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हार्ट ऑफ एशिया: अफ़गानिस्तान की पाकिस्तान को खरी-खरी

सादिक़ नक़वी | Updated on: 11 February 2017, 5:47 IST
(प्रेस इनफ़ॉर्मेशन ब्यूरो)
QUICK PILL
  • अमृतसर घोषणापत्र में \'रीजनल काउंटर-टेरर फ्रेमवर्क\' बनाने की बात कही गई है. इसमें जल्द ही विशेषज्ञों की बैठक बुलाने और वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों द्वारा उनके विचारों को अंतिम रूप देने की बात कही गई है.
  • वहीं अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने पाकिस्तान का सीधा नाम लेकर कहा कि वह 500 मिलियन डॉलर की मदद अफगानिस्तान को देने की बजाय अगर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में लगाते तो बेहतर होता.

हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन का अमृतसर में ख़त्म हो गया. इस छठे हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन में 45 देशों से आए प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. सम्मेलन का सबसे बड़ा मकसद युद्ध प्रभावित अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण और स्थिरता की कोशिशों पर चर्चा करना था और यह भी कि अफगानिस्तान में हालात में कैसे सुधार लाया जाए.

कांफ्रेंस के आखिर में सभी देशों के हस्ताक्षर युक्त 'अमृतसर घोषणापत्र' जारी किया गया जिसमें आतंकवाद को क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सहयोग की दिशा में सबसे खतरा बताया गया. घोषणापत्र में क्षेत्र के आतंकी संगठनों का नाम लेते हुए सभी तरह के आतंकवाद और इसके समर्थन के खात्मे का आह्वान किया गया है.

घोषणापत्र में कहा गया है कि हम क्षेत्र में खासकर अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा की जाने वाली हिंसक घटनाओं के चलते सुरक्षा हालात पर बढ़ते खतरों पर गहरी चिन्ता जताते हैं. घोषणापत्र में आतंकी संगठनों जैसे आईएसआईएस/दाएश समेत उससे जुड़े संगठनों हक्कानी नेटवर्क, अलकायदा, इस्लामिक मूवमेन्ट ऑफ उजबेकिस्तान, ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेन्ट, लश्करे-तैयबा, जैश ए- मोहम्मद, टीटीपी, जमात-उल-अहरर, जुनदुल्लाह के साथ विदेशी संगठनों के नाम लिए गए हैं. 

इसमें कहा गया है, हम हार्ट ऑफ एशिया में आतंकी पनाहगाहों को तबाह करने सहित आतंकवाद के सभी रूपों का खात्मा सुनिश्चित करने के लिए समन्वित क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जोरदार अपील करते हैं. इसमें यह भी कहा गया कि इस सिलसिले में हम सभी देशों से अपनी- अपनी राष्ट्रीय आतंक रोधी नीतियों के मुताबिक आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने की अपील करते हैं जो आतंकवाद का समर्थन करते हैं, उन्हें धन मुहैया कराते हैं और आतंकी संगठनों के सुरक्षित पनाहगार बने हुए हैं. 

घोषणापत्र में 'रीजनल काउंटर-टेरर फ्रेमवर्क' बनाने की बात भी कही गई है. रणनीति के फ्रेमवर्क के प्रारूप पर विचार के लिए विशेषज्ञों की जल्द से जल्द बैठक बुलाने और वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों द्वारा उनके विचारों को अंतिम रूप देने की बात कही गई है.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी कहा है कि आतंकी हिंसा का बढ़ता दायरा, आतंकवाद और बाहर से प्रोत्साहित अस्थिरता अफगानिस्तान की शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए गंभीर खतरा है. इसने हमारे पूरे क्षेत्र को खतरे में डाला है. हमारी चुप्पी और निष्क्रियता से आतंकियों और उनके आकाओं का हौसला बढ़ेगा. सम्मेलन में देशों के बीच सम्बंध बढ़ाने तथा विकास जैसे अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा की गई. 

पाकिस्तान को खरी-खरी

अमृतसर घोषणापत्र से पाकिस्तान और दबाव में आ गया है. घोषणापत्र में जिन आतंकी संगठनों का नाम लिया गया है, उनमें से अनेक संगठनों के बारे में जाना जाता है कि वे पाकिस्तान की जमीन का खुला इस्तेमाल करते हैं. कुछ को पाकिस्तान के सुरक्षा प्रतिष्ठानों का संरक्षण भी मिला हुआ है. 2015 के इस्लामाबाद घोषणापत्र में केवल अल कायदा और इस्लामिक स्टेट/दाएश तथा उनसे जुड़े आतंकी संगठनों का नाम लिया गया था. 

पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वहां के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के शक्तिशाली सलाहकार सरताज अजीज ने किया. इसके पहले अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने अपने उद्घाटन भाषण में पाकिस्तान का सीधा नाम लेकर आड़े हाथ लिया और कहा कि किस तरह से पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के पुननिर्माण को लेकर 500 मिलियन डॉलर देने का वादा किया है. अगर वह इस रकम को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में लगाते तो बेहतर होता.

राष्ट्रपति गनी ने सम्मेलन में मौजूद सरताज अजीज का नाम लेकर कहा कि हमें सीमापार के आतंकवाद की पहचान करने और फंड को आतंक के खिलाफ लड़ाई में इस्तमाल करने की जरूरत है. पाकिस्तान ने हमारे देश के विकास के लिए 500 मिलियन डॉलर देने का वचन दिया है. इस राशि को अजीज आतंकवाद से लडऩे में खर्च कर सकते हैं.

राष्ट्रपति गनी ने कहा कि तालिबान के मुताबिक, उन्हें पाक से शह नहीं मिलती तो वे वहां एक महीने भी नहीं टिकते.  अफगानिस्तान ने इस साल सबसे ज्यादा नुकसान सहा है, यह मंजूर नहीं है. 

गनी से कहा है कि आपने हमें 500 मिलियन डॉलर देने का जो वादा दिया है, उसे आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में लगाइए.

इतना ही नहीं, अफगान राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि किस तरह से युद्ध प्रभावित अफगानिस्तान में पिछले साल सबसे ज्यादा जनहानि हुई है. अब यह मंजूर नहीं है. उन्होंने जवाब चाहा कि इस खतरे से निपटने के लिए क्या किया जाना चाहिए. गनी ने कहा कि कुछ देश अभी भी आतंकियों के लिए अभ्यारण्य बने हुए हैं.

गनी के अपने कार्यकाल के प्रारम्भिक दिनों में पाकिस्तानी नेतृत्व से अच्छे रिश्ते थे. पर पाकिस्तान द्वारा तालिबान को वार्ता का मेज पर न ला पाने के कारण उन्हें पाकिस्तान से निराशा हाथ लगी. कहा जाता है कि तालिबान का एक वर्ग पाकिस्तान में पनाह लिए है और ऐशो-आराम की जिन्दगी जी रहा है.

खतरनाक हक्कानी नेटवर्क, जो तालिबान की एक शाखा है, भी पाकिस्तान के सुरक्षा प्रतिष्ष्ठान के एक वर्ग के काफी निकट है. आईएस ने हाल ही में धार्मिक हिंसा की घटनाओं को अंजाम दिया है, उसे भी अफगानिस्तान विदेशी नजरिए से देखता है. भारत और अफगानिस्तान कई मुद्दों पर अपने विचारों खासकर क्षेत्र में आतंकवाद के मुद्दे पर लामबंद हुए हैं.

पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने ट्विटर पर लिखा है, 'सम्मेलन में अजीज ने कहा है कि किसी एक देश पर आरोप लगाने की बजाए इसे उद्देश्यपरक और समग्रता के रूप में देखे जाने की जरूरत है.

अजीज़ और डोभाल मुलाकात?

पाकिस्तानी मीडिया ने रविवार को एक फोटो छापी है जिसमें भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, अजीज के साथ बातचीत करते दिखाई दे रहे हैं. साथ में पाक उच्चायुक्त बासित भी दिखाई दे रहे हैं. अब यह अटकलें जोर पकड़ रही हैं कि अमृतसर में दोनों वरिष्ठ सलाहकार अमृतसर में शनिवार की रात आधे घंटे से ज्यादा समय तक एकसाथ रहे. इसे इसी साल जनवरी में पठानकोट पर हुए हमले के बाद ठंडे होते गए रिश्तों में बर्फ पिघलने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है. 

हालांकि, विदेश मंत्रालय ने अजीज और डोभाल के बीच किसी भी बातचीत से इनकार किया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा कि दोनों के बीच अलग से या द्विपक्षीय बातचीत नहीं हुई. इसके बजाए, अब यह कयास लगाए जा रहे हैं कि यह फोटो उस समय ली गई होगी जब दोनों सलाहकार पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल द्वारा अमृतसर के एक होटल में दिए डिनर के बाद कुछ अनौपचारिक बातचीत कर रहे होंगे.

बताते चलेंकि अजीज अपने कार्यक्रम में बदलाव करते हुए शनिवार को ही अमृतसर आ गए थे. तय समय के अनुसार उन्हें रविवार सुबह आना था. अजीज ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए कहा था कि पाकिस्तान भारत के साथ बातचीत करने को तैयार है. इस बीच भारत ने कहा है कि वह बातचीत के लिए तैयार है लेकिन लगातार होती जा रहीं आतंकी घटनाओं के माहौल में यह सम्भव नहीं हो सकती है.

First published: 6 December 2016, 8:12 IST
 
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