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पाकिस्तान: सेना और सरकार के जटिल जाल में फंसा बलूचिस्तान

तिलक देवाशर | Updated on: 9 May 2016, 23:22 IST
QUICK PILL
  • बलूचिस्तान अक्सर सैन्य उत्पीड़न और हिंसा की वजह से सुर्खियों में रहता है. सेना की तरफ से युवाओं को उठा लेना और फिर उनकी लाश का मिलना बलूचिस्तान को अक्सर सुर्खियों में रखता है.
  • हालांकि इस बार बलूचिस्तान सेना और असैन्य अधिकारियों के भ्रष्टाचार की वजह से सुर्खियों में है. बलूचिस्तान के विकास के लिए आई रकम का बड़ा हिस्सा सेना और नागरिक प्रशासन के अधिकारियों की भेंट चढ़ जाता है.

बलूचिस्तान अक्सर गलत कारणों से सुर्खियों में रहता है. सेना की तरफ से किए जाने वाले मानवाधिकार उल्लंघन के मामले, गायब लोग और लगातार होने वाली हत्याएं. बलूचिस्तान एक बार फिर से सुर्खियों में है. लेकिन इस बार हिंसा की वजह से नहीं बल्कि भ्रष्टाचार के कारण.

6 मई को क्वेटा सिविल सेक्रेटेरिएट से वित्त सचिव मुस्ताक रायसैनी और अन्य अधिकारियों की गिरफ्तारी बड़ी खबर रही. इन सभी लोगों के घर से 73 करोड़ रुपये नकद और 4 करोड़ रुपये की ज्वैलरी बरामद की गई. 

बरामद की गई रकम 2013-15 के बीच बलूचिस्तान के विकास के लिए भेजी गई थी. अगर इस रकम को एक संदर्भ में देखा जाए तो यह 2015-16 में प्रांतीय सरकार की तरफ से स्थानीय लोगों के जनकल्याण पर किए जाने वाले बजटीय आवंटन की रकम के बराबर है.

मार्च 2016 में नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो ने बलूचिस्तान डिवेलपमेंट अथॉरिटी के चेयरमैन के घर से 5.9 करोड़ रुपये बरामद किए थे. उन पर अपने पद के दुरुपयोग करने का आरोप है जिसकी वजह से डिवेलपमेंट संबंधी रोड प्रोजेक्ट में हुई धांधली के कारण सरकारी खजाने को 19.6 करोड़ रुपये की चपत लगी.

मार्च 2016 में नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो ने बलूचिस्तान डिवेलपमेंट अथॉरिटी के चेयरमैन के घर से 5.9 करोड़ रुपये बरामद किए थे

हालांकि ऐसा भी नहीं है कि केवल नागरिक प्रशासन ही भ्रष्टाचार के मामलों में संलिप्त रहा है. पिछले साल 21 अप्रैल को पाकिस्तानी मीडिया में यह खबर सुर्खियों में रही कि सैन्य प्रमुख ने भ्रष्टाचार के मामले में कई अधिकारियों के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं.

इन अधिकारियों में एक लेफ्टिनेंट जनरल, एक मेजर जनरल, पांच ब्रिगेडियर, एक कर्नल, तीन लेफ्टिनेंट कर्नल और एक मेजर शामिल थे. 

सभी अधिकारी फ्रंटियर कॉर्प्स से जुड़े हुए थे जो बलूचिस्तान में काम करने वाली सेना की ईकाई है. सैन्य प्रमुख के कार्यकाल के दौरान ही इन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई.

जमीनी सच्चाई

बलूचिस्तान में सेना और असैन्य अधिकारी दोनों ही पैसा बनाते हैं. ऐसा माना जाता है कि बलूचिस्तान धनी प्रांत है और वहां बेेहद पैसा है. लेकिन जमीनी सच्चाई इसके बिलकुल उलट है. बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे गरीब और कमजोर प्रांत है.

