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'बातचीत जारी रहे पर अब तरीका बदलना होगा'

शोमा चौधरी | Updated on: 5 January 2016, 8:32 IST
QUICK PILL

पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकी हमले ने सरकार को पाकिस्तान के प्रति अपनी नीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है.

हमले के एक दिन बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह ने पूर्व विदेश सचिवों और पाकिस्तान में काम कर चुके राजनयिकों से मुलाकात की. मुलाकात का मकसद पाकिस्तान से रिश्तों के बारे में विचार-विमर्श करना था.

इस बैठक में एसके लंबा, जी पार्थपारथी, श्याम सरन, शिवशंकर मेमन, सत्यव्रत पॉल, शरद सब्बरवाल और टीसीए राघवन मौजूद रहे.

कुछ दिनों पहले ही भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाहौर जाकर पाक पीएम नवाज शरीफ से मुलाकात की है. इस घटना को लेकर दोनों देशों के रिश्तों पर पड़ने वाले असर को लेकर कैच ने पूर्व राजनयिक जी पार्थसारथी से बात की.

बातचीत के चुनिंदा अंश:

पीएम मोदी लाहौर गए और दोनों देशों के विदेश सचिवों के बीच वार्ता होनी है. पठानकोट पर हुए हमले से इस पर क्या असर पड़ेगा?


इस हमले के बावजूद बातचीत होनी चाहिए. दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत आतंकवाद पर फोकस होनी चाहिए. संबंधों को तोड़ने का कोई मतलब नहीं है.हमलोग पड़ोसी हैं. हमें अपने संबंधों को सुधारना होगा. इसके अलावा थोड़े समय के लिए बातचीत नहीं करना और हमेशा के लिए बातचीत के दरवाजे बंद कर देने में फर्क है. कहने का मतलब यह है कि जब आप बातचीत खत्म करते हैं तो यह एक संकेत होता है लेकिन फिर भी आपके बीच संबंध बने रहते हैं.

आप विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के साथ हुई बैठक में मौजूद थे. क्या आप बता सकते हैं बैठक में क्या चर्चा हुई और भविष्य में संबंधों को लेकर क्या योजना बनी?


मेरे पास सूचना साझा करने की आजादी नहीं है.

आपकी निजी राय क्या है? गुरुदासपुर हमले की जवाबदेही अब तक तय नहीं हो पाई है. मुंबई हमले और हाफिज सईद को लेकर कोई बड़ा फैसला नहीं किया हो सका है. ऐसे में पंजाब में दूसरी बार हमला हुआ है. मोदी की चर्चित लाहौर यात्रा और यूपीए सरकार के दौरान आतंक पर बीजेपी का कड़ा रुख सरकार के लिए बोझ तो नहीं बन गया? मोदी सरकार अब इस दिशा में कैसे आगे बढ़ेगी? आतंक पर काबू करने के लिए वह किस तरीके से पाकिस्तान पर दबाव बनाएगी?


पिछली सरकार और इस सरकार में यह फर्क है कि यहां विदेश सचिव की मौजूदगी में एनएसए स्तर की बातचीत हुई और यह बातचीत सिर्फ आतंकवाद के मुद्दे पर केंद्रित रही.मैं किसी ग़फलत में नहीं हूं. भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत का तरीका बदलना होगा. इसे और ज्यादा राजनीतिक होना होगा क्योंकि हम बातचीत केवल दोनों देशों के अधिकारियों के दौरों के भरोसे नहीं छोड़ सकते. समग्र बातचीत से अभी तक हमें कुछ मिला नहीं है. आगे भी इससे कुछ मिलने की उम्मीद नहीं है. पत्रकारों और सिविल सोसाइटी को होने वाली बातचीत को लेकर खुश होने की जरूरत नहीं है. पाकिस्तान पर आतंकवाद की नकेल कसने के लिए दबाव बनाना होगा.

पठानकोट पर हुआ हमला क्या दर्शाता है? क्या यह खुफिया एजेंसियों की भयंकर नाकामी नहीं है? मोदी की अप्रत्याशित लाहौर यात्रा के संदर्भ में आप इसे कैसे देखते हैं?


