संग्रह के नतीजों का एलान

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 June 2016, 11:41 IST
(फाइल फोटो)

यूरोपीय यूनियन का हिस्सा बने रहने या छोड़ने के सवाल पर ब्रिटेन में हुए जनमत संग्रह का नतीजा आ गया है. ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (बीबीसी) के मुताबिक 52 फीसदी मतदाताओं ने ईयू से बाहर होने के पक्ष में मुहर लगाई है.

वोटों की गिनती में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला. कांटे के इस मुकाबले में वो लोग थोड़ा पीछे रह गए, जो ब्रिटेन के 28 देशों के यूरोपीय संघ में बने रहना चाहते थे. 48 प्रतिशत मतदाताओं ने यूरोपीय संघ में बने रहने के पक्ष में वोट दिया.

लंदन के लोग ईयू के साथ

पूर्वोत्तर इंग्लैंड, वेल्स और मिडलैंड्स में ज्यादातर मतदाताओं ने यूरोपीय संघ से अलग होना पसंद किया है, जबकि लंदन, स्कॉटलैंड और नॉर्दन आयरलैंड के ज्यादातर मतदाता यूरोपीय संघ के साथ ही रहना चाहते थे.

वहीं जनमत संग्रह के शुरुआती नतीजों से पाउंड लड़खड़ाया गया, रिजल्ट आने से पहले एक पाउंड 1.50 डॉलर के स्तर पर चल रहा था. लेकिन जब नतीजों का रुझान यूरोपीय यूनियन से अलग होने के पक्ष में दिखने लगा, तो पाउंड की कीमत 1.41 डॉलर पर पहुंच गई.

8 साल में पहली बार पाउंड पर असर

कारोबारियों का कहना है कि 2008 के आर्थिक संकट के बाद ये पहला मौका है, जब उन्होंने पाउंड की कीमत को इस तरह से बदलते देखा है.

बीबीसी के राजनीतिक मामलों के संवाददाता का कहना है कि जनमत संग्रह के नतीजे का ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था और राजनीति पर नाटकीय असर हो सकता है. उनका ये भी कहना है कि ये असर यूरोप और अन्य देशों को भी अपने दायरे में ले सकता है.

भारतीय कारोबार पर सीधा असर

मुंबई में बीबीसी के बिजनेस रिपोर्टर समीर हाशमी का कहना है कि ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर होने का भारतीय व्यापार पर सीधा असर पड़ेगा.

उनका कहना है कि भारत का ब्रिटेन और यूरोपीय संघ दोनों के साथ कारोबारी संबंध है. जो आने वाले दिनों में प्रभावित होने की संभावना है.

भारत के वित्त सचिव अशोक लवासा ने इस घटनाक्रम पर कहा है कि सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया उपायों के साथ तैयार हैं.

हालात से निपटने को तैयार भारत

कारोबार शुरू होने के साथ ही भारतीय शेयर बाजार और रुपये की कीमत पर बुरा असर पड़ा है. जहां एक ओर बीएसई का सेंसेक्स करीब 900 अंकों की गिरावट के साथ खुला, वहीं शुरुआती कारोबार में रुपये की कीमत भी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुई.

शुरुआती कारोबार में एक डॉलर की तुलना रुपये की कीमत 89 पैसे तक गिर गई. इस बीच केंद्र के आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांता दास का कहना है, "भारत सरकार, वित्त मंत्रालय और आरबीआई ने जनमत संग्रह के बाद उपजे संभावित हालातों पर चर्चा की है. हम हालात का सामना करने के लिॆए तैयार हैं."

वहीं रुपये की गिरती कीमत पर शक्तिकांता दास का कहना है कि रुपये का अवमूल्यन दूसरी एशियाई करेंसी में गिरावट के साथ हो रहा है.

First published: 24 June 2016, 11:41 IST
 
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