2008 की वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट बलूचिस्तान के बारे में स्थिति साफ कर देती है. रिपोर्ट के मुताबिक बलूचिस्तान में डिवेलपमेंट के लिए बेहतर संसाधन है. यहां प्राकृतिक संसाधनों की बहुलता है. इसका तटीय इलाका पाकिस्तान का दो तिहाई है और यहां व्यापार की प्रबल संभावना है. 

हालांकि इसके बावजूद इस प्रांत में विकास की स्थिति बिलकुल खराब है. इंफ्र्रास्ट्रक्चर बिलकुल न के बराबर है. पानी की समस्या है और इन सबके अलावा वित्तीय समस्या सबसे बड़ी है. 

बलूचिस्तान के विकास की दर बेहद कमजोर है. यहां रोजगार की स्थिति बेहद भयानक है और यह अन्य प्रांतों के मुकाबले सामाजिक ढांचें पर सबसे निचले पायदान पर बना हुआ है.

बलूचिस्तान में बेहद खराब स्थिति में रहने वाले गरीब परिवारों की आबादी 35 फीसदी है जो राष्ट्रीय औसत सेे कहीं ज्यादा है

बलूचिस्तान की 13 फीसदी आबादी गरीबी के लिहाज से संवेदनशील है. बलूचिस्तान के बलूच इलाकों में करीब 60 फीसदी से अधिक परिवार गरीबी रेखा से नीचे गुजर बसर करते हैं. 

बलूचिस्तान में 35 फीसदी परिवार गंभीर रूप से गरीबी रेखा के नीचे रहते हैं जो बेहद भयानक स्थिति है. राष्ट्रीय  तौर पर यह औसत 21 फीसदी है जबकि पंजाब प्रांत में यह आंकड़ा 11 फीसदी है.

2015 में बलूचिस्तान सबसे दयनीय स्थिति वाला प्रांत रहा. सभी पायदानों पर यहां की स्थिति दयनीय रही. यहां के 43 फीसदी बच्चे कुपोषण के शिकार थे. 

दूसरे मिलेनियम डिवेलपमेंट गोल में बलूचिस्तान की तीनों पायदान पर स्थिति राष्ट्रीय औसत पर तय लक्ष्य से बेहद पीछे रही. यह बलूचिस्तान का वास्तविक चेहरा है.

हालांकि इसके बावजूद सेना और असैन्य अधिकारी गरीब प्रांत को और अधिक गरीब बनाने पर तुले हुए हैं. अगर लूट की रकम का थोड़ा हिस्सा भी शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च किया गया होता तो बलूचिस्तान की स्थिति थोड़ी और गंभीर होती.

हालांकि यह दिखने वाली सच्चाई का महज एक पहलू है. अभी भी भ्रष्टाचार की कई ऐसी दबी कहानियां हैं जो अभी तक सामने नहीं आ पाई हैं.

फ्रंटियर कॉर्प्स बलूचिस्तान में अलगाववाद से लड़ रहा है. सेना की यह ईकाई हजारों नहीं तो सैंकड़ों बलूच युवाओं को उठाती है और फिर उनकी लाश मिलती है. बलूचिस्तान में उठाना और फिर माकर फेंक देना लोगों की आम जुबान में चढ़ गया शब्द है. 

भ्रष्ट अधिकारी बलूचिस्तान में यह तय करते हैं कि क्या राष्ट्रवाद है और क्या राष्ट्रविरोधी. बलूच लोग आगे कुंआ और पीछे खाई जैसी स्थिति में फंस गए हैं. यहां कोई विकास इसलिए नहीं है कि डिवेलपमेंट का जो पैसा आता है वह भ्रष्ट अधिकारियों की भेंट चढ़ जाता है और दूसरा फिर इन्हीं भ्रष्ट अधिकारियों के हाथों बलूच युवा सताए और मार दिए जाते हैं. बलूच युवाओं के बीच अलगाववाद की भावना मजबूत होने की यह बड़ी वजह है.

First published: 9 May 2016, 23:22 IST
 
तिलक देवाशर @catchhindi

Tilak Devasher retired as Special Secretary, Cabinet Secretariat, to the Government of India. His book Pakistan: Courting the Abyss is releasing shortly.

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