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थेरेसा मे की बातें बड़ी-बड़ी, मगर ठोस कुछ भी नहीं

सादिक़ नक़वी | Updated on: 10 November 2016, 7:35 IST
QUICK PILL
  • भारत को ब्रिटेन का \'सर्वाधिक महत्वपूर्ण और करीबी मित्र\' बताते हुए ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे नई दिल्ली की यात्रा पर रवाना हुईं थीं. 
  • उन्होंने भारत को दुनिया की होने वाली महाशक्ति कहा था. मगर उनकी नई दिल्ली यात्रा से कोई ज्यादा फायदा मिलता साबित नहीं हो रहा है.

थेरेसा मे की यात्रा के अगर सकारात्मक पहलू पर गौर किया जाए तो ब्रिटेन सीमापार आतंकवाद के मोर्चे पर भारत के साथ होता दिखता है. दोनों देशों ने अपने संयुक्त घोषणापत्र में इस पर गहरी चिन्ता जताई है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी उरी हमले की निन्दा करते हुए 26/11 के मुम्बई हमलों और पठानकोट हमले के हमवालरों को न्याय के कटघरे में खड़ा करने की बात कही है. थेरेसा में ने भी अभी हाल में उरी हमले की निन्दा की थी.

यात्रा की सार्थकता

ब्रिटेन की प्रधानमंत्री के तौर पर थेरेसा मे यूरोप के बाहर अपने पहले द्विपक्षीय दौरे पर भारत आई हैं. पिछले दशक में ब्रिटिश प्रधानमंत्री की यह पांचवीं यात्रा है और ब्रिटेन के ब्रेग्जिट के बाद ब्रिटिश प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा है. जनमत संग्रह में ब्रिटेन ने यूरोपीय संघ से अलग होने का निश्चय किया था. और अब ब्रिटेन नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती भारत जैसे उभरती अर्थव्यवस्था वाले गैर-यूरोपीय देशों के साथ व्यापार सम्बंधों को मजबूत करना है.

देखा जाए तो भारत के यूके के साथ रिश्ते बड़े पैमाने पर या तो सुस्त रहे हैं या स्थिर रहे हैं. जबकि फ्रांस और जर्मनी जैसे अन्य यूरोपीय देशों के साथ सहयोग बढ़ाव पर रहा है. फ्रांस के साथ लाखों बिलियन डॉलर का राफेल एयरक्राफ्ट का सौदा अभी हाल में ही हुआ है.

वीज़ा नियमों में राहत नहीं

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-यूके टेक समिट के दौरान दिए अपने भाषण में साफ कहा कि शिक्षा हमारे छात्रों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और इससे हमारी भविष्य की भागीदारी पारिभाषित होगी. हमें शिक्षा और शोध के अवसरों में हमारे युवाओं की आवाजाही और भागीदारी को प्रोत्साहित करना चाहिए. यूके द्वारा वीज़ा नियमों में ढील दी जानी चाहिए. लेकिन इस पर ब्रिटिश प्रधानमंत्री की तरफ से कोई ठोस ऑफर नहीं मिला, ख़ासकर हाल ही में यूके द्वारा कड़े किए गए वीसा नियमों के संदर्भ में.

हालांकि थेरेसा मे ने यह तो कहा कि 10 में से 9 वीसा आवेदन पहले ही स्वीकार कर लिए गए हैं. यूके यूरोपीय संघ के बाहर के होनहार और मेधावी युवाओं को अपने देश की ओर आकर्षित करने में उत्सुक है.

मगर मे के दावे के उलट भारत से यूके जाने वाले छात्रों की जो संख्या साल 2010 में 68,238 थी, वह साल 2015 में गिरकर 11,864 पर आ गई है. मे ने छात्रों द्वारा शिक्षा पूरी करने के बाद वहां रुकने के लिए अवधि भी तीन साल से घटाकर दो साल किए जाने मुद्दे को भी नजअंदाज किया. सरकार ने नियम बना दिया है कि केवल उन्हीं प्रोफशनलों के ब्रिटेन में रुकने की

अनुमति दी जाएगी जिनकी आय सालाना 35,000 पौंड या उससे अधिक होगी. इससे भारतीय छात्रों की संख्या में गिरावट दर्ज हुई है जबकि चीन के छात्रों की संख्या में इजाफा हुआ है.

हालांकि एक भारतीय राजनयिक ने कहा कि ऐसा इसलिए भी हुआ है क्योंकि भारतीय छात्र अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद काम को प्राथमिकता देते हैं जबकि अधिकांश चीनी छात्र अपने देश लौट जाते हैं.

थेरेसा मे ने भारतीयों के वीज़ा नियम की शर्तों से ज्यादा वहां रुकने पर कोई आश्वासन नहीं दिया. उन्होंने कहा कि इस वादे का पूरा होना उन भारतीयों की ब्रिटेन से वापसी की गति और संख्या पर निर्भर करेगा, जिन्हें वहां रहने का अधिकार नहीं है. थेरेसा ने कहा कि हमें ऐसे भारतीयों के भारत वापस लौटने पर तेजी से काम करने की जरूरत है. 

