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मोदी-शी की मुलाकात: मुद्दा आतंकवाद और मसूद अज़हर का

सादिक़ नक़वी | Updated on: 17 October 2016, 8:02 IST
QUICK PILL
  • गोवा में चल रहे ब्रिक्स सम्मेलन में भारत ने राजनयिक स्तर पर आतंकवाद का मुद्दा प्रमुखता और प्रभावी तरह से उठाया.
  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से साफ कहा कि चीन को आतंक पर अपना स्टैंड क्लीयर करना चाहिए ख़ासकर मसूद अजहर पर.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक मोदी ने शी से कहा है कि कोई भी देश आतंकवाद के खतरे से बचा नहीं है और देशों को आतंकरोधी कदमों को और मजबूत करना होगा और यह भी कि आतंकवाद से मुकाबले के मोर्चे पर देशों के बीच मतभेद नहीं हो सकते. पाक अधिकृत कश्मीर में नियंत्रण रेखा के पार जाकर भारत द्वारा सर्जिकल स्ट्राइक करने के बाद दोनों देशों के नेताओं की यह पहली बैठक थी.

लम्बित मुदों पर चर्चा

पाकिस्तान प्रायोजित आतंक पर भारत और चीन के विचारों के बीच फर्क़ है. चीन ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर के

लिए 50 बिलियन डॉलर से अधिक के निवेश का भरोसा दिया हुआ है. हाल ही में, इस कम्युनिस्ट देश ने एक बार फिर जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर को 'एक आतंकी के रूप में' संयुक्त राष्ट्र के तहत प्रतिबंध लगाने के भारत के प्रयासों पर अड़ंगा डालकर पानी फेर दिया था. 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा है कि भारत इस मुद्दे पर चीन के साथ लगातार बातचीत करना जारी रखे हुए है. उन्होंने उम्मीद जताई कि दूसरा पक्ष भी भारत के तर्कों पर गंभीरता से गौर करेगा. 

स्वरूप ने यह भी जानकारी दी कि यह मुद्दा एक बार फिर उठाया जाएगा जब भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोवाल की अपने चीनी समकक्ष स्टेट काउंसलर यांग जेची से मुलाकात होगी. यह मुलाकात जल्द ही होने जा रही है. 

हाल ही में पाकिस्तानी दैनिक डॉन के पत्रकार सिरिल अलमाइडा की इस खबर, कि किस तरह से पाकिस्तान के विदेश सचिव अजीज चौधरी ने प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, सेना प्रमुख राहील शरीफ समेत पाकिस्तान के वरिष्ठ अधिकारियों से कहा है कि  देश में प्रतिबंधित संगठनों की मौजूदगी को नकारे जाने के कारण पाकिस्तान दुनिया में तेजी से और ज्यादा अलग-थलग पड़ता जा रहा है, से भी लगता है कि चीन तकनीकि आधार पर मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने पर सहमत हो रहा है. 

इस खबर के कारण डॉन के पत्रकार अलमाइडा के देश से बाहर जाने पर रोक लगा दी गई जो अब हटा ली गई है. उनका नाम 'एक्जिट कंट्रोल लिस्ट' में डाल दिया गया था.

चीन ने कई बार मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र से आतंकी घोषित कराने के भारत के कदमों पर अड़ंगा लगाया है

चीन ने अपने फैसले का बचाव करते हुए हाल ही में दावा किया है कि संयुक्त राष्ट्र कमेटी में अजहर को लेकर विचारों में अंतर है. विदेश मंत्रालय के अनुसार शी ने साफ कहा है कि चीन आतंकवाद के हर रूपों और हर तरीकों के खिलाफ है और भारत के साथ इस मुद्दे पर सहयोग बढ़ाया जाना चाहिए. समझा जाता है कि शी ने यह मान लिया है कि आतंकवाद बढ़ रहा है और आतंकी संगठन आईएसआईएस का खतरा फैल रहा है.

यहां यह जानना ज़रूरी है कि चीन, जिसकी अफगानिस्तान में अब बड़ी भूमिका है, अपने सर्वकालिक मित्र पाकिस्तान के जरिए भी तालिबान को वार्ता की टेबुल पर लाने में विफल रहा है. चीन को अब इस बात का डर है कि अगर उसने आईएसआईएस की विचारधारा को फैलने से रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए तो यह उसके झिनझियांग प्रदेश को अपनी चपेट में ले सकता है.

एनसीजी की सदस्यता पर भी विरोध

इस बीच, मोदी ने चीनी राष्ट्रपति के साथ अपनी बैठक में परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनसीजी) में भारत की सदस्यता का मुद्दा उठाया. चीन द्वारा इस समूह में भारत को सदस्यता दिए जाने का विरोध किया गया था जिसकी वजह से भारत को एनएसजी की सदस्यता नहीं मिल सकी थी. इसके बाद से ही दोनों देश इस मुद्दे पर बातचीत जारी रखने की बात कह चुके हैं. दोनों देशों की एक राउण्ड की बाचतीत हो चुकी है. 

इस बीच यह भी खबर है कि चीन ने उल्फा जैसे उग्रवादी संगठन के सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है जिन्होंने चीन-म्यांमार सीमा पर शरणार्थी के रूप में ठिकाना बना रखा है. बैठक के बाद मोदी ने ट्वीट किया-मेरी राष्ट्रपति शी के साथ बैठक फ़ायदेमंद रही. हमने भारत-चीन सम्बंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की है.

First published: 17 October 2016, 8:02 IST
 
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