पाकिस्तानी इस हमले के बाद हताशा महसूस कर रहे होंगे. अमेरिका उन्हें आतंकवाद पर सख्त कार्रवाई के लिए पहले से चेताता रहा है. पठानकोट हमले के बाद जैश-ए-मोहम्मद की नाकेबंदी को लेकर दबाव और बढ़ेगा. अब तो पाकिस्तान भी स्वीकार करता है कि संसद पर हुए हमले में जैश की भूमिका थी.सामने आ रहे सबूत इस बात की ओर इस इशारा कर रहे हैं कि इस हमले के लिए मास्टरमाइंड वहीं लोग हैं. कोई भी सबूतों को झुठला नहीं सकता. आतंकियों ने फोन से बहावलपुर बात की जो जैश के मुखिया मसूद अजहर का ठिकाना है, जिसे हमने रिहा कर दिया था.ग्लोबल ट्रैकिंग सिस्टम (जीपीएस) की मदद से हमें हमलावरों का रास्ता पता करने में मदद मिलेगी और निश्चित तौर पर यह पाकिस्तान से जुड़ा हुआ मिलेगा. अमेरिका तब पाकिस्तान पर दबाव बनाएगा.मोदी के अचानक पाकिस्तान दौरे से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमारी स्थिति मजबूत हुई है. हमारे ऊपर भी पाकिस्तान से बातचीत का दबाव था. बतौर प्रधानमंत्री मोदी को घरेलू और विदेशी मंचों पर अपनी स्थिति साफ करनी है. उनकी पाकिस्तान यात्रा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद सराही गई. यह कैसे हुआ इस पर बात करने का कोई फायदा नहीं है. बल्कि इससे बातचीत की शुरुआत हुई. सबसे अच्छी बात यह रही कि यह सबकुछ इस हमले के पहले हो गया.

इन सबके बीच सबसे बड़ी चिंता की बात पाकिस्तान की चुनी हुई सरकार, सेना और आईएसआई के बीच मतभेदों का होना है. हमारी कोशिश शांति वार्ता की है लेकिन वैसी राजनीतिक बातचीत का क्या मतलब जो अक्सर सेना और पाकिस्तान की चुनी हुई सरकार के बीच मतभेदों की बलि चढ़ जाती है?


इस मसले पर मेरा साफ कहना है कि हमें पाकिस्तान को उसी भाषा में जवाब देना होगा. हमें भी उन्हें उतना नुकसान पहुंचाना चाहिए जितना हम कर सकते हैं.

फिर तो इसके परिमाण बेहद खतरनाक होंगे...


मैं फिर से वही बात कहूंगा. मैंने अपने इस विचार को कभी छुपाया नहीं है. मुझे छाती पीटने वाले उदारवादियों की कतई चिंता नहीं है.ऐसी स्थिति में लोग मरेंगे और हमें भी नुकसान होगा. हमें इसकी चिंता करने की जरूरत नहीं है खासकर तब जब हमारे लोग मारे जा रहे हैं.

तो क्या यह और खतरनाक नहीं होगा. चलिए मोदी के आने से पहले के विकल्पों पर विचार करते हैं. पिछले कुछ सालों की पाक नीति को कैसे देखते हैं? कुछ लोग इसे गैर-प्रासंगिक बताते हैं क्योंकि इसमें दिखावे की दोस्ती से लेकर आक्रामक बयानबाजी तक शामिल रहा है. वहीं विपक्ष के तौर पर एनडीए ने हमेशा यूपीए की बातचीत की नीति में रोड़ा अटकाया है


एनडीए उत्साह के साथ सत्ता में आई है. सरकार में होने की व्यावहारिकता और पाकिस्तान के अलावा दुनिया के साथ कूटनीतिक रिश्तों की मजबूरी के चलते यह बदलाव स्वाभाविक है. सबसे अहम बात यह है कि उन्होंने यह संकेत देने की कोशिश की है कि आतंकवाद और बातचीत साथ साथ नहीं चल सकते.मैं आपको इतना बता सकता हूं कि मौजूदा सरकार में पाक नीति को लेकर मौजूदा ढांचे को पूरी तरह बदला जा चुका है. अब यह देखना होगा कि जयशंकर (विदेश सचिव) किस तरह की नीति के साथ सामने आते हैं.
First published: 5 January 2016, 8:32 IST
 
शोमा चौधरी @shomachaudhury

Editor-in-chief of Catch. In 2011, Newsweek International picked her as one of 150 power women "who shake the world". Prior to this, she was the managing editor and one of the founders of Tehelka, an investigative and public interest magazine. She has also worked in Outlook, India Today, the Pioneer and was one of the founders and directors of THiNK, a cutting-edge and internationally acclaimed thoughts and ideas conference. Shoma is a prolific writer and political commentator and has won several awards, including the Chameli Devi Award for Best Woman Journalist in 2011 for venturing into "news landscapes where angels fear to tread", the Ernest Hemingway Award for Journalism, the Ramnath Goenka award and the Mumbai Press Club award for Political Journalism.

She is firmly committed to the founding vision of India and ideas of social equity and justice. Loves rain, forests, rivers. Other than that, her alcoves of sanity are having a good film to watch and free time with her boys.

She can be reached at shoma@catchnews.com

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