वहीं विदेश मंत्रालय ने कहा कि यूके उन लोगों को भी वापस लेने का भारत पर दबाव डाल रहा है जिनके बारे में वह मान लेता है कि ये लोग भी भारतीय हैं. हमें पहले यह चेक करने की जरूरत है कि कौन भारतीय हैं. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अब इसमें लीगल पेंच भी आ गया है. कुछ सम्बंधित लोग कोर्ट चले गए हैं. उन्हें वैध यात्रा दस्तावेजों की जरूरत है. प्रवक्ता ने यह भी कहा कि हम अंतराष्ट्रीय नियमों का पालन करेंगे.

थेरेसा ने भारत के साथ व्यापार पर कहा कि भारत से आने वाले व्यापारिक यात्रियों को रजिस्टर्ड ट्रैवलर स्कीन के तहत ब्रिटेन जल्दी क्लियरेंस दिलवाएगा. वह ब्रिटेन को मुक्त व्यापार का वैश्विक प्रतीक बना देना चाहती हैं और चाहती हैं कि भारत ग्रेट क्लब में अपने बिजनेस एक्जीक्यूटिव को नामांकित करने वाला पहला देश बने.

भगोड़ों का प्रत्यर्पण

भारत में आपराधिक और भ्रष्टाचार मामलों का सामना कर रहे भारतीयों के लिए यूके पसंदीदा ठिकाना बन गया है. दोनों नेताओं की मुलाकात के बाद इस मामले पर और ज्यादा सहयोग के संकेत दिए गए हैं.

संयुक्त घोषणापत्र में दोनों नेताओं ने सहमति जताई है कि अपराधियों और भगोड़ों को कानून से भागने की अनुमति नहीं दी जाएगी. दोनों नेताओं ने साझा विधि सम्मत संधि के तहत सहयोग की कड़ी प्रतिबद्धता जताई है. इसी क्रम में उन्होंने प्रत्यर्पण मामलों से जुड़े दोनों पक्षों के अधिकारियों को जल्दी एक-दूसरे से मिलने का निर्देश दिया ताकि दोनों देशों की कानूनी प्रक्रिया और जरूरतों की बेहतर समझ विकसित हो सके. साथ ही वे विलम्ब के कारणों की पहचान कर सकेंगे और प्रत्यर्पण के लम्बित अनुरोधों में तेजी लाएंगे.

सूत्रों के अनुसार भारत ने ब्रिटेन से शराब कारोबारी विजय माल्या और अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकाप्टर सौदे के कथित बिचौलिए क्रिस्टीन मिशेल, नेवी वार रूम लिंक के किंगपिन रवि शंकरन सहित करीब 57 वांछित लोगों को प्रत्यर्पित करने को कहा है और सूची सौंपी है, ताकि उन्हें यहां न्याय की जद में लाया जा सके. दूसरी ओर थेरेसा ने 17 लोगों के प्रत्यर्पण अथवा उनके सबूत मांगे हैं.

हाल ही में, गुजरात दंगों के अभियुक्त समीर पटेल को भारत प्रत्यर्पित किया गया है. वह पहला नागरिक है जिसका प्रत्यर्पण किया गया है. 

अन्य क्षेत्रों में सहयोग

विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार दोनों देशों ने रक्षा सम्बंधों पर भी विचार-विमर्श किया. प्रधानमंत्री मोदी ने यूके और भारत की कम्पनियों के बीच साझेदारी की बात कही है. उल्लेखनीय है कि भारत ने रक्षा क्षेत्र में एफडीआई नियमों को उदार बनाया है. 

मोदी ने कहा कि मैं ब्रिटिश कम्पनियों को बढ़ावा देना चाहता हूं कि वे भारतीय रक्षा क्षेत्र की ओर देखें. यहां अपार अवसर हैं. मैं उन्हें आमंत्रित करता हूं कि वे भारतीय कम्पनियों के साथ साझेदारी विकसित करें ताकि मैन्यूफैक्चरिंग टैक्नालॉजी ट्रांसफर और सह-विकास पर ध्यान केन्द्रित हो.

थेरेसा ने घोषणा की कि यूके भारत के 75 स्टार्ट-अप में 160 मिलियन पाउंड का निवेश कर रहा है. इससे रोजगार के अवसर पैदा होंगे और भारत के कई राज्यों में महत्वपूर्ण सेवाएं सुलभ होंगी. उन्होंने स्टार्टअप इंडिया वेन्चर कैपिटल फंड के लिए अलग से 20 मिलियन पौंड देने की घोषणा की. इस फंड से 30 इंटरप्राइजेज को समर्थन मिलेगा और अन्य निवेशकों से अतिरिक्त 40 मिलियन पाउंड मिलेंगे.

साथ में समीर चौगांवकर

First published: 10 November 2016, 7:35 IST
